
पंकज स्वामी
जबलपुर (जयलोक)। जबलपुर शहर को बनाने वाले नागरिकों में एक डॉ. भैयालाल (बीएल) श्रीवास्तव भी रहे हैं। डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव जबलपुर में 1934 में आकर बसे थे। वे उस क्षेत्र में रहते थे जिसको राइट टाउन के नाम से जाना-पहचाना जाता है। जबलपुर के राइट टाउन का नाम ब्रिटिश शासनकाल के डिप्टी कमिश्नर ए.एल. राइट के नाम पर पड़ा और विकसित किया गया था। यह इलाका अपनी सुनियोजित बस्त्यिों के लिए जाना-पहचाना गया। राइट साहब ने कल्पना ही नहीं की होगी कि उनके नाम का इलाका ज़मीन के मामले में जबलपुर का सबसे कीमती व महंगा क्षेत्र हो जाएगा। डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव का नाम इन दिनों सुर्खियों में है। जबलपुर शहर के वाशिन्दों के लिए डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव के नाम का अर्थ यानी कि उनकी मिलकियत का राइट टाउन का वह 25 हजार 47 वर्गफुट का ज़मीन का टुकड़ा जिसको हासिल करने के किस्से जनवरी से फरवरी की आज तक की तारीख में मीडिया में लगातार फॉलोअप स्टोरी आ रहे हैं।

डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव ने पिछली सदी के तीसरे दशक में कराची (पाकिस्तान) के पटेल क्लीनिक से दंत चिकित्सा एलडीएससी की परीक्षा पास करके 1934 में जबलपुर में राइट टाउन में प्रेक्टिस की शुरुआत की। इस तरह डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव जबलपुर के प्रथम दंत विशेषज्ञ या दांतो के डाक्टर साहब थे। डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव की जो छवि लोगों के जहन में आज भी तैर रही है उसके अनुसार वे बेहद सुसंस्कृत व गरिमामय व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे। वे ऐसे डॉक्टर थे जो अपनी फीस लेने में संकोच करते थे या मरीज से फीस ही नहीं लेते थे। जबलपुर के प्रथम दंत विशेषज्ञ होने के कारण उस समय आम व खास दोनों ही उनके पास अपने दांतों की समस्या को लेकर जाते थे। डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव को इस रूप में पहचाना जाता था कि वे ऐसे डाक्टर थे जो अपने परिचित को बिना चाय पिलाए जाने नहीं देते थे। वुडन फ्लोर पर कुर्सी पर दांत दर्द से कराहते व्यक्ति का आधा दर्द डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव के भोले चेहरे व हल्की मुस्कान को देखकर गायब हो जाता था।

वे प्यार से व्यक्ति की समस्या पूछते और उतने नरमी से उसका निदान करते। बताया जाता है कि कभी उन्होंने किसी का दांत जड़ से नहीं उखाड़ा। विख्यात साहित्यकार हरिशंकर परसाई और शहर के प्रत्येक क्षेत्र की विभूतियां डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव से दांतो के इलाज के लिए नियमित रूप से जाती थीं।

डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव और हिन्दी एकांकी के जनक व नाटककार डा. रामकुमार वर्मा रिश्ते में भाई थे। डा. रामकुमार वर्मा मूलत: सागर के थे लेकिन बाद में वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में हिन्दी विभागाध्यक्ष रहे। डा. रामकुमार वर्मा के प्रसिद्ध नाटक रेशमी ताई, पृथ्वीराज की आँखें, कौमुदी महोत्सव, दीपदान और नोमान की बुलंदिया हैं। डॉ. रामकुमार वर्मा का यहां जिक्र इसलिए जरूरी हो जाता है क्योंकि उन्होंने राइट टाउन स्थित डा. भैयालाल श्रीवास्तव के आवास में कई दिनों तक रहकर एकांकी लिखे हैं। इस प्रकार डा. भैयालाल श्रीवास्तव का जबलपुर के साहित्यिक जगत से गहरा रिश्ता रहा है।
डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव के राइट टाउन स्थित आवास के नजदीक पेंडारकर भवन में कुछ समय तक हिन्दी के कवि मुक्तिबोध रहे हैं। राइट टाउन के इस क्षेत्र के एक फलांग में रामानुज लाल श्रीवास्तव ऊंट, भवानी प्रसाद तिवारी, हरिशंकर परसाई, सुभद्रा कुमारी चौहान, महादेव वर्मा सामी, मलय, नरसप्पा अल्वा, अमृतलाल वेगड़ जैसे लेखक व कलाकार के आवास थे। दूसरे क्षेत्र की विभूतियों की बात करें तो यह सूची इतनी बड़ी बनेगी कि उसके आखिरी सिरे को संभालने में मुश्किल होगी।
डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव के इतिहास को सामने लाने की इसलिए जरूरत पड़ी कि उन्होंने और उनके परिजन ने राइट टाउन क्षेत्र की संभवत: सबसे विशाल 25 हजार स्कवेयर फुट के परिसर को अभी तक संभालकर रखा। अब यह स्थान जिला प्रशासन व नगर निगम के संरक्षण में है। यहां जबलपुर नगर निगम ने जोन क्रमांक 13 का उप-स्वास्थ्य कार्यालय खोल दिया है। यह उनका अधिकार है।
बेहतर होता है डॉ. भैयालाल श्रीवास्तव के इस विशाल परिसर में एक लायब्रेरी बना दी जाए। जहां लोग मिलजुल कर साथ में बैठकर पुस्तकें पढ़ें। रानी दुर्गावती संग्रहालय की कला वीथिका की तर्ज पर यहां एक सभागार की गुंजाइश आसानी से निकाली जा सकती है। वर्तमान में दांतों का इलाज सबसे महंगा है। जबलपुर कलेक्टर ने निर्धन बुजुर्गों के लिए आपरेशन बत्तीसी प्रोग्राम शुरु किया है। डा. भैयालाल श्रीवास्तव के लिए इससे बेहतर क्या श्रद्धांजलि हो सकती है कि यहां एक डेंटल डिस्पेंसरी शुरु कर दी जाए जहां निर्धन लोगों का नि:शुल्क इलाज संभव हो पाए। ऐसा किया जा सकता है, इससे डा. भैयालाल श्रीवास्तव की आत्मा को शांति मिलेगी।
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Author: Jai Lok






