
मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग
जबलपुर (जयलोक)। मध्य प्रदेश के शासन का लोक निर्माण विभाग सबसे महत्वपूर्ण विभाग माना जाता है। जबसे जबलपुर के पूर्व सांसद और पश्चिम क्षेत्र के विधायक राकेश सिंह ने मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग के मंत्री के रूप में अपना दायित्व संभाला है तब से यह विभाग लगातार नवाचार कर रहा है। मध्य प्रदेश में लोक निर्माण मंत्री राकेश ङ्क्षसह के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में अधोसंरचना के विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है और यह सब काम बिना शोर शराबे के हो रहे हैं। सबसे बड़ा काम यह हुआ है कि लोक निर्माण विभाग की सबसे भ्रष्ट विभाग होने की छवि को मंत्री राकेश सिंह ने तोड़ा है। उन्होंने इस विभाग के कामों में गजब की पारदर्शिता लाई है।
सडक़ें मात्र पत्थर और डामर की पट्टियां नहीं हैं। वे जीवन की धमनियां हैं। वे गांव को शहर से, किसान को बाजार से, सपने को साकार से जोड़ती हैं। लोक निर्माण विभाग किसी भी प्रदेश की विकास-यात्रा का वह मौन आधार है जो बिना शोर के नींव रखता है। दार्शनिक दृष्टि से देखें तो सडक़ का निर्माण सिर्फ इंजीनियरिंग नहीं, बल्कि एक दर्शन है, कनेक्टिविटी का दर्शन। यह दर्शन बताता है कि विकास तब सार्थक होता है जब हर कोना मुख्यधारा से जुड़ जाए। जब दूरी कम हो, समय बचे और अवसर खुलें। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में जहां लॉजिस्टिक्स लागत पहले 13-14 प्रतिशत जीडीपी की थी, वहां प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना ने इसे 7.8-8.9 प्रतिशत तक ला दिया है। यह योजना बहु-आयामी बुनियादी ढांचे को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोडक़र लागत घटाती है, दक्षता बढ़ाती है और अर्थव्यवस्था को गति देती है। मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग इसी दर्शन को राज्य स्तर पर जीवंत कर रहा है, सडक़ों को सिर्फ पक्का नहीं, बल्कि स्मार्ट, सस्टेनेबल और जन-सेवक बनाने में।

मलाईदार विभाग की छवि टूट रही है
लोक निर्माण विभाग को लंबे समय से ‘मलाईदार विभाग’ कहा जाता रहा है। जनता, मीडिया और नेता सब इसे ठेके, बजट और बड़े प्रोजेक्ट्स का विभाग मानते थे। इसमें संभावनाएं थीं, लेकिन साथ में संदेह भी। मलाई की धारणा ने विभाग की छवि को प्रभावित किया। पर अब सोच बदल रही है। विभाग के मुखिया श्री राकेश सिंह के नेतृत्व में यहां अब सिर्फ काम को महत्व दिया जा रहा है। गुणवत्ता, समयबद्धता, पारदर्शिता और नवाचार, ये नए मापदंड बन गए हैं। ठेके अब सिर्फ व्यवसाय नहीं, बल्कि जिम्मेदारी हैं। ऐप्स और डिजिटल निगरानी ने जवाबदेही को आम जनता तक पहुंचा दिया है। मलाई की पुरानी कहानी धीरे-धीरे काम की कहानी में बदल रही है। यह बदलाव दार्शनिक है।

विभाग अब लोक कल्याण का साधन बन रहा विभाग
अब लोक कल्याण का साधन बन रहा है, न कि सिर्फ निर्माण का। मध्यप्रदेश में लोक निर्माण विभाग का दायित्व विशाल है। यहां 77,268 किलोमीटर से अधिक का सडक़ नेटवर्क विभाग के अधीन है, राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर गांव की पगडंडियों तक। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में ही लगभग 10,000 किलोमीटर सडक़ें 17,284 करोड़ रुपये की लागत से पूर्ण हुईं। साथ ही 739 सरकारी भवनों का निर्माण 6,627 करोड़ रुपये में पूरा किया गया। आने वाले तीन वर्षों में 11,310 किलोमीटर की 822 नई सडक़ें बनाई जाएंगी, ताकि हर गांव बाजार से जुड़ सके। यह संख्या मात्र आंकड़े नहीं, बल्कि लाखों किसानों, व्यापारियों और यात्रियों के जीवन में आने वाला बदलाव है। सडक़ें बन रही हैं तो दुर्घटनाएं कम हो रही हैं, माल ढुलाई सस्ती हो रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

