
परितोष वर्मा

जबलपुर (जयलोक)। संस्कारधानी में हो रहे विभिन्न प्रकार के अपराधों में भाजपा युवा मोर्चा और भाजपा संगठन के पदाधिकारियों का एक के बाद एक नाम आना और उनके ऊपर पुलिस द्वारा मामले दर्ज किए जाने के बाद अब भाजपा के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों में भी अजीब से भय और चिंता का माहौल है। कब कौन कहां किस मामले में संलिप्त निकल आए किसी के बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। मंत्री, सासंदों, विधायकों के लिए तो किसी के कंधे पर हाथ रखकर आत्मीय भाव के साथ फोटो खिंचवाना पाप सा हो गया है। वर्तमान में भी जो मामले खुलकर सामने आए हैं उसके बाद बड़े जनप्रतिनिधियों के लिए बहुत से प्रकरण ना निगल पाने की स्थिति में है ना उगल की स्थिति में हैं।
कब कौन सा नेता किसी आपराधिक मामले में फंस जाए या कौन सी अनैतिक गतिविधियों में शामिल होकर अपराध कर ले इस बारे में कोई नहीं जानता। भाजपा हो या कांग्रेस हो हर दल के राजनेताओं को अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारी के साथ आत्मीय संबंध दर्शाना पड़ते है।

कुछ लोगों के गहरे संबंध अपने कार्यकर्ताओं से भी होते हैं। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि कई बार बड़े नेताओं के संरक्षण पर ही ऐसे छुट भैया नेता अपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं और स्थानीय पुलिस व प्रशासन पर अपना रुतबा बढ़ाकर बहुत जमकर धीरे-धीरे अपराध के क्षेत्र में अपनी जगह बना लेते हैं।

लेकिन कई बार यह स्थिति भी निर्मित हो जाती है कि सामान्य रूप से किसी पार्टी के कार्यक्रम में या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसे लोगों के साथ खींची गई फोटो गले की हड्डी बड़े नेताओं के लिए बन जाती है। सामान्य रूप से अपने पार्टी के बड़े नेताओं के साथ फोटो खिंचवाने और उसे सोशल मीडिया पर डालने का चलन इन दिनों जोरों पर है। ऐसे बहुत से कांड पहले भी हो चुके हैं जब अपराधी गतिविधियों में संलिप्त लोगों की राजनीतिक क्षेत्र के बड़े जनप्रतिनिधियों के साथ फोटो सार्वजनिक हुईं हैं और जमकर बवाल भी मचा है। ऐसी स्थिति में सभी जनप्रतिनिधियों के लिए यह बड़ा संकट हो गया है कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी किसके साथ फोटो खिंचवाएं और किसके साथ नहीं खिंचवाएं।
दूसरी और राजनीतिक दलों के संगठनों को भी अब इस विषय पर गंभीरता से विचार करना होगा कि उन्हें अपनी पार्टी और संगठन के पदाधिकारी नियुक्त करने से पहले किसी भी व्यक्ति के चाल चरित्र और चेहरे के पीछे क्या चल रहा है इसके लिए विशेष रूप से रणनीति तैयार कर छन्ना लगाना होगा ताकि भविष्य में इस प्रकार के अपराधिक गतिविधियों में लिप्त लोगों को संगठन के पदों से दूर रखा जा सके और पार्टी की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके। यह बात भी बिल्कुल सत्य है कि अब संगठन को अपने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों पर भी नजर रखनी होगी कि वह अपने अधीन किस प्रकार के लोगों को संरक्षित कर रहे हैं।
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Author: Jai Lok







