
मुंबई (जयलोक)। महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता कहे जाने वाले अजित पवार के निधन के बाद राज्य की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं। हालांकि भाजपा ने पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को उप मुख्यमंत्री बनाकर सियासी उथल-पुथल को शांत करने का प्रयास किया है, इसके बाद भी अजित पवार की एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे का बार-बार यह कहना कि हम राजग के साथ थे और वहीं रहेंगे, जैसे बयान आशंकाएं भी पैदा करते हैं। सबसे पहली आशंका उस वक्त बढ़ी जब आनन-फानन में सुनेत्रा को उप मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई गई। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी जल्द क्यों की गई।
बता दें कि अजित पवार ने स्वयं अपने जीवनकाल में कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए दोनों गुटों के एकजुट होने की इच्छा जताई थी। शरद पवार ने भी हाल ही में कहा था कि अजित पवार की उस अंतिम इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, अब अजित पवार गुट के सुर बदलते नजर आ रहे हैं।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पार्टी का एनडीए के साथ रहने का फैसला पूरी तरह अटल और मजबूत है। उन्होंने एक कड़े रुख के साथ कहा कि जो भी नेता भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा बने रहना चाहते हैं, वे उसी के अनुरूप अपनी राजनीतिक दिशा तय करें। तटकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चाएं जोरों पर थीं। इस बयान को शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) के लिए एक कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है, जिससे यह संकेत मिलते हैं कि फिलहाल एकीकरण की राह आसान नहीं है।

हाल ही में हुए एक दुखद विमान हादसे में अजित पवार के असामयिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में भावनात्मक लहर देखी गई थी। सुनील तटकरे ने उन लोगों की मंशा पर भी सवाल उठाए जिन्होंने अजित पवार के अंतिम संस्कार से पहले ही विलय की बातें शुरू कर दी थीं। उन्होंने संकेत दिया कि एकीकरण का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन इसके लिए शरद पवार गुट को अजित पवार द्वारा चुनी गई एनडीए की राजनीतिक लाइन को स्वीकार करना होगा। दूसरी तरफ, एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने स्पष्ट किया है कि परिवार में शोक की अवधि के दौरान 13 दिनों तक कोई राजनीतिक चर्चा नहीं होगी और भविष्य का कोई भी फैसला सोच-समझकर लिया जाएगा।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मुख्यमंत्री ने रविवार को विलय की खबरों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि इस दिशा में कोई गंभीर बातचीत अंतिम चरण में होती, तो उप मुख्यमंत्री अजित पवार उन्हें विश्वास में लेकर इसकी जानकारी जरूर देते। फडणवीस का यह बयान शरद पवार के उस दावे के जवाब में आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि 12 फरवरी को दोनों गुटों के विलय की आधिकारिक घोषणा होनी तय थी।
मुख्यमंत्री ने इसे भ्रम फैलाने की कोशिश करार देते हुए कहा कि गठबंधन सहयोगियों को बिना बताए ऐसा कोई बड़ा फैसला नहीं लिया जा सकता। वहीं, बारामती में दिवंगत अजित पवार की स्मृति को संजोने की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। वरिष्ठ नेता शरद पवार ने स्वयं विद्या प्रतिष्ठान परिसर में एक भव्य स्मारक बनाने की योजना की अगुवाई की है। शरद पवार ने ट्रस्ट के सदस्यों के साथ इस परियोजना की रूपरेखा पर चर्चा की है और शोक अवधि समाप्त होने के बाद इसे आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान बयानबाजी से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र की सत्ता और संगठन पर नियंत्रण को लेकर दोनों गुटों के बीच फिलहाल रणनीतिक दबाव बनाने का दौर जारी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दोनों गुट आपसी शर्तों पर कोई बीच का रास्ता निकाल पाते हैं या दूरियां और बढ़ेंगी।
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Author: Jai Lok







