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भावी चिकित्सकों के लिए सुख सागर मेडीकल को दान दिया पार्थिव शरीर

बेटी की प्रेरणा से परिजनों ने लिया देहदान का संकल्प

जबलपुर (जय लोक)। जबलपुर वैसे तो दान धार्मिक, सामाजिक रीति रिवाज की प्राचीन परम्परा रहा है। बदलते परिवेश के साथ इस परम्परा में भी बदलाव देखा जाता है। लेकिन देहदान का महासंकल्प तमाम रिवाजो से बढक़र है। अग्रवाल कॉलोनी निवासी 55 वर्षीय स्व. शिरिष श्याम मटकर के इसी महासंकल्प को उनके परिजनो ने न केवल मृत्यु उपरान्त पूरा किया, बल्कि समाज के सामाने बड़ी मिसाल पेश की।

स्व. शिरिष श्याम भटकर की भतीजी कु. हर्षिता जैन के मुताबिक 21 जनवरी बुधवार को अशीष भटकर के अनुज शिरीष श्याम भटकर का निजी अस्पताल में देहावसान हो गया था। उनके बड़े भाई राजू श्याम भटकर, अविनाश श्याम भटकर, भाभी अर्चना भटकर व साले अरूण जैन, खुशी जैन एवं सभी परिजनों ने स्व. शिरीष श्याम मटकर की इच्छानुसार उनका पार्थिव देह को सुख सागर मेडीकल कॉलेज एडं हास्पिटल को दान दे दी ताकि एम.बी.बी.एस. स्टूडेंट को रिसर्च एवं पढ़ाई में सुविधा मिल सके। इतना ही नहीं हर्षिता जो कि बी.टेक की छात्रा है उनकी प्रेरणा से पिता अरुण जैन माँ खुशी जैन व स्वयं हर्षिता एवं अर्चना भटकर (बुआ) अशीष भटकर (फूफा जी) ने देहदान का संकल्प लिया।

जाहिर है कि इसके पूर्व सुखसागर हास्पिटल एंड मेडीकल कॉलेज को 20 पार्थिव देह अध्ययन व रिसर्च हेतु अन्य शहरों से लाने पड़े थे जिसमें कि इंदौर से 16, बडवानी से 2, ग्वालियर व धार से 1-1 पार्थिव देह प्राप्त हुई थी। परन्तु संयोग है कि 21 वी पार्थिव देह संस्कारधानी जबलपुर से शिरीष श्याम भटकर के रूप में प्राप्त हुई। इस मौके पर पूर्व सुखसागर हास्पिटल एंड मेडीकल कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के डॉ. राजेश आर. विजय कुमार, डॉ वी. के गुहा. डॉ.ए.व्ही.लखन पॉल व स्टाफ  के फूल सिंह यादव ने देहदानदाता के परिजनों को विगत दिवस स्वागत कर सम्मानपत्र प्रदान किये और सभी से इस महादान के संकल्प से जुडऩे का आहवान किया।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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