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सच ही तो कहा था ‘वकील साहब’ ने, लोग फालतू निकलते ही क्यों हैं?

(जय लोक)। पिछले दिनों देवास इंदौर मार्ग पर जबरदस्त रूप से जाम लग गया, अखबारों में खबर छपी कि तीस घंटे तक ये जाम बाकायदा लगा रहा कहा तो यह भी गया कि इस जाम के चक्कर में दो-तीन लोग भगवान को प्यारे हो गए। मामला बड़ा गंभीर था तो हाईकोर्ट ने भी इस पर संज्ञान ले लिया और नेशनल हाईवे से जवाब मांग लिया नेशनल हाईवे के वकील साहब ने हाईकोर्ट में बताया ‘कि लोग बाग बिना काम के निकलते ही क्यों हैं इतनी जल्दी है तो जाम तो लगेगा ही, लोगों को बाईपास से मॉल होटल गार्डन जाना रहता है इसलिए ऐसी स्थिति बिगड़ जाती है’ जब वकील साहब का जवाब अखबारों की सुर्खियां बना और उस पर हल्ला मचा तो नेशनल हाईवे ने अपनी खाल बचाने के लिए कह दिया कि हमारा जवाब नहीं और वकील साहब को नोटिस भी दे दिया। वैसे अपने हिसाब से कोई गलत बात नहीं कही थी वकील साहेब ने, आजकल लोगों को बेवजह घूमने का शौक चर्राया है, जरा सा पानी बरसा सो लॉन्ग ड्राइव पर निकल गए, खाना खाने निकल गए, कुछ नहीं तो झरना देखने चले गए बड़ी-बड़ी गाडिय़ां उसमें कुल जमा दो लोग अब जाम नहीं लगे तो क्या हो। अरे भाई घर में बैठो, बीवी से बातचीत करो, बच्चों के साथ मनोरंजन करो, ताश खेलो, कैरम खेलो, रोज तो बीवी कुछ कुछ बनाती है किसी दिन तुम ही उसके लिए भजिया तल दो, मंगोड़ी बना दो, फिल्मी गाने सुन लो, टीवी पर पिक्चर देख लो, घर की साफ  सफाई कर लो कितने सारे काम हैं लेकिन नहीं सब छोड़ के फालतू सडक़ पर निकल जाते हैं अब जब सैकड़ो की तादाद में सडक़ों पर निकलेंगे तो जाम तो लगेगा ही, वैसे आजकल तो जाम आम बात है वो तो हाईवे था यहां तो शहर की किसी भी सडक़ पर आप निकल जाओ जाम ही जाम मिलेगा इसलिए जाम से इतना घबराने की जरूरत क्या है? वकील साहब को बेवजह नोटिस दे दिया कोई गलत बात नहीं कही उन्होंने जो कुछ बोला सच ही बोला। पता नहीं आजकल लोगों को घर में रहने में क्या दिक्कत हो रही है चलो जिनकी बीवियों से नहीं पटती वे बाहर निकल जाए लेकिन अस्सी फीसदी मर्द तो बीवी के कहने पर ही चलते हैं तो उनकी बात सुन लो, घर में बैठो ,दो-चार प्यार की बातें कर लो, वैसे बीवियों से प्यार की बातें करना कुछ अजीब सा लगता है फिर भी कोशिश करो, कुछ उसकी सुंदरता की तारीफ कर दो, हो सकता है कुछ अच्छा खाने-पीने मिल जाए लेकिन ये लोगों को पसंद नहीं आता मुंह उठाए गाड़ी उठाई और निकल पड़े और जब जाम में फंसते हैं तो सरकार को और पुलिस को गाली देने लगते हैं। किसने बोला था आपको बाहर निकलने पर खुद निकले और फंसे हो इसमें बेचारे नेशनल हाईवे का क्या दोष। इस घटना के बाद अपने को लगता है कि शायद लोग बाग फालतू घूमने के लिए ना निकलेंगे लेकिन ये भविष्य के गर्भ में है ये तो बाद में पता लगेगा जब फिर कभी ऐसा जाम लगेगा ।

 

