
प्रदेश के क्रिकेट को इंदौर-ग्वालियर से बाहर लाना चाहिए
शैलेष मिश्रा
जबलपुर (जयलोक)। देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ पर काफी तक चरितार्थ होती नजर आ रही है। देश के विभिन्न राज्यों की क्रिकेट लीग का आयोजन किया जा रहा है जिसके कारण ना केवल क्रिकेट की लोकप्रियता व उसके प्रचार-प्रसार में उठाव दिख रहा है, वही छोटे-छोटे शहरों के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से राष्ट्रीय खेल क्षितिज पर म.प्र. के कई सितारे अपना जौहर दिखाते नजऱ आ रहे है।
इस वर्ष दूसरी मध्य प्रदेश लीग टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिता का सफल आयोजन पिछले वर्ष की तरह ग्वालियर में नव निर्मित ‘श्रीमत माधवराव सिंधिया क्रिकेट स्टेडियम’ में किया जा रहा है। स्पर्धा में प्रदेश के विभिन्न महानगरों एवं अंचलों की सात टीमें भाग ले रही है। म.प्र. क्रिकेट संघ द्वारा विभिन्न चयन ट्रायल के बाद इन सात टीमों में शमिल खिलाडिय़ों को चयन किया जाता है।
इस प्रतियोगिता का आयोजन खेल को समुचित ढंग से लोकप्रिय बनाने के साथ देश में क्रिकेट के नक्शे में म.प्र. को एक शक्ति के रूप में स्थापित करना है। मध्य प्रदेश क्रिकेट संघ द्वारा प्रदेश के विभिन्न डिविजनल हेडक्वार्टर में अपने संसाधनों से सर्व सुविधायुक्त क्रिकेट ग्राउंड का निर्माण किया जा रहा है, जिसमे समय-समय पर विभिन्न आयु वर्ग की क्रिकेट स्पर्धाओं का आयोजन किया जाता हैं, अच्छा तो यह होता है कि म.प्र. क्रिकेट संघ द्वारा खेल को बढ़ावा देने के लिए जो प्रयास किए जा रहे हैं उनका सही ढंग से प्रचार किया जाता है।
मध्य प्रदेश की क्रिकेट को इंदौर और ग्वालियर तक सीमित न कर के मध्य प्रदेश लीग के मैच यदि भोपाल, जबलपुर, रीवा, सागर और उज्जैन जैसे शहरों में भी आयोजन किए जाते हैं तो वास्तविक तौर पर क्रिकेट के प्रति रुचि और बढ़ाई जा सकती हैं। कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, गुजरात, विदर्भ, सौराष्ट्र, बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश में क्रिकेट लीग के आयोजन एक से ज्यादा स्थान पर कराए जाते हैं। मध्य प्रदेश लीग से म.प्र. क्रिकेट संघ को स्पॉन्सर और अन्य स्थानों से बढिय़ा कमाई हो रही हैं। इस राशि का बटवारा उचित ढंग से किया जाए तो पूरे प्रदेश में क्रिकेट के खेल को और निखार मिले।
रीवा जैसे स्थान से कई नामी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन करते नजऱ आ रहे हैं। नए पुराने क्रिकेटरों को खेल को बढ़ावा देने के लिए यदि सकारात्मक सोच के साथ जोड़ा जाए तो म.प्र. भी अन्य राज्यों की तरह छोटे-छोटे स्थानों से नाम रोशन करने वाले क्रिकेटरों की बड़ी फौज खड़ी कर सकता है।

Author: Jai Lok







