Download Our App

Home » जबलपुर » सारे ‘सिंह राशि’ वाले सोच रहे हैं काश हमारी राशि ‘मेष’ होती

सारे ‘सिंह राशि’ वाले सोच रहे हैं काश हमारी राशि  ‘मेष’ होती

(जय लोक)। अभी हाल ही में एक सर्वे आया है जो किसी ज्योतिषी ने किया है इस सर्वे ने  अमीर लोगों की लिस्ट जारी करी है और इस लिस्ट के हिसाब से जिन लोगों की राशि  ‘मेष’ है वे सबसे ज्यादा अमीर हैं क्योंकि इस राशि के लोगों की इनकम सबसे ज्यादा बढ़ी है इसमें और भी राशियां शामिल हैं जिनकी इनकम में बढ़ोतरी हुई लेकिन  एकमात्र एक राशि ऐसी है जिनकी इनकम  घटी है और घटती जा रही है और वो राशि है  ‘सिंह’। सर्वे में बताया गया है कि मेष राशि वालों की इनकम में बाईस फीसदी की बढ़ोतरी हुई है दूसरी राशियों में किसी की दस प्रतिशत किसी की आठ फीसदी किसी की सात प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन बेचारे सिंह राशि वालों की इनकम जीरो दशमलव छह परसेंट घट गई है जब से यह सर्वे सामने आया है सिंह राशि वाले भारी परेशान हैं कि क्यों  ऐसे वक्त में पैदा हुए जब उनकी राशि  सिंह तय हुई । ऊपर वाले से उनकी एक ही गुजारिश थी कि हुजूर कम से कम ऐसे समय पर पैदा करते हैं जब राशि मेष या और कोई दूसरी होती।

वैसे कहा तो ये जाता है कि सिंह राशि वाले सिंह की तरह ही होते हैं लेकिन इनकम के मामले में वे चूहा साबित हो रहे हैं। अब तमाम सिंह राशि के जो जातक हैं वे यही सोच रहे हैं कि अगर सिंह राशि की बजाय उनकी राशि मेष होती तो कितना अच्छा होता। बैठे बिठाये इनकम में बाईस फीसदी की बढ़ोतरी हो जाती। लेकिन अब इन सिंह राशि वालों को कौन समझाए कि भैया ये सब अपने हाथ में नहीं है जो करम पिछले जन्म में किए होंगे उसी के आधार पर ऊपर वाले ने ऐसे वक्त पर नीचे भेजा होगा जब आपकी राशि सिंह तय होगी। अपनी  तो इन तमाम सिंह राशि वालों को  एक ही सलाह है कि कम से कम इस जन्म में ऐसे करम करो कि अगले जन्म में भगवान को भी सोचना पड़े कि इनको कौन सी राशि में भेजा जाए क्योंकि अगर अगले जन्म में भी सिंह राशि में पैदा हो गए तो वो जन्म भी खराब हो जाएगा। जब से यह सर्वे सामने आया है मेष राशि के जातक छाती चौड़ी करके घूम रहे हैं जहां जहां पैसा लगाते हैं वो बाईस प्रतिशत बढ़ाकर वापस आ जाता है इसी को किस्मत कहते हैं और किस्मत ऊपर वाला ही बनाता है। लोगबाग़ जरूर कहते हैं कि इंसान अपनी किस्मत खुद बनाता है लेकिन  देख लो कि सिंह राशि वाले कितनी ही मेहनत कर लें लेकिन उनकी इनकम में कमी ही आएगी। ये तो सर्वे भी कह रहा है लेकिन अब पछताए होत क्या? जो होना था सो हो गया अब इस जिंदगी में तो सिंह राशि से मेष राशि में ट्रांसफर होना असंभव है इसलिए जहां कहीं भी पैसा लगाओ पहले यह मन बना लेना कि अपने को घाटा ही होने वाला है ऐसा सोच लोगे तो शायद रंज से बच जाओगे ।

