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बहुत नाइंसाफी है, अब तेरा क्या होगा ‘मेरे लाल’…

(जयलोक)। दुनिया में हर बाप की एक ही इच्छा होती है कि उसका जो लाल है यानी बेटा वो उससे भी बड़ा आदमी बने उसका नाम उससे भी कहीं ज्यादा रोशन हो। हर बाप यही कोशिश करता है कि उसका बेटा कहीं ना कहीं सेट हो जाए विशेष कर नेताओं को तो लगता है कि यदि उनका बेटा उनकी तरह राजनीति में आ गया तो सैकड़ों कार्यकर्ताओंं के सर को लांघता हुआ सबसे आगे खड़ा हो जाएगा और राजनीति में अपना झंडा गाड़ देगा और जब राजनीति में झंडा गाड़ देगा तो फिर चारों तरफ  बहार ही बहार है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नए  प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जी ने नेताओं के बेटे, बेटियों, रिश्तेदारों को पार्टी में पद देने से इनकार कर देने पर वे तमाम नेता आंसू बहाने लगे जो लंबे अरसे से अपने-अपने बेटे बेटियों  को राजनीति के मैदान में सेट करने में जुटे हुए थे।

 

खंडेलवाल जी ये बहुत ही बड़ी नाइंसाफी है इन नेताओं को क्या मालूम था कि आप ऐसी कोई स्कीम चालू कर दोगे जिससे उनके बेटे बेटियों  की आगामी जिंदगी ही बर्बाद हो जाएगी क्योंकि नेताओं के बेटे हमेशा से नेता ही बनने की कोशिश करते रहे हैं और सेट भी होते रहे, सभी पार्टियों में एक जैसी ही परिपाटी है लेकिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने जो तीर फेंका है वो सीधा उन नेताओं के सीने में जाकर लगा है जो इस बात का रास्ता देख रहे थे कि उनका बेटा राजनीति में कितने अंदर तक सेट हो पाता है। वैसे भी नेताओं के खून में ही नेतागिरी के कीटाणु होते हैं और फिर जब वे अपने पिता का राजनीति में जलवा देखते हैं तो उनको भी लगता है कि नौकरी चाकरी में क्या रखा है बेहतरीन नेतागिरी करो, जय जयकार भी होगी, पद भी मिलेगा और माल भी, लेकिन ‘अब दिल के अरमां आंसुओं में बह गए’। नेताओं के बेटे क्या करें क्या ना करें इस बात को लेकर भारी परेशान है क्योंकि इतना लंबा समय नेतागिरी में सेट होने में जो लगा दिया तो अब बाकी किसी काम के बचे नहीं और एक बार जिसको नेतागिरी का शौक लग जाता है उसके कीटाणु एड्स से भी ज्यादा खतरनाक होते हैं जो एक बार अंदर गए तो फिर बाहर नहीं निकल पाते। अपनी तो खंडेलवाल जी से एक ही हाथ जोडक़र प्रार्थना है कि हुजूर ऐसा मत करो कितने अरमान थे उन तमाम नेताओं के कि उनका बेटा उनसे भी बड़ा नेता बनेगा, विधायक बन जाएगा, मंत्री बन जाएगा, मुख्यमंत्री बन जाएगा लेकिन आपने एक ही झटके में उनके तमाम अरमानों पर गर्म पानी डाल दिया अपने को तो लगता है कि वे तमाम नेता जो अपने-अपने बच्चों को राजनीति में सेट करने की कोशिश में लगे थे उनके दिल से एक ही आह निकल रही है ‘बड़ी नाइंसाफी की है हुजूर आपने है अब क्या होगा मेरे लाल का’ मुस्कुराती फोटो
कुछ समय पहले प्रदेश कांग्रेस के दो बड़े नेता पंद्रह महीने के कांग्रेस की सरकार ढह जाने पर एक दूसरे पर आरोप लगा रहे, थे कमलनाथ जी कह रहे थे कि लोगों को लगता था कि दिग्गी राजा पीछे से सरकार चला रहे हैं तो दिग्गी राजा का कहना था कि  सिंधिया और कमलनाथ के बीच में ‘पर्सनैलिटी क्लेशेज’ थे इसलिए सरकार गिर गई अब दो दिन पहले दोनों की एक मुस्कुराती हुई फोटो वायरल हुई है जिसमें दोनों एक दूसरे के कंधे पर हाथ रखकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वे दोनों ‘दो जिस्म एक जान हैं’ लगता है ऊपर से जमकर दम दी गई होगी कि एक तरफ  तो हम गुटबाजी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं दूसरी तरफ आप जैसे बड़े नेता एक दूसरे के खिलाफ  मोर्चा खोले हुए हैं बेहतर है कि जल्दी एक फोटो खिंचवाओ, दोनों मुस्कुराओ भले ही वह मुस्कुराहट नकली ही क्यों ना हो और जनता के बीच उसको वायरल करो यह भी कहो कि हम दोनों के बीच में आज से नहीं बल्कि पचास साल से गहरे संबंध हैं यानी संबंधों की ‘गोल्डन जुबली’ हो चुकी है इसलिए  मतभेद हो सकते थे लेकिन मनभेद नहीं है। भाजपा तो कांग्रेस के हर कदम पर नजरें गड़ाए रहती है और मजा लेने से चूकती नहीं है तो उसने भी कह दिया कि यह नकली मुस्कुराहट साफ -साफ  बतला रही है कि दोनों अभी भी एक दूसरे से ना खुश हैं लेकिन जनता को तो बताना पड़ेगा कि हम सब एक हैं अगर पहले ही एक होते तो आज ये दिन ना देखने पड़ते और ना ही सरकार जाती। लेकिन कांग्रेस में तो ये हमेशा से चलता आया है नेता कहते हैं हमारे यहां लोकतंत्र है इसलिए हर व्यक्ति अपनी बात कह सकता है लेकिन ये भूल जाते हैं यह लोकतंत्र नहीं बल्कि अराजकता है।

