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शिव महापुराण चारों पुरुषार्थों को देने वाला है – ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद

जबलपुर (जयलोक)।श्री बगलामुखी सिद्ध पीठ शंकराचार्य मठ में आयोजित श्री शिव महापुराण के द्वितीय दिवस में पूज्य ब्रह्मचारी श्री चैतन्यानंद जी महाराज श्री ने बताया कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा से धन, धान्य, आरोग्य, और संतान की प्राप्ति होती है, साथ ही शारीरिक और मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती हैरुद्राक्ष को भगवान शिव के आंसुओं से उत्पन्न माना जाता है, इसलिए इसे बहुत पवित्र माना जाता है. रुद्राक्ष धारण करने से आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है. भस्म भगवान शिव का एक अभिन्न अंग है और इसे शिव का स्वरूप माना जाता है।

भस्म धारण करने से व्यक्ति पवित्रता और विरक्ति की भावना का अनुभव करता है। बिल्वपत्र की तीन पत्तियां त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का प्रतीक मानी जाती हैं। ये तीन पत्तियां सत्व, रज और तमोगुण का भी प्रतिनिधित्व करती हैं, जो अहंकार और सांसारिक बंधनों से मुक्ति का प्रतीक हैं।

शिव महापुराण में चौबीस हजार श्लोक हैं, जिसमें सात संहिताएं हैं। शिव महापुराण परब्रह्म परमात्मा के समान गति प्रदान करने वाला है।शिव महापुराण में भगवान शिव का सर्वस्व है। इस लोक और परलोक में सुख की प्राप्ति के लिए आदरपूर्वक इसका सेवन करना चाहिए। यह निर्मल शिव महापुराण धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूप चारों पुरुषार्थों को देने वाला है। प्रतिदिन आदरपूर्वक शिव महापुराण का पूजन करने वाले मनुष्य संसार में संपूर्ण भोगों को भोगकर शिवलोक को प्राप्त करते हैं।

वे सदा सुखी रहते हैं। कथा के पूर्व पार्थिव शिवलिंग निर्माण उनका दुग्धाभिषेक बिल्वपत्र अर्चन हुआ।

पूजन में उपस्थित श्री मति पद्मा मेनन, श्री अमित प्रतिक्षा सिंह, श्री मनीष दीप्ति, श्री मति नीता पटेल,श्री विजय उषा कटारिया, लोपामुद्रा, कस्तूरीकांचन , श्री मति आराधना चौकसे, श्रीमति ऋचा मिश्रा, श्री रमेश चित्रा महावर, वसुंधरा पाण्डेय, शुभम चौरसिया,मोनू परिहार, अभिषेक आशीष चौकसे, प्रीति नेहा साहू, मधु मिश्रा,आदि।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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