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श्वान के हमले से घायल हुई थी बच्ची मानव अधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

कहा प्रतिवेदन दें कलेक्टर

जबलपुर (जयलोक)। 6 वर्षीय बच्ची पर हुए श्वानों के हमले में बालिका बुरी तरह घायल हो गई। बालिका पर श्वान के हमले के बाद भले ही पशु प्रेमियों ने मुँह बंद कर लिया हो लेकिन मप्र मानव अधिकार आयोग ने मामले को संज्ञान में लिया है और कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। इस बात को जयलोक ने प्रमुखता से उठाया था तो यह आवाज मप्र मानव अधिकार आयोग तक पहुँची और मामले को संज्ञान में लिया गया।

पाटन स्थित साहू कॉलोनी में गत दिनों एक 6 वर्षीय बच्ची पर दो स्ट्रीट डॉग्स द्वारा हमला करने का मामला सामने आया है। मासूम बालिका कविता दुकान से सामान लेकर लौट रही थी, तभी आवारा कुत्तों ने हमलाकर उसे गिराकर 2-3 मिनट तक नोंच-नोंचकर काटा, जिससे बालिका गंभीर रूप से घायल हो गई और चीखती चिल्लाती रही, बाद में क्षेत्रीय लोगों ने पत्थर मारकर कुत्तों को भगाया। घटना के बाद मासूम की मां अहिल्याबाई ने गंभीर हालत में बच्ची को पाटन स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर प्राथमिक उपचार दिलाया, जहां से उसे जबलपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। मप्र मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी फरजाना मिर्जा ने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार के आधार पर मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग की मुख्य पीठ भोपाल में प्रकरण पर सुनवाई करते हुये, कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव कुमार टण्डन की एकलपीठ ने जनहित में प्रथम दृष्ट्या मानव अधिकारों के हनन का मामला मानकर, जबलपुर के कलेक्टर एवं सीएमएचओ को निर्देशित किया है कि ऐसे प्रयास किये जायें कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही उक्त मामले की जांच कराकर, घायल के इलाज के संबंध में की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह में मांगा है।

श्वानों के हमले का यह कोई पहला मामला नहीं है जब श्वान के हमले से कोई बालिका इतनी बुरी तरह घायल हुई हो। इसके पूर्व भी शहर और अन्य शहरों में श्वानों के हमले से बच्चों की मौतें हो चुकी हैं। लेकिन इसके बाद भी श्वानों के खिलाफ कोई कार्रवाही नहीं की गई। इतना ही नहीं जब कभी श्वानों के खिलाफ कार्रवाही करने का मन बनाया गया तो पशु प्रेमी दयालु भावना दिखाते हुए श्वानों को बचाने के लिए आगे आ गए। लेकिन ऐसे मामलों में बच्चे श्वानों का शिकार हो रहे हैं तब कोई भी पशु प्रेमी कुछ बोलने को तैयार नहीं होता है।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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