
चैतन्य भट्ट
जबलपुर (जयलोक)। 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ‘ट्रेनिंग’ राजा बाबू सिंह ने एक सलाह क्या दी उस पर विवाद शुरू हो गया, यद्यपि राजा बाबू सिंह की ये सलाह कि जिन सिपाहियों की नई भर्ती हो रही है और जिन्हें पुलिस कार्यप्रणाली की ट्रेनिंग दी जा रही है वे सोने के पूर्व ‘रामचरितमानस’ का पाठ करें यद्यपि ये निर्देश किसी के लिए अनिवार्य नहीं बल्कि स्वैच्छिक हैं लेकिन धर्म निरपेक्षता की दुहाई देने वाले इस निर्देश को विवादास्पद बनाने में जुट गए हैं।

दरअसल यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ट्रेनिंग राजा बाबू सिंह ने वीडियो कांफ्रेंस के जरिए सभी पुलिस अधीक्षकों को ये निर्देश दिए कि नई भर्ती होने वाले सिपाहियों को ये बताएं कि यदि वे सोने के पूर्व रामचरितमानस का पाठ करते हैं तो न केवल उनमें नैतिक साहस की बढ़ोतरी होगी बल्कि वे मानसिक रूप से भी मजबूत भी होंगे, इधर ये निर्देश जारी हुआ ही था कि कि इस निर्णय पर सवाल उठने लगे। वहीं राजा बाबू सिंह की सोच ये थी कि प्रदेश में जो नई भर्ती सिपाहियों के रूप में हो रही है उन्हें रामचरितमानस में भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास का हिस्सा पढऩा चाहिए कि घर से दूरी कई बार क्यों जरुरी हो जाती है. और इस सोच के पीछे भर्ती होने वाले सिपाहियों की ‘होमसिकनेस’ सबसे बड़ा मुद्दा था उनके मुताबिक अनेक सिपाहियों ने इस बात के आवेदन उन्हें दिए थे कि उन्हें घर के पास ही ट्रेनिंग के लिए भेज दिया जाए क्योंकि वे घर से दूर नहीं रहना चाहते। इस मुद्दे पर राजा बाबू सिंह ने इन नए रंगरूटों को यह शिक्षा देने की कोशिश की कि जिस तरह भगवान श्री राम ने अपने परिवार से दूर जंगल में चौदह वर्ष बिताए, अपनी पत्नी को खो दिया, शबरी के झूठे बेर खाए उसी तर्ज पर इन नए रंगरूटों को अपने घर से दूर रहने की शिक्षा रामचरितमानस के पाठ से मिल सकती है, मर्यादा का पालन करना भगवान राम का सबसे प्रमुख गुण था इसीलिए उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम राम’ कहा जाता है। पुलिस के सिपाहियों की भी एक मर्यादा होती है और यदि वे रामचरितमानस का पठन करेंगे तो उन्हें अपनी मर्यादा का एहसास होगा लेकिन। कांग्रेस ने इस निर्देश को गैर संवैधानिक बता दिया उधर ‘जमीअत ए उलेमा’ संगठन ने सुझाव दे दिया है कि अगर पुलिस वालों को धार्मिक ग्रंथ पढ़ाना ही है तो, फिर बाकी धर्म ग्रंथ भी इस ट्रेनिंग में शामिल किये जाने चाहिए।

