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फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट्स डील को लेकर भारत अंधा हो गया: चेलानी

ईरान ने अपनी मिसाइलों-ड्रोन से अमेरिकी-इजराइली डिफेंस सिस्टम को तहस नहस कर दिया  

नई दिल्ली (जयलोक)
फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रहा भारत फ्रांस से और 114 राफेल फाइटर जेट्स खरीदने की योजना पर काम कर रहा है। यह संभावित डील देश के रक्षा इतिहास की सबसे बड़ी डील होगी। इसकी कुल लागत करीब चार बिलियन डॉलर यानी 3.74 लाख करोड़ रुपए है।

राफेल 4.5+ पीढ़ी के बेहद एडवांस फाइटर जेट्स हैं। इसको जंग के लिए अजेय जेट बताया जाता है। तमाम एक्सपर्ट इस जेट को भारत की जरूरत और भारतीय सेना के लिए सबसे उपयुक्त बता रहे हैं, लेकिन जाने माने सामरिक मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी इस डील की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस डील को लेकर भारत अंधा हो गया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक्स पर चेलानी ने मौजूदा वक्त के युद्ध और उसके तरीके को लेकर एक लंबे पोस्ट में लिखा- भारत की सैन्य रणनीति अभी भी अगले बड़े पारंपरिक युद्ध की तैयारी पर टिकी है, लेकिन उसके दो पड़ोसी विरोधी देश चीन और पाकिस्तान उसके खिलाफ परंपरा से अलग अभियान चला रहे हैं।

2020 में लद्दाख में चीन द्वारा बिना एक गोली चलाए चुपके भारत की भूमि हड़पने की घटना इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। मौजूदा वक्त में अमेरिका और ईरान युद्ध ने नए तर्क को हाइलाइट किया है। इस युद्ध ने दिखाया है कि जंग में बढ़त या लाभ केवल तकनीकी रूप से श्रेष्ठ पक्ष के पास नहीं रह गया है बल्कि इस वक्त दो देश तकनीकी को अपने पक्ष में अनुकूल बना रहा है उसका पलड़ा भारी है।

चेलानी ने आगे लिखा- भारी बल प्रयोग के बावजूद अमेरिका ईरान की ओर से लगातार मिल रही प्रतिक्रिया के सामने बेबस है। वह इस जंग में जीत का झंडा बुलंद नहीं कर पा रहा है। यह एक ऐसा सबक है जिसे भारत को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर ऐसे समय में जब वह लगातार बड़े-बड़े महंगे हथियार प्लेटफॉर्म खरीद रहा है। भारत दुनिया का एक सबसे बड़ा हथियार इंपोर्टर देश है। वह फ्रांस के साथ करीब 40 अरब डॉलर के इस डील पर आगे बढ़ रहा है। यह रकम इस शताब्दी में भारत द्वारा स्वदेशी मिसाइल और ड्रोन के विकास पर खर्च राशि से ज्यादा है।

चेलानी तर्क देते हुए कहा कि यूक्रेन जंग की तरह ईरान युद्ध यह दर्शाता है कि कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलें अब निर्णायक हथियार बन गए हैं। ये प्रतिरोध और जवाबी कार्रवाई के लिए पारंपरिक हाई-एंड और भारी-भरकम महंगे सिस्टम से अक्सर ज्यादा प्रभावी साबित हो रहे हैं। भारत का महंगा पारंपरिक युद्ध का जुनून उसे इस सच्चाई से अंधा कर रहा है1 बड़े-बड़े महंगे हथियार अब रणनीतिक रूप से समान लाभ नहीं दे रहे हैं। चेलानी का यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब दुनिया में युद्ध की नई रणनीति को लेकर बहस छिड़ी है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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