
जबलपुर (जयलोक)। एकता चौक के समीप स्थित भूखण्ड जिसे ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य को दान दिया गया था उस पर किसी भी प्रकार के निर्माण को लेकर सुभाष चंद जायसवाल द्वारा प्रस्तुत याचिक उच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दी गई है। सुभाष चंद जायसवाल द्वारा उक्त याचिका प्रस्तुत कर भूखण्ड पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाने की प्रार्थना की गई थी तथा पूर्व में नगर निगम के अधिवक्ता द्वारा उच्च न्यायालय द्वारा समय प्रदान करने के बावजूद जवाब न देने पर किसी भी प्रकार के निर्माण पर रोक लगाई थी।

उच्च न्यायालय द्वारा पारित एक पक्षीय अंतरिम आदेश की जानकारी प्राप्त होने पर शंकराचार्य जी की ओर से उनके सचिव ब्रम्हचारी सुबुद्धानंद जी महाराज द्वारा अपने अधिवक्ता ब्रजेश दुबे के माध्यम से स्थगन आदेश को समाप्त करने एवं याचिका को निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया।

जिसमें उन्होंने बताया कि सुभाष जायसवाल द्वारा एक अन्य प्रकरण समान प्रार्थना पर सिविल कोर्ट में लगाई है जिस पर कोर्ट ने कोर्ट फीस जमा करने हेतु निर्देशित किया, परन्तु सुभाष जायसवाल द्वारा कोर्ट फीस जमा करने वाले वाले आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी एवं सुनवाई के समय उसे बढ़वा लिया एवं उक्त तथ्यों को छुपाते हुए पुन: याचिका प्रस्तुत की। 27 जनवरी को हुई सुनवाई के दौरान सीनियर अधिवक्ता संजय ताम्रकार एवं अधिवक्ता ब्रजेश दुबे ने याचिका को निरस्त करने हेतु अपने तर्क रखे, जिस पर उच्च न्यायालय ने समस्त पक्षकारों को सुनते हुए यह पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा जब पूर्व से सिविल सूट प्रस्तुत किया है एवं उच्च न्यायालय में अन्य याचिका प्रस्तुत की है। तब समान रिलीफ पर अन्य याचिका पोषणीय नहीं है अत: न्यायालय द्वारा पूर्व में निर्माण पर रोकने लगाने वाले आदेश को समाप्त करते हुए याचिका को निरस्त कर दिया।

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Author: Jai Lok