राजा बाबू सिंह के इस निर्देश पर यदि अमल होने लगेगा तो मध्य प्रदेश में पुलिस की नौकरी में भर्ती के लिए आरक्षक अब फिजीकल और मेंटल ट्रेनिंग के साथ प्रतिदिन रामचरितमानस का पाठ भी करेंगे। यह उनकी ट्रेनिंग का ही हिस्सा होगी। इसके पीछे वजह ये बताई गई है कि ट्रेनिंग के दौरान ये पाठ उन्हें परिवार से दूर रहने पर भी आत्मबल देगा। जब भगवान होकर श्रीराम चौदह वर्ष वनों में गुजार सकते हैं, तो ये चंद दिनों की ट्रेनिंग क्या मुश्किल है। इस संदर्भ में जब राजा बाबू सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि रामचरितमानस की चौपाइयों के जरिए पुलिस जवान उनके अर्थों को अपने जीवन में उतार सकें, इसलिए पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के सभी जवानों के लिए रात में सोने से पहले एक साथ बैठकर चौपाइयों के सामुहिक पाठ के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए सभी पुलिस अधीक्षकों को श्री रामचरितमानस की हर केंद्र पर एक प्रति रखवाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना था किपुलिस के जवानों को भगवान श्री राम के चरित्र से इसलिए भी सीखने की सलाह दी है ताकि घर से दूर रहकर भी अपने जीवन को सशक्त सार्थक करें और नए दौर की अपराधों से निपटने के लिए हर विधा में मजबूती से पारंगत हो सकें। जिस तरह भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान जंगलों में रहने और वानरों की सेना बनकर महायोद्धा ‘रावण’ से युद्ध कर उसे परास्त किया था उसी तर्ज पर ये सिपाही अपनी नई भूमिका का निर्वाह करते हुए अपराध रूपी रावण का अंत करने में सफल होंगे। राजाबाबू सिंह ने कहा कि रामानंद सागर के विश्वप्रसिद्ध सीरियल रामायण में भगवान राम का चरित्र निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल ने भी कहा था कि रामचरितमानस केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं एक ‘सोशल गाइड’ है।

राजाबाबू सिंह के इस निर्देश और सलाह को कांग्रेस ने बेहद विवादास्पद शुरुआत बताया है। कांग्रेस का कहना है कि क्या संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस तरह की असंवैधानिक बात करनी चाहिए। ना हमारी पार्टी को रामचरितमानस पढ़ाए जाने से आपत्ति है और ना किसी व्यक्ति को किसी तरह का एतराज है, लेकिन पुलिस का एक ही धर्म है और वह संविधान का पालन करना है। सवाल ये खड़ा होना चाहिए कि क्यों घर से दूर ट्रेनिंग में पुलिस कर्मियों को दिक्कत हो रही है।
जमीअत ए उलेमा के मध्य प्रदेश प्रमुख हाजी हारून ने भी इस निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हर धर्म में जो अच्छी शिक्षा है, वो पुलिस कर्मियों तक पहुंचनी चाहिए। फिर चाहे वो कुरान की बात हो या बाइबिल की।. दूसरी तरफ हिंदुत्व का मुद्दा लेकर चलने वाली भारतीय जनता पार्टी ने राजाबाबू सिंह की इस पहल का स्वागत किया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल ने कहा कि विरोध कर रही कांग्रेसी रामचरितमानस का पाठ कर लें। भगवान राम का जीवन कैसे समाज के हर वर्ग के लिए दिशा देता है, ये जान लें, भगवान राम के चरित्र में त्याग, कर्तव्यपरायणता, अनुशासन सबका समावेश है उनका जीवन एक प्रकाश स्तंभ की तरह सबको आलोकित करता है।
1994 बैच के आईपीएस अधिकारी राजा बाबू सिंह का भगवान राम और ‘श्रीमद भगवतगीता’ के प्रति बेहद लगाव रहा है। 1992 में उन्होंने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के निर्माण में सहयोग भी दिया था। 94 में आईपीएस बने उसके बाद अनेक जिलों में एसपी, डीआईजी रहते हुए उन्होंने कई नवाचार भी किए जबलपुर में भी वे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के रूप में पदस्थ रहे?। वहीं ग्वालियर में आईजी के पद पर रहते हुए उन्होंने गीता की हजारों प्रतियां वितरित की थीऊ। कश्मीर में आईजी बीएसएफ, आइटीबीपी जैसे महत्वपूर्ण विभागों में उन्होंने अपनी सेवाएं दी थीं। इस मसले पर भले ही विवाद शुरू हुआ हो लेकिन यदि देखा जाए तो जो सिपाही ‘होमसिकनेस’ से पीडि़त हैं उनके लिए भगवान राम की यह अमर कथा उन्हें मानसिक रूप से संबल प्रदान कर सकती है।
Author: Jai Lok







