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रात 10 बजे तक दफ्तर में काम कर रहे कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, जिम्मेदारियों का उठा लिया बीड़ा, 12 घंटे तक खुल रहा ऑफिस

जबलपुर (जय लोक)। सरकारी कार्यालय में अधिकारियों का कार्य करना सामान्य बात है। देर शाम तक कार्य करना भी सामान्य बात माना जाता है, लेकिन बात जब जिले के मुखिया की हो और वह भी लगातार रात 10:00 बजे तक बैठकर कार्यालय में काम करने की तो यह थोड़ी अनूठी बात हो जाती है। आईएएस आईपीएस अधिकारी जो जिले की कमान संभाल रहे हैं उनके लिए कहा जाता है कि वह 24 घंटे ड्यूटी पर रहते हैं प्रत्यक्ष नजर नहीं आते लेकिन उनकी निगरानी हर छोटी बड़ी घटनाओं पर बनी रहती है यही जिले को शांतिपूर्ण तरीके से चलने का मूल मंत्र भी माना गया है।
सामान्य रूप से इतनी देर रात तक इतने लंबे समय तक कोई अधिकारी कायालय में उपस्थित नहीं पाए जाते हैं। इसके दो कारण होते हैं सामान्यत: अनुमानित किए जाते हैं या तो कार्य का दबाव बहुत अधिक होता है या फिर अधिकारी अपनी दक्षता के अनुसार नए जिले की सभी व्यवस्थाओं का और भविष्य में होने वाले बड़े कार्यों का आकलन जल्दी से जल्द भली भांति करना चाहते हैं।
12 दिन पहले जबलपुर जिले के कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण कार्य करने वाले आईएएस अधिकारी राघवेंद्र सिंह तकरीबन एक सप्ताह से सुबह 10 बजे कार्यालय आ जाते हैं और रात्रि 10 बजे तक कार्यालय में ही रहते हैं। इस बीच वो लगातार आम लोगों से, अधिकारियों से, जनप्रतिनिधि व बुद्धिजीवियों, पत्रकारों आदि से मुलाकात भी करते हैं। अभी बुके देकर फोटो खिंचवाने वालों की भीड़ उन्हें घेरे रहती है। हर कोई कलेक्टर से अपने परिचय में वजन बढ़ाने में कोई कमी नहीं कर रहा है। इस सब के बीच कलेक्टर राघवेंद्र सिंह फील्ड पर भी जा रहे हैं और जिले में आयोजित बड़े-बड़े कार्यक्रमों का क्रियान्वयन भी करवा रहे हैं।हालांकि आईएएस अधिकारियों के लिए यह कोई बड़ी चुनौती पूर्ण बात नहीं है और उन्हें बाकायदा इस परिस्थिति के लिए ट्रेनिंग मिल चुकी हैं कि जिले की कमान संभालते ही चुनौतियां सामने आ जाती हैं तो क्या करना है कैसे करना है। राघवेंद्र सिंह ने जब कलेक्टर जबलपुर का पदभार संभाला तो उनके समक्ष सबसे बड़ा कार्यक्रम राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस का था।जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री को काफी लंबे समय तक शिरकत करनी थी और कई स्थानों पर कायज़्क्रम होना था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से सेवा पखवाड़ा की शुरुआत भी महत्वपूर्ण थी।अधिकारी सक्षम होते हैं तो परिणाम अपने आप सकारात्मक निकल कर आते हैं।

इसका ही परिणाम है कि रक्तदान का आयोजन सेवा पखवाड़े के समय करवाया गया। इस कार्य में जबलपुर ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया। मध्य प्रदेश में 15220 यूनिट ब्लड संग्रहित हुआ था उसमें से 2388 यूनिट ब्लड सिर्फ  जबलपुर से संग्रहित किया गया था।इस प्रयास के पीछे कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की रणनीति सफल हुई उन्होंने अपने स्तर पर व्यक्तिगत रूप से इस आयोजन में शामिल होने वाले बड़े इंस्टिट्यूट, व्यापारिक केंद्रों और सामाजिक संगठनों से खुद संपर्क स्थापित किया जिसके सकारात्मक परिणाम शासकीय कार्यक्रम स्वस्थ नारी-सशक्त परिवार अभियान में सामने आए।

दूसरा चुनौती पूर्ण अवसर आया नमो मैराथन का। देश के प्रधानमंत्री के जन्म दिवस के उपलक्ष पर सेवा पखवाड़े के तहत नशे से युवाओं को दूर करने के लिए जागरूक करने का यह दूसरा बड़ा आयोजन था। इसमें भी जबलपुर ने बाजी मारी और इसमें 6691 धावकों ने हिस्सा लिया।आने वाले समय में जबलपुर जैसे बड़े जिले में उत्पन्न चुनौतियों को विशेष रूप से अवैध खनन की बड़ी समस्या, खाद्यान्न चोरी के घोटाले, खाद की उपलब्धता के साथ राजस्व से संबंधित प्रश्नों का निराकरण और इसमें पारदर्शिता लाना नवागत कलेक्टर के लिए चुनौती पूर्ण होगा। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह की रणनीति जल्द से जल्द अधिक से अधिक राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक व अन्य जो भी जिले से जुड़े विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेने की है। इसके लिए लगातार अधिकारियों के साथ बैठक भी कर रहे हैं और जानकारियों का संग्रहण भी तेजी से चल रहा है। फिर जिले के विकास के संबंधी योजनाओं को आगे बढ़ाने का कार्य गतिमान होगा।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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