
जबलपुर के ताल तालाबों को विशेष रूप से किया जाएगा संरक्षित
जबलपुर (जयलोक) मुगलों के दांत खट्टे करने वाली गोंडवाना साम्राज्य की रानी दुर्गावती का आज बलिदान दिवस है उनके बलिदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता जिन्होंने अकबर के सेनापति आसफ खान से लोहा लेते वक्त उसके पसीने छुड़ा दिए और फिर शहीद हो गईं। यह बात आज वीरांगना रानी दर्गावती के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कही। उन्होंने रानी दुर्गावती के जीवन परिचय के बारे में बताया और कहा कि ऐसी बहुत सी जानकारियाँ हैं जिन्हें समाज के सामने लाने की जरूरत है। इसलिए अब पाठ्यक्रम और अन्य कार्यक्रमों के माध्यम से रानी दुर्गावती के जीवन चरित्र को समाज के सामने लाएंगे। वीरांगना के बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव नर्रई नाला स्थित समाधि स्थल पर पहुँचे और रानी दुर्गावती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये। इसके बाद वेटरनरी कालेज ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल और संस्कृति राज्य मंत्री धमेन्द्र सिंह लोधी, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद सुमित्रा बाल्मिक, विधायक अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, सुशील इंदु तिवारी, नीरज सिंह, अभिलाष पांडे, संतोष बरकड़े भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री श्री यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती ने भारत को एक विशेष पहचान दिलाई है। कठिन काल में रानी दुर्गावती का इतिहास उज्जवल रहा, उन्होनें अपने जीवन में 52 युद्ध लड़े अपने बल बूते पर जीते। श्री यादव ने कहा कि उस काल में जब राजा महाराजा युद्ध जीतते थे तो उसका स्मारक बनवाते थे लेकिन रानी दुर्गावती युद्ध जीतने पर जनता के लिए ताल तलैया बनवाती थी। ताकि लोगों को पानी मिल सकें। मुख्यमंत्री ने इस दौरान कहा कि रानी दर्गावती के साथ न्याय नहीं हुआ। लेकिन भाजपा सरकार उनके बताए हुए रास्तों पर चल रही है और यह निर्णय लिया गया है कि केबिनेट मंत्री राकेश सिंह की माँग पर शहर में बन रहे प्रदेश के सबसे बड़े फ्लाईओवर और एयरपोर्ट का नाम भी रानी दुर्गावती के नाम पर रखा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रानी दुर्गावती को समाज का गौरव बताया। उन्होंने कहा कि यहां पानी के लिए वीरांगना ने कई सारे जल स्त्रोत बनाए। लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई थी यह वही स्थान है, जहां आज उन्हें हम नमन करने आए हैं। मुख्यमंत्री बोले-मध्य प्रदेश में इन्ही के नाम पर पहली कैबिनेट की बैठक भी जबलपुर में आयोजित की गई थी। गोंडवाना साम्राज्य में जितने भी जल स्त्रोत हैं वह रानी दुर्गावती ने ही बनाए थे।
चित्रों की प्रदर्शनी का किया अवलोकन
वेटनरी विवि में कार्यक्रम स्थल पर रानी दुर्गावती की चित्रों की प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। यहां कार्यक्रम पर पहुँचने पर सबसे पहले मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती की जीवनी पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। चित्र प्रदर्शनी में रानी दुर्गावती के जीवनी का सम्पूर्ण चित्रण किया गया। जिसके बाद कार्यक्रम स्थल पर पहुँचकर रानी दुर्गावती के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
लोकगीतों की प्रस्तुति
कार्यक्रम में कलाकारों द्वारा लोकगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। कलाकारों ने गीत के माध्यम से रानी दुर्गावती के जीवन चरित्र का बखान किया।
पगड़ी पहनकर किया नृत्य
आदिवासियों द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने भी पगड़ी पहन कर आदिवासियों के साथ सैला नृत्य किया। समाधि स्थल पर मुख्यमंत्री ने पौधा रोपण किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 500 वर्ष पहले एक ऐसी वीरांगना ने जन्म लिया जिसने भारत का मान बढ़ाया।
रानी दुर्गावती प्रजा के लिए माँ थी-राकेश सिंह
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि रानी दुर्गावती अपनी प्रजा का ख्याल रखतीं थीं वह अपनी प्रजा के लिए माँ थी। लेकिन इतिहास ने उनके साथ न्याय नहीं किया। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने उनके बारे में दुनिया को बताया और उन्हें शहडोल में श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुँचे और 500 वीं जयती धूमधाम से मनाई। मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। रानी दुर्गावती को ना केवल युद्ध में महाराथ हासिल थी बल्कि किसानों के लिए भी वह मार्गदर्शक थीं। 23 हजार गाँव में कब कौन सी खेती होगी वह स्वयं किसान के साथ निर्णय करती थीं। पंचसार विधि से तालाब बनाए जब पानी की कमी होगी तब भी वह एक दूसरे को पानी देंगे ताकि जनता को पानी मिल सके।
महापुरूषों की जयंती से हम गर्वित महसूस करते हैं-प्रहलाद पटेल
मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि आज का दिन महत्वपूर्ण है। महापुरूषों की जयंती मनाई जाए उससे हम गर्वित महसूस करते हैं। उन्होंने रानी दुर्गावती के जीवन चरित्र के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि रानी दुर्गावती अपनी युद्ध कला में इतनी परांगत थी कि दुश्मन के आक्रमण की जानकारी भी उन्हें पहले ही पता चल जाती थी। यहीं वजह है कि अकबर के आक्रमण की जानकारी पहले ही रानी दुर्गावती का मिल गई और उन्होंने अपनी युद्ध योजना बनाई।

Author: Jai Lok







