
जबलपुर (जयलोक)। आज मध्यप्रदेश विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास विभाग की मांग संख्या 22 पर गहन चर्चा हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने नगरीय प्रशासन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी। इस दौरान, जबलपुर पूर्व से विधायक श्री लखन घनघोरिया ने नगरीय निकायों की वित्तीय स्थिति, विकास परियोजनाओं की धीमी गति और नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
चर्चा में भाग लेते हुए, श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व) ने नगरीय विकास विभाग के बजट (18,744 करोड़ रुपए) पर अपनी बात रखी और कई महत्वपूर्ण मुद्दे सदन के सामने रखे। उन्होंने कहा कि यह विभाग आम जनमानस की मौलिक आवश्यकताओं से जुड़ा हुआ है और नागरिकों की सुविधाओं का संधारण और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
श्री घनघोरिया ने नगरीय निकायों को अपने संसाधन जुटाने के लिए करों में वृद्धि करने के माननीय मंत्री जी के सुझाव पर असहमति जताई। उन्होंने ऐतिहासिक चुंगी क्षतिपूर्ति के मुद्दे को उठाया, जिसके तहत 1886 में एक करार हुआ था कि हर तीन साल में नगरीय निकायों को दी जाने वाली राशि में 10त्न की वृद्धि की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था 1986 से 2006 तक तो चली, लेकिन उसके बाद बंद कर दी गई। श्री घनघोरिया ने कहा कि चुंगी क्षतिपूर्ति नगरीय निकायों का हक है और सरकार द्वारा इसे बंद कर देने से उनकी वित्तीय स्थिति कमजोर हो गई है।
श्री घनघोरिया ने बताया कि चुंगी क्षतिपूर्ति से कर्मचारियों के वेतन, पेंशन भुगतान और विकास कार्यों के लिए धन मिलता था। उन्होंने यह भी कहा कि जबलपुर नगर निगम को प्रतिमाह मिलने वाली राशि में से बिजली बिल के नाम पर कटौती की जा रही है, जो कि एक गंभीर विसंगति है। उनके अनुसार, इससे नगरीय निकायों के आय के स्रोत सीमित हो रहे हैं और उन्हें अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी कठिनाई हो रही है।
इसके अतिरिक्त, श्री घनघोरिया ने नगर परिषदों और नगर निगमों को बाजार बैठकी से मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी की राशि को कम करने के सरकार के फैसले पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने इसे 3त्न से घटाकर 2त्न कर दिया था, और वर्तमान सरकार ने इसे और कम करके 1त्न कर दिया है। उन्होंने जोर दिया कि यदि नगरीय निकायों को उनका हक दिया जाए तो उन्हें कर बढ़ाने की आवश्यकता नहीं होगी।
श्री घनघोरिया ने जबलपुर में 374.99 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम के अधूरे काम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि यह परियोजना 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2017 में अधूरा छोड़ दिया गया। उन्होंने कहा कि अधूरे नालों के कारण शहर में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है और नागरिकों को नारकीय जीवन जीने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
श्री घनघोरिया ने जबलपुर में जल संकट का भी मुद्दा उठाया और बताया कि अमृत 2 योजना के तहत 17 ओवरहेड टैंक बनाने का काम एक साल से रुका हुआ है। उन्होंने शहर की दूषित जल वितरण व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की और रमनगरा और ललपुर फिल्टर प्लांट में लीकेज की समस्या का जिक्र किया, जिससे जल आपूर्ति बाधित होती है।
अंत में, श्री घनघोरिया ने जबलपुर नगर निगम के लिए एक विशेष पैकेज की मांग की, क्योंकि यह 75 वर्ष पुराना है और ‘अमृत काल’ में है। उन्होंने शहर के मास्टर प्लान को 20 वर्षों से लंबित बताया और सरकार से इसे जल्द पूरा करने का आग्रह किया।
विधानसभा में नगरीय विकास से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई, जिसमें विधायकों ने नगरीय निकायों की समस्याओं और शहर के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। विधायक श्री घनघोरिया ने सरकार से इन समस्याओं के त्वरित और प्रभावी समाधान की अपेक्षा की है।

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Author: Jai Lok