 

कथा में बुलाना कौन सा गुनाह
पीडब्ल्यूडी भोपाल रीजन में तैनात एक चीफ  इंजीनियर ने नोट शीट में आदेश निकाला कि उनके घर में ‘सत्यनारायण की कथा’ होने वाली है इसलिए तमाम स्टाफ  को प्रसाद ग्रहण करने के लिए उनके निवास पर आना होगा चूंकि चीफ इंजीनियर का आदेश था तो पूरा डिपार्मेंट उनके घर पहुंच गया इसको लेकर बड़ा विवाद मच गया कि इस मामले में साहब जी ने नोट शीट क्यों चलाई अरे भाई सत्यनारायण की कथा है वैसे भी सत्यनारायण की कथा सुनना और सुनाना तो बड़े पुण्य का काम होता है उसमें तो यह भी बताया है कि जो कथा नहीं सुनता या कथा नहीं करता उसको क्या-क्या भोगना पड़ता है तो ऐसे कथा सुनने से कौन इनकार कर सकता था और फिर प्रसाद देना ये कौन सा गुनाह हो गया जिस पर लोग सवाल उठाने लगे। भाई साहब ने नोटशीट लिख दी चूंकि नोट शीट पर जो चीज़ लिखी जाती है वो पत्थर की लकीर हो जाती है अगर वे मौखिक रूप से अपने डिपार्टमेंट के लोगों से कहते तो हो सकता है बहुत से लोग कथा में न पहुंचते लेकिन चूंकि नोट शीट में यह बात कही गई थी तो इससे कोई इनकार नहीं कर सकता था और वैसे भी सत्यनारायण भगवान की कथा अगर उन भाई साहब ने अपने स्टाफ  को सुना भी दी तो एक पुण्य का ही काम तो किया है कोई पाप तो कर नहीं दिया। लोग अपने घर में कथा नहीं कर पा रहे या नहीं सुन पा रहे ऐसे में इस पापी संसार में और ऐसे डिपार्टमेंट में रहते हुए अगर इंजीनियर साहब ने कथा सुन ली और अपने स्टाफ को भी कथा सुना दी तो कम से कम उसका अच्छा प्रतिफल तो मिलेगा उसमें कोई संदेह की बात नहीं है। अपना तो मानना है कि आप तो हर महीने कथा करो और हर महीने अपने नोट शीट के माध्यम से स्टाफ को बुलाओ इस बात की चिंता मत करो कि लोग क्या कह रहे हैं वैसे भी एक मशहूर गाना है ‘कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना, छोड़ो बेकार की बातों में कहीं बीच न जाए कथा की रैना’।

 

सुपर हिट ऑफ द वीक
‘सुनती हो पुरातत्व विभाग वालों को औरत का हजारों साल पुराना जबड़ा मिला है’ श्रीमानजी ने श्रीमती जी से कहा
‘लेकिन उन्हें कैसे पता चला कि जबड़ा औरत का है? श्रीमती जी ने पूछा
‘क्यों कि जबड़ा अभी
भी चल रहा है’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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