
जबलपुर (जयलोक)। नगर निगम जबलपुर के पूर्व विधि अधिकारी अनिल मिश्रा की ओर से सक्षम न्यायालय विशेष न्यायाधीश के समक्ष भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत परिवाद प्रस्तुत किया गया है। मुख्य विधि अधिकारी की ओर से अधिवक्ता अशोक तिवारी ने तथ्यों के साथ दलील दी और अनावेदकों मनोज बरैया तत्कालीन संयुक्त संचालक क्षेत्रीय कार्यालय स्थानीय निधि संपरीक्षा सिविक सेंटर तथा दो वरिष्ठ संपरिक्षों पर रिश्वत माँगने का आरोप लगाया गया है। जिसके अंतर्गत भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 (क) तथा अन्य धाराओं के अंतर्गत तीनों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध करने हेतु परिवाद प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय से यह अनुरोध किया गया है कि यथा उचित प्रावधानों के आलोक में परिवाद पर संज्ञान लेकर अपराध दर्ज करें। पूर्व विधि अधिकारी अनिल मिश्रा की ओर से प्रस्तुत किए गए तथ्यों पर विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने तीनों अनावेदकों को नोटिस जारी कर आगामी पेशी 8 अक्टूबर 2025 को उपस्थित होने तथा अपना पक्ष प्रस्तुत करने के लिए तिथि तय कर दी है।
आवेदक पूर्व मुख्य विधि अधिकारी अनिल मिश्रा के द्वारा पूर्व में अनेकों बार समयमान, वेतनमान लगाने आवेदन दिए गए थे। आवेदन के साथ उनके द्वारा सभी नियमसम्मत दस्तावेज भी लगाए गए थे परंतु अनावेदकों द्वारा जानबूझकर रिश्वत ना देने के कारण बारबार प्रकरण को निरस्त किया गया। जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को समयमान, वेतनमान का लाभ दिया गया उसी के आधार पर अनिल मिश्रा का प्रकरण रिश्वत ना देने के कारण निरस्त कर दिया गया जो कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एवं भारतीय सुरक्षा संहिता के प्रावधानोंं का घोर उलंघन हैं साथ ही पद के दुरूपयोग का मामला है। किसी भी शासकीय लोक सेवकों का आचरण भेदभावपूर्व नहीं होना चाहिए और ना ही सिविल सेवा आचरण के विपरित काम करना चाहिए। पंरतु तीनों अनआवेदकों द्वारा रिश्वत की माँग की गई। रिश्वत ना देने के कारण लगातार विभिन्न प्रकार से प्रताडि़त किया गया। इसी के विरूद्ध न्यायालय में प्रकरण दर्ज किया गया।

Author: Jai Lok