आप तो चेन लगा दो

पुराना लतीफा है। आपरेशन के बाद भी पेट दर्द से परेशान मरीज अस्पताल पहुंचा। डाक्टर ने पेट खोलकर देखा, कैंची अंदर छूट गई थी। निकाली और फिर टांके लगा दिए। कुछ दिन बाद मरीज फिर हाजिऱ। दर्द बरकरार था। पेट खोला गया, अंदर रुई का फाहा छूट गया था। निकाला और फिर टांके लगा दिए। हफ्ते दस दिन बाद मरीज फिर अस्पताल में। दर्द हो रहा है। पेट फिर खुला, अंदर सिरिंज मिली।  वापस टांके लगाए ही जा रहे था कि मरीज ने गुहार लगाई। डाक्टर बार बार पेट खोलने से तो अच्छा है कि एक चैन ही लगा दो । संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर को पानी की सप्लाई करने वाली  ‘रमनगरा पाइपलाइन’ का हाल भी उस मरीज जैसा ही है। आपरेशन का दर्द खत्म होता नहीं कि पेट फिर खोलना पड़ता है। खुदाई होती है, थीगड़े लगते हैं, पुराई हो जाती है। व्यस्त सडक़ पर यातायात बाधित होता है अनेकों टंकियां बिना भरी रही जाती हैं। प्यास से बेहाल जनता तकलीफ झेलती है। टैंकर से पानी सप्लाई का साइड बिजनेस गुलजार होता है। और कयास लगाए जाने लगते हैं कि इस बार का सुधार कार्य कितने दिन टिकेगा।
लतीफे पर फिर लौटते हैं। अव्वल तो सारी चिकित्सा बिरादरी से क्षमा। उनके व्यवसाय की प्रतिष्ठा धूमिल करने का जऱा भी अभिप्राय नहीं है। समस्या के लिए इस लतीफे से ज्यादा उपयुक्त शायद ही कुछ और हो। फिर पानी की समस्या चिकित्सा व्यवसाय से जुड़े लोग भी तो झेलते हैं।

नगर निगम चाहे तो लतीफे के मरीज के, डाक्टर साहब चेन क्यों नहीं लगा देते, वाले सुझाव पर अमल कर सकती है। पाइपलाइन के शास्वत सुधार आकांक्षी हिस्से में सडक़ के नीचे कांक्रीट डक्ट बना दे। जब जरूरत हो डक्ट के अंदर जाकर सुधार कर दिया जाए। सडक़ बार बार की खुदाई पुराई से बचेगी, सुधार जल्दी हो जाएगा और यातायात भी कम बाधित होगा। उन्हें जरूर नुकसान होगा जो बार बार के सुधार में इमरजेंसी कार्य के नाम पर अनाप-शनाप माल बनाते हैं।

मूर्ख था वो पति

भारत में और विदेशों में यही अंतर है कि यहां पति-पत्नी के बीच में जो सामंजस्य है वो विदेश में दिखाई नहीं देता । जरा जरा सी बात पर तलाक हो जाता है। अभी हाल ही में जॉर्जिया में एक पत्नी ने  अपने पति को इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि उस गरीब ने अपनी पत्नी का नाम अपने मोबाइल में  ‘मोटी’ के नाम से सेव कर लिया था जैसे ही पत्नी को यह पता लगा कि उसका नाम मोटी के नाम से सेव है उसने तत्काल तलाक का आवेदन दिया और तलाक हो गया। भारत में ऐसा कुछ नहीं होता आप पत्नी को मोटी कह दो,  लंबू कह दो, ठिगनी कह दो,भैंस कह दो, गैया कह दो,  काली कलूटी कह दो उसे कोई फर्क नहीं पड़ता ना वह तलाक देने जाती है और ना ही पति से झगड़ती है वैसे वो पति अपने हिसाब से तो मूर्ख ही था अरे भाई इतनी अकल तो होना चाहिए कि यदि पत्नी इस बात से नाराज हो गई कि उसका नाम मोटी के नाम से मोबाइल में सेव हो गया है तो  तुरंत उसको कहता ये नाम तो मैंने प्यार से लिखा है तुम मोटापे में कितनी सुंदर लगती हो, तुम्हारा मोटापा तो बड़ी-बड़ी हसीन महिलाओं को मात कर देता है, तुम्हारे इसी मोटापे  से मुझे जो इश्क है वो बार-बार इस बात के लिए प्रेरित करता है  कि मैं तुम्हें प्यार से मोटी  कहूं  और इसलिए मैंने मोटी के नाम से तुम्हारा नाम मोबाइल में सेव कर लिया इसके अलावा एक काम और भी कर सकता था   ‘मन को मारकर’ पत्नी का नाम मोटी  की बजाय   ‘स्वीटी’ के नाम से सेव कर लेता तो ना तो पत्नी नाराज होती और ना ही तलाक की नौबत आती।

सुपर हिट ऑफ  द वीक

‘यार मैं जो भी काम शुरू करता हूं मेरी बीवी बीच में आ जाती है बताओ मैं क्या करूं’ श्रीमान जी से उनके एक दोस्त ने सलाह मांगी।
‘तुम ट्रक चला कर देखो शायद तुम्हारी किस्मत साथ दे दे’ श्रीमान जी ने उसको सलाह दे दी।

मासूमों के शव पहुँचने पर गमगीन हुआ गाँव, आज हुआ दोनों का अंतिम संस्कार, नम आंखों से दी गई अंतिम बिदाई

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » जबलपुर » सारे ‘सिंह राशि’ वाले सोच रहे हैं काश हमारी राशि ‘मेष’ होती