
नई दिल्ली। भारतीय संसद में इन दिनों पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’को लेकर जबरदस्त राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। इस विवाद ने रक्षा अधिकारियों के लेखन, अभिव्यक्ति की आजादी और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (ओएसए) के कड़े प्रावधानों पर एक नई बहस छेड़ दी है।

मामला तब और गरमा गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जनरल नरवणे की किताब की एक प्रति सदन में दिखाई, जबकि सरकार का तर्क है कि यह किताब अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है। इस घटनाक्रम ने एक पुराने और चर्चित मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है वह मामला है मेजर जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह का, जो पिछले 18 वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

मेजर जनरल वीके सिंह ने साल 2007 में ‘इंडियाज एक्सटर्नल इंटेलिजेंस-सीक्रेट्स ऑफ रिसर्च एंड एनालिसिस विंग’शीर्षक से एक किताब लिखी थी। इस किताब के प्रकाशन के तुरंत बाद सीबीआई ने उनके खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया था। आज 81 वर्ष की आयु में भी जनरल सिंह जमानत पर हैं और विडंबना यह है कि करीब दो दशक बीत जाने के बाद भी इस मामले का ट्रायल (मुकदमा) अभी तक शुरू नहीं हो सका है।

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Author: Jai Lok







