Download Our App

Home » दुनिया » मतदाता सूची को लेकर सुको ने जताई नाराजगी कहा- बेमतलब के बहानेबाजी ठीक नहीं

मतदाता सूची को लेकर सुको ने जताई नाराजगी कहा- बेमतलब के बहानेबाजी ठीक नहीं

नई दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अस्पष्ट और अप्रासंगिक कारणों के साथ बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाकर प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश न करे।
अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि हर दिन कोई न कोई बेमतलब का बहाना बनाकर न्यायिक प्रक्रिया में देरी करने का सिलसिला अब खत्म होना चाहिए। गौरतलब है कि इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया है, जो मूल रूप से चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र का कार्य है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि चुनाव आयोग के अधिकारी उन न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिन्हें कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा तैनात किया गया था। सिब्बल का तर्क था कि आयोग के अधिकारी यह तय कर रहे हैं कि मतदाताओं के दावों के साथ कौन से दस्तावेज स्वीकार किए जाने चाहिए, जो कि सुप्रीम कोर्ट के उस पुराने निर्देश का उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि तौर-तरीके हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे। हालांकि, पीठ ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब उन्होंने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को जिम्मेदारी सौंपी थी, तो उनका तात्पर्य केवल यह था कि वह यह तय करेंगे कि किस अधिकारी की तैनाती कहां होगी और उन्हें क्या सुविधाएं मिलेंगी। दावों के निपटान और दस्तावेजों की वैधता पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल तैनात न्यायिक अधिकारियों के पास ही सुरक्षित है।
जस्टिस बागची ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग के अधिकारी न्यायिक अधिकारियों को आवश्यक प्रशिक्षण नहीं देंगे, तो यह कार्य और कौन करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत का आदेश दिन के उजाले की तरह साफ है और न्यायिक अधिकारियों को उनके सामान्य कामकाज से अलग एक विशेष जिम्मेदारी दी गई है। अदालत ने राज्य सरकार और चुनाव आयोग दोनों को निर्देश दिया कि वे मिलकर काम करें और एक ऐसा अनुकूल माहौल बनाएं जिससे यह प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके। इस दौरान जब राज्य के मुख्य सचिव की उपस्थिति का हवाला दिया गया, तो पीठ ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिया कि वे शीघ्र कार्य पूरा करने के लिए चुनाव आयोग और न्यायिक अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करें। अंत में, अदालत ने मतदाता सूची के प्रकाशन और दावों की जांच के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की। जब वरिष्ठ अधिवक्ता ने मांग की कि 28 फरवरी को अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद न्यायिक अधिकारियों के फैसलों के आधार पर पूरक मतदाता सूची भी जारी की जानी चाहिए, तो पीठ ने दोहराया कि पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से अदालत के पूर्व आदेशों के अनुसार ही संचालित की जाएगी। इन आदेशों में पहले से ही निर्दिष्ट है कि दावों की जांच के लिए किन दस्तावेजों को आधार बनाया जाना है। इस पूरी सुनवाई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि न्यायिक सुधारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में किसी भी प्रकार की राजनीतिक या प्रशासनिक देरी को अदालत बर्दाश्त नहीं करेगी।

 

चाट दुकान से दीक्षितपुरा में बढ़ी छेड़ख़ानी की वारदातें, दुकान में लग रहा नशेडिय़ों का जमावड़ा,  संचालक कर रहा क्षेत्रीय लोगों से बदसलूकी

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » दुनिया » मतदाता सूची को लेकर सुको ने जताई नाराजगी कहा- बेमतलब के बहानेबाजी ठीक नहीं
best news portal development company in india

Top Headlines

मंदिरों के ’अर्पित’ फूलों से नागरिकों को ‘अर्पण ‘ करने बनाई हर्बल गुलाल, यह नवाचार  स्वच्छ्ता को समर्पित – महापौर अन्नू

नगर निगम के नवाचार से स्वच्छता अभियान को मिलेगी गति – निगमाध्यक्ष रिकुंज विज *स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान में मापदण्डों के

Live Cricket