
प्रयागराज /नई दिल्ली (जय लोक)। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दर्ज यौन उत्पीडऩ मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दर्ज यौन उत्पीडऩ मामले में स्वामी शंकराचार्य श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी को राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
कोर्ट ने जब फैसला दिया तो अदालत में तालियां बजने लगीं। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही सरकार की ओर से पेश हुए अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने याचिका पोषणीयता पर सवाल उठाए। कहा कि अग्रिम जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट नहीं आ सकते। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला दिया। शंकराचार्य के अधिवक्ता डॉ. पीएन मिश्र और दिलीप गुप्ता ने दलील दी कि पीडि़त का मुकदमा संरक्षक के जरिए दर्ज कराया है। उसके माता-पिता कोई अता-पता ही नहीं है।

सरकार के वकील ने कहा कि असाधारण हालात में ही अग्रिम जमानत सीधे हाईकोर्ट आ सकती है। इस मामले में असाधारण जैसा कुछ नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह कोई अनिवार्य बाधा नहीं है। शंकराचार्य के वकील ने कहा कि शंकराचार्य के खिलाफ पहले 18 जनवरी को अमावस्या के दिन हुई मारपीट की अर्जी दी गई। इस पर केस दर्ज नहीं हुआ तो पॉक्सो वाली अर्जी दाखिल कर दी गई। यह दो अर्जी ही आपस में भ्रम की स्थिति पैदा कर रही है। यह मामला साजिश के तहत दर्ज कराया गया है, जो किसी के दबाव की ओर ईशारा कर रहा है। कहा कि शंकराचार्य पर केस दर्ज कराने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है। उसके ऊपर गौ हत्या, दुष्कर्म, हत्या का केस दर्ज है। वह 25 हजार रुपये का इनामी रहा है। नाबालिगों को अब तक बाल कल्याण समिति को क्यों नहीं सौंपा गया। बच्चों के मां-बाप कहां हैं। इस पर कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि बच्चे कहां हैं। शंकराचार्य के अधिवक्ता ने विवेचना पर ही सवाल खड़ा किए। कहा कि जिन बच्चों को पेश किया गया है उनकी मार्कशीट हरदोई की है और वहां के वह संस्थागत छात्र हैं।

शंकराचार्य से विवाद मौनी अमावस्या से शुरू हुआ है। आरोप लगाया कि यह सब सरकार की ओर से प्रायोजित है। बच्चों का मेडिकल करीब एक माह बाद हुआ है। सरकार के वकील ने बताया कि बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनके माता पिता को सौंपा है। अदालत के आदेश के तहत अगली सुनवाई तक उनके खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर अंतरिम संरक्षण प्रदान किया गया है।

यौन उत्पीडऩ के मामले में दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने फैसला सुरक्षित रख लिया। राज्य सरकार के वकील ने जमानत का विरोध किया था । वहीं, बचाव पक्ष ने पूरे मामले को साजिश बताते हुए कहा कि यह किसी अपराधी का नहीं बल्कि एक धर्मगुरु का मामला है।
Author: Jai Lok