विभाग के कार्यों में दार्शनिक गहराई
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में विभाग के कार्यों में दार्शनिक गहराई तब दिखती है जब निर्माण पर्यावरण और समाज दोनों को साथ ले जाता है। लोक कल्याण सरोवर योजना इसका ज्वलंत उदाहरण है। सडक़ बनाने के लिए मिट्टी खोदनी पड़ती है। पहले यह खुदाई बेकार हो जाती थी। अब उसी खोदाई को वैज्ञानिक तरीके से गहरा करके तालाब बनाया जा रहा है। भूजल रिचार्ज होता है, किसानों को सिंचाई का पानी मिलता है और पर्यावरण संतुलित रहता है। प्रदेश भर में 500 ऐसे सरोवर बनाने का लक्ष्य है। सतना और मैहर जैसे क्षेत्रों में 15 स्थलों पर काम शुरू हो चुका है। यह मॉडल बताता है कि विकास एकतरफा नहीं होता। सडक़ बनाते हुए पानी बचाना, यह प्रकृति के साथ सामंजस्य का दर्शन है। ठेकेदारों को प्रोत्साहन मिलता है और किसानों को दोहरा लाभ।
लोकपथ एप पारदर्शिता का नया चेहरा
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने अपने विभाग के कार्यों में पारदर्शिता लाने की दिशा में भी सार्थक प्रयास किए हैं। लोक निर्माण विभाग का लोकपथ ऐप विभाग की पारदर्शिता का नया चेहरा है। जुलाई 2024 में शुरू हुआ यह ऐप अब 2.0 वर्जन में और मजबूत हो गया है। नागरिक फोटो खींचकर गड्ढे या सडक़ की शिकायत दर्ज कर सकते हैं। चार दिनों में निपटान अनिवार्य है। अब तक 11,000 से अधिक शिकायतें सुलझ चुकी हैं। ऐप 2.0 में ब्लैक स्पॉट (दुर्घटना प्रवण जगह) पर 500 मीटर पहले ऑडियो अलर्ट, वैकल्पिक रूट, पर्यटन स्थल, अस्पताल और पेट्रोल पंप की जानकारी है। गूगल मैप्स से भी आगे यह ऐप सडक़ सुरक्षा को नागरिक भागीदारी से जोड़ता है। दार्शनिक रूप से देखें तो यह ऐप ‘लोक’ और ‘निर्माण’ को एक सूत्र में बांधता है, जनता अब सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, भागीदार है। यह काम चुपचाप हो रहा है।
प्रदेश में बड़े कामों का कोई शोर नहीं कोई प्रचार नहीं
केंद्र में सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी देशभर में एक्सप्रेसवे और हाईवे का जाल बिछा रहे हैं। उनका काम चर्चा में रहता है। वही काम मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में राज्य स्तर पर कर रहा है, एक्सप्रेसवे की योजना, पुलों का निर्माण, ग्रामीण कनेक्टिविटी और डिजिटल नवाचार। लेकिन यहां कोई शोर नहीं। कोई प्रचार नहीं। इंजीनियर साइट पर हैं, अधिकारी जवाबदेही निभा रहे हैं और ठेकेदार गुणवत्ता की परीक्षा पास कर रहे हैं। यह मूक सेवा है। जानता के प्रति जिम्मेदारी का चुपचाप निभाया जाना।
भविष्य की संभावनाएं और गहरी
भविष्य की संभावनाएं और गहरी हैं। अगले वर्षों में भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड हाईवे, इंदौर-भोपाल गलियारा और नर्मदा-विंध्य एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट राज्य को नई गति देंगे। लोकपथ ऐप को रीयल-टाइम ट्रैफिक और मौसम अलर्ट से जोडक़र इसे पूर्ण स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम बनाया जा सकता है। लोक कल्याण सरोवर को हर जिले में अनिवार्य बनाकर जल संकट को स्थायी समाधान दिया जा सकता है। गुणवत्ता नियंत्रण के लिए और सख्त लैब और ड्रोन सर्वेक्षण से पोटहोल की समस्या लगभग समाप्त हो सकती है। दीर्घकाल में विभाग मध्यप्रदेश को ‘कनेक्टेड प्रदेश’ बना सकता है, जहां हर गांव-शहर आर्थिक मुख्यधारा से जुड़ा हो, जहां पर्यटन फले, उद्योग बढ़ें और युवा स्थानीय अवसर पाएं।
लोक निर्माण विभाग सिर्फ सडक़ें नहीं बनाता सपनों को जोड़ता है
दार्शनिक रूप से लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के नेतृत्व में विभाग की यह यात्रा सिर्फ सडक़ें बनाने की नहीं है। यह सपनों को जोडऩे की है। यह चुपचाप चलने वाली क्रांति है जो विकास को नींव से मजबूत करती है। जहां पहले मलाई की बात होती थी, वहां अब काम की गति है। जहां पहले संदेह था, वहां अब विश्वास। मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग बिना किसी शोर के अधोसंरचना का नया अध्याय लिख रहा है, एक ऐसा अध्याय जो स्थायी, समावेशी और सस्टेनेबल है। जब भविष्य में कोई यात्री सुगम सडक़ पर चलेगा या कोई किसान अपने उत्पाद बाजार पहुंचाएगा, तब पता चलेगा कि यह मूक मेहनत कितनी बड़ी थी। विकास की सच्ची कहानी शोर में नहीं, बल्कि काम की गहराई में होती है। और मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग आज वही गहराई रच रहा है।
Author: Jai Lok







