
सब्सिडी होगी समाप्त, कर्मचारियों की होगी छँटनी, कर्मचारी 9 से करेंगे आंदोलन
जबलपुर (जयलोक)। मध्य प्रदेश की बिजली का अब बाजारीकरण होने जा रहा है। इस बाजारीकरण से बिजली के दाम काफी महंगे होंगे। बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी के भी खत्म होने के आसार बढ़ते जा रहे हैं। वहीं यह भी दावा किया जा रहा है कि बिजली के बाजारीकरण से कर्मचारियों की छटनी भी हो सकती है। नैशनल स्टॉक एक्सचेंज इसी जुलाई के अंतिम हफ्ते से इलेक्ट्रिसिटी फ्यूचर्स की शुरूआत करने जा रहा है, जिससे बिजली जैसे अहम् सेक्टर को अब फायनेन्शियल मार्केट में शामिल किया जा रहा है। इसमें बिजली की डिलेवरी नहीं होती, सिर्फ कीमतों की हेजिंग या ट्रेडिंग होती है, इससे बिजली के दाम बाजार में तय होंगे।

बिजली के बाजारीकरण से उतपन्न होने वाले संकट पर बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को बिजली सेक्टर के निजीकरण करने से पहले, नियमित-संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के हित सम्बन्ध पर ठोस चर्चा कर निर्णय लेना चाहिए।

पूंजीपतियों का हित साधने के लिए बन रहे बिजली थाने
बिजली थाने बनाने की वजह पिछले 10 सालों से बिजली सेक्टर के अधिकारी व कर्मचारी जब बिजली वसूली में सख्ती दिखाने पर सरेआम पिटते रहे, घायल होते रहे, तब बार-बार गुहार लगाने पर भी उ.प्र. व म.प्र. सरकार ने बिजली थाने नहीं बनाए, पर जब बिजली कम्पनी को निजी क्षेत्रों को सौंपने की तैयारी है, उसके ठीक पहले म.प्र. के भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, रीवा व जबलपुर में बिजली पुलिस थाने खोलने एवं पुलिस अधिकारियों को बिजली कम्पनियों में प्रतिनियुक्ति पर लाने की तैयारी चल रही है। सरकार से इसकी हरी झण्डी भी मिल चुकी है। श्री भार्गव इसकी वजह बताते हैं ताकि निजी क्षेत्र के पूंजीपतियों को बिजली बिल वसूली में अड़चन नहीं आए और वह मुनाफा कमा सकें।

एडवांस परचेस एग्रीमेंट से करोड़ों की हुई क्षति
श्री भार्गव के मुताबिक बिजली सेक्टर में घाटे के भ्रामक आँकड़े देकर पूर्ण निजीकरण की तैयारी चल रही है। म.प्र. व उ.प्र. राज्य में गलत पॉवर परचेस एग्रीमेंट के चलते निजी बिजली उत्पादन कम्पनियों से एक भी यूनिट बिजली खरीदे बिना म.प्र. की बिजली कम्पनियों को छ: हजार करोड़ रू. एवं उ.प्र. सरकार के बिजली निगमों को छ: हजार सात सौ करोड़ रू. भुगतान करना पड़ा। निजी घरानों से मँहगी दर से बिजली खरीदने के कारण बिजली कम्पनियों पर सैकड़ों करोड़ रू. का अतिरिक्त वित्तीय भार आ रहा है।
निजी क्षेत्र 50 सालों में आगे क्यों नहीं आया
श्री भार्गव ने सवाल उठाया कि पिछले 50 सालों में जब उ.प्र. व म.प्र. सहित देश भर में ग्रामीण विद्युतीकरण हुआ, पॉवर प्लांट लगे, 400/220/132/33/11 केवी सब-स्टेशन बनें, तब कभी भी निजी पूंजीपतियों ने पूंजी लगाकर इस पुण्य काम में हाथ नहीं बढ़ाया, पर आज जब जनता के पैसे से अरबों रूपए का विद्युत इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा हो गया, तब इसे कोडिय़ों के भाव औने-पौने दामों में सरकार निजी क्षेत्रों को बेचने को बेताब है, जिसे लेकर 9 जुलाई को बिजली कर्मचारी धरना-प्रदर्शन करेंगे।
पेंशन पर मंडराया खतरा
म.प्र. की सभी 6 बिजली कम्पनियों, पॉवर मैनेजमेन्ट- ट्रांसमिशन, जनरेशन- पूर्व-पश्चिम व मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कं. के नियमित कर्मियों की पेंशन निजीकरण के बाद खतरे में नहीं पड़े, इस बात से चिंतित रेगुलर कर्मचारी पेंशन को शासकीय कोषालय से दिलवाने की मांग पर अड़े हुए हैं व आंदोलनरत हैं।
Author: Jai Lok







