
मनमर्जी से हो रही थी दस्तावेजों में छेड़छाड़ और मरीजों की जान से खिलवाड़
जबलपुर (जयलोक)। खुद को मानव सेवा के प्रति समर्पित करने का दावा करने वाले शहर के नामी अस्पताल मार्बल सिटी की करतूत से एक एक कर पर्दा उठता जा रहा है। मार्बल सिटी अस्पताल में काम करने वाले बड़े बड़े नामधारी डॉक्टरों के साथ फर्जी पहचान से काम करने वाले डॉक्टर भी सालों से सेवाएं दे रहे थे। लगभग 8 महीने पहले हुई एक महिला की मृत्यु के बाद उनके रेलवे में काम करने वाले बेटे के द्वारा की गई एफआईआर में इस बात का खुलासा हुआ है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा आईसीयू में भी गंभीर रूप से भर्ती होने वाले मरीजों के दस्तावेजों के संबंध में मनमानी से छेडख़ानी की जाती थी। इसका परिणाम यह हुआ कि 1 सितंबर 2023 को तबीयत खराब होने के कारण मार्बल सिटी अस्पताल में रेलवे अधिकारी मनोज कुमार की मां शांति देवी की जिंदगी सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि डॉक्टर ने बिना उनके बेटे से पूछे ही उनको वेंटिलेटर पर नहीं रखने का निर्णय कर लिया था। सबसे खराब बात तो यह थी कि इसके लिए फर्जी सहमति के दस्तावेज भी तैयार कर लिए गए। इन दस्तावेजों की शिकायत पुलिस में एफआईआर के साथ की गई है।
मामले को दबाने की हो रही पुरजोर कोशिश
सूत्रों के अनुसार मार्बल सिटी अस्पताल प्रबंधन एवं इससे जुड़े कुछ रसूखदार लोग अब इतने बड़े खुलासे के बाद साम-दाम- दंड-भेद के माध्यम से इस पूरे मामले को दबाने में लग गए हैं। रेलवे सौरभ ऑफीसर कॉलोनी में रहने वाले मनोज कुमार महावर की सजगता और मां के इलाज में हुई लापरवाही को खोजने की जिज्ञासा ने इस पूरे मामले को सबके सामने ला खड़ा किया है। अस्पताल प्रबंधन खुद को निर्दोष बताते हुए फरार हो चुके सत्येंद्र नामक फर्जी डॉक्टर ब्रजराज उइके जो की पेंटर है के ऊपर सारे दोष लगा रहा है। लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों के इलाज के प्रति किए जा रहे खिलवाड़ और लापरवाही से जुड़े तथ्य भी पुलिस की जांच में सामने आने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार अब जांच को प्रभावित करने अस्पताल प्रबंधन को क्लीन चिट प्राप्त करने के लिए हर प्रकार का दबाव बनाया जा रहा है।
आखिर मौत की जिम्मेदारी तो मार्बल सिटी अस्पताल की ही है ना?
इस पूरे मामले में सबसे प्रमुख सवाल यह उठ के सामने आ रहा है कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही की भेंट चढ़ गई बुजुर्ग महिला शांति देवी की मौत का जिम्मेदार आखिर अस्पताल प्रबंधन ही है ना? महिला की मौत के बाद जो डिस्चार्ज फाइल उनके बेटे को सौंपी गई थी, जब मनोज कुमार ने वह फाइल पढ़ी और उन्हें अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों की गतिविधियों पर शक हुआ तब उन्होंने अपने स्तर पर जांच पड़ताल शुरू की। डिस्चार्ज फाइल को बारीकी से पढऩे पर इस बात का भी खुलासा हुआ कि उनकी मां की मौत अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही कारण हुई जिसको छुपाने के लिए फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार किए गए। यहां तक की उनकी माँ के इलाज के प्रति वेंटिलेटर पर नहीं रखने की झूठी सहमति भी उनके बेटे मनोज के नाम से बनाकर फाइल में लगा दी गई। उनकी मां जब भर्ती थी तो आईसीयू में डॉ. ब्रजराज उइके की तीन बार उपस्थित फाइल में दर्ज की गई। जबकि वास्तविकता इससे अलग थी। अब अगर लापरवाही में महिला की जान गई है तो इसके लिए दोषी कौन है? यह बात भी पुलिस जांच में सामने आ जाएगी।

Author: Jai Lok