अफसर हो तो ऐसा
भारी हल्ला मच गया है इस बात को लेकर कि एक अफसर जो एक विभाग में  विभाग के मंत्री के अंडर में काम करता है उस अफसर ने अपने ही विभाग के मंत्री के खिलाफ  जांच के आदेश दे दिए। मामला भी बड़ा गंभीर था, महिला मंत्री जी पर एक हजार करोड़ के कमीशन लेने का आरोप लगा था। जब ऊपर से जांच करने की बात आई तो अफसर ने तत्काल में मंत्री जी के खिलाफ  जांच के आदेश के लिए इधर आदेश हुए और उधर पूरे मीडिया में सुर्खियां बन गई कि अफसर ने अपने ही विभाग के मंत्री के खिलाफ  जांच के आदेश दे दिए हैं हडक़ंप मचना था तो मच ही गया तो शाम होते-होते जिसकी जांच के लिए सात दिन का समय अफसर जी ने दिया था विभाग ने सात घंटे में ही ये बता दिया कि मंत्री जी के खिलाफ  कुछ भी नहीं मिला जो कुछ भी था सब गलत था। इतनी फर्ती से जांच तो आज तक अपन ने न देखी और ना सुनी थी और वो भी एक हजार करोड़ की कमीशन की। इस जांच को तो ‘गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड’ में शामिल किया जाना चाहिए था क्योंकि यहां तो जांच सालों ले लेती है उसके बाद भी रिजल्ट नहीं आता लेकिन यहां सात घंटे भी पूरे नहीं हो पाए और बाकायदा उसका रिजल्ट भी घोषित हो गया  लेकिन मानते हैं उस अफसर को अपने ही मंत्री के खिलाफ  जांच के आदेश देना कोई छोटा-मोटा काम नहीं है लेकिन भाई साहब ने यह कमाल कर दिखाया अब जब मामला बहुत मच गया है तो विभाग ने उस अफसर को कारण बताओं नोटिस जारी कर दिया कि आपने ऐसा किया तो किया कैसे? अरे भाई प्रधानमंत्री कार्यालय से जांच की बात आई है और अगर उस अफसर ने जांच के आदेश दे दिए तो क्या गुनाह कर दिया और फिर तत्काल में जांच का रिजल्ट भी तो बता दिया जिसने भी जांच की है उसे तो पुरस्कृत करना चाहिए जिसने सात घंटे में पूरे मामले की जांच कर ली और परिणाम भी घोषित कर दिया। इधर मंत्री महोदया कह रही है कि मैं मेरे खिलाफ  षड्यंत्र रचा जा रहा है, जांच कर ली जाए, दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा सो हो गया, जांच में सारी चीज गलत निकल गई लेकिन मंत्री महोदया जी की छबि धूमिल हो गई ऐसा वो कह रही है।

 

काहे से आएं और काहे से जाएं
अहमदाबाद से लंदन जा रहे हवाई जहाज में आग लग गई बेचारे ढाई सौ से ज्यादा लोग आज में जलकर भस्म हो गए। जब से ये खबर आई है लोग बाग हवाई जहाज से यात्रा करने में डरने लगे हैं लेकिन यहां तो अगर आप ट्रेन में जा रहे हो तो भी आपकी जान खतरे में ही है कब कौन सी ट्रेन किसी दूसरी ट्रेन से भिड़ जाए कोई भरोसा नहीं है, तो फिर बस में चलो लेकिन बस पर भी कोई बस नहीं है वो कब खाई में गिर जाए, कब नदी में समा जाए कह नहीं  सकते, अपनी कार से जा रहे हैं  तो सामने से आ रहा ट्रक या ट्राला टक्कर मार सकता है स्कूटर से इतनी दूर जा नहीं सकते, पैदल चलने में भी संकट है कौन सा वाहन आकर कुचल दे ये भी कह नहीं सकते। अब आदमी जाए तो जाए कैसे भारी सवाल खड़ा हो गया। भैया अपनी तो सबको एक ही सलाह है कि जब तक बहुत जरूरी काम ना हो तब तक घर से निकलो ही मत और अगर निकल भी रहे हो तो पहले वसीयत तैयार करके रख दो कोई भरोसा नहीं कि यदि आप निकल तो गए हो लेकिन क्या वापस आप आओगे या नहीं ये तो शायद भगवान भी नहीं जान पाएगा। पहले जब कभी लोग बाग तीर्थ यात्रा पर जाते थे तो सब लोगों से मिलजुल कर जाते थे कि क्या पता वापस लौट पाए या ना लौट पाए वो तो तीर्थ यात्रा की बात थी अब तो घर से निकलने में ही वो सारी चीजें कर लेना चाहिए जो तीर्थ यात्री करते थे।

 

सुपरहिट ऑफ  द वीक
श्रीमान जी और उनके दोस्त के बीच में झगड़ा हो गया दोस्त चिल्लाकर बोला
‘मुझे पता है तुम किसका हुकुम मानते हो, और किसके इशारों पर चलते हो’
‘देख बीवी तक मत जा मैं बता रहा हूं नहीं तो बहुत खून खराब हो जाएगा’ श्रीमान जी ने भी चिल्ला के उत्तर दे दिया।

7 और 8 जुलाई को कलेक्टर ने स्कूलों में घोषित किया अवकाश

Jai Lok
Author: Jai Lok

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