
जबलपुर (जयलोक)। पत्रकार गंगा पाठक से जुड़े आदिवासी भूमि धोखाधड़ी मामले में कोर्ट ने फरार ईनामी रामाकांत सतनामी पर एक और एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जबलपुर की प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने जमीन घोटाले और जालसाजी के गंभीर मामले में भूमि दलाल रामाकांत सतनामी, कृष्ण कुमार बर्मन, वीरन लाल बर्मन तथा अन्य आरोपियों और गवाहों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 175(3) एवं दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत पारित किया गया।
यह मामला तब सामने आया जब रामाकांत सतनामी ने शिकायतकर्ता प्रखर पाठक के माता-पिता गंगा पाठक और ममता पाठक के पक्ष में कई विक्रय विलेख निष्पादित कराए। बाद में जब नामांतरण प्रक्रिया हुई, तब खुलासा हुआ कि यह जमीनें फजी तरीके से बेची गई थीं और वास्तव में ये जमीनें आदिवासी वर्ग के वास्तविक मालिकों की थीं। शिकायत के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी जमीन मालिक प्रस्तुत किए, जाली दस्तावेज तैयार किए और इन्हें सामान्य वर्ग के व्यक्ति दिखाकर भूमि विक्रय कराया।
इससे पहले शिकायतकर्ता के पिता गंगा पाठक द्वारा थाना ग्वारीघाट में शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज हुई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस की जाँच धीमी रही और कई गंभीर बिंदुओं को अनदेखा किया गया, जिसके कारण उन्हें अदालत की शरण लेनी पड़ी। अदालत ने माना कि यह पूरा प्रकरण एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र है, जिसमें मृत अथवा अनुपस्थित भूमि मालिकों का प्रतिरूपण किया गया, फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और पहले से बेची गई जमीनों को दोबारा बेचकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई। अदालत ने थाना बरगी पुलिस को आदेश दिया कि वे तत्काल एफआईआर दर्ज करें। रामाकांत सतनामी पर इससे पहले भी जालसाजी, मृत भूमि मालिकों के नाम से फर्जी दस्तावेज़ बनाने, नकली भू-अधिकार पुस्तिकाएँ तैयार करने और प्रतिरूपण के गंभीर आरोप लग चुके हैं। उसके नेटवर्क पर करोड़ों रुपये के अवैध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।

पूर्व में दो मामले दर्ज
इसके पूर्व भी रामाकांत सतनामी के खिलाफ दो मामले थाने में दर्ज है। जिसमें वह फरार चल रहा है। अब तीसरी एफआईआर दर्ज करने के लिए कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया है।

Author: Jai Lok







