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सुप्रीम कोर्ट से निजी स्कूल के संचालकों को मिली जमानत : वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने की पैरवी  

जबलपुर (जयलोक)
सर्वोच्च न्यायालय ने आज जेल में बंद जबलपुर के स्कूल संचालकों और प्राचार्यों को जमानत दे दी है। जबलपुर के जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुरूप शहर में संचालित निजी स्कूलों की जाँच की गई थी। इस जाँच में स्कूलों द्वारा मनमाने रूप से फीस की वसूली किए जाने की शिकायतों की भी जाँच की गई और जिला प्रशासन को नियम विरुद्ध की गई वसूली के प्रमाण भी स्कूल द्वारा दी गई आडिट रिपोर्ट के आधार पर मिले भी थे।
वहीं स्कूल संचालकों द्वारा मनमाने रूप से स्कूल के लिए पुस्तकें स्कूल द्वारा बताए गए पुस्तक विक्रेता से ही खरीदी के लिए बाध्य किया जाता रहा है। इसी तरह स्कूलों द्वारा निर्धारित ड्रेस के विक्रेताओं  के यहां से ही ड्रेस खरीदने के लिए भी अभिभावकों को बाध्य किया जाता रहा है। इन सारी अनियमिताओं को लेकर जिला प्रशासन द्वारा निजी स्कूलों के विरुद्ध जाँच कराई गई वहीं पुलिस द्वारा कई स्कूल के संचालकों और प्राचार्यों को गिरफ्तार करके न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहां से इन्हें जेल भेज दिया गया था। जेल भेजे गए स्कूल के संचालकों और प्राचार्यों ने अपनी जमानत के लिए निचली अदालतों और हाई कोर्ट में भी याचिकाएं दायर की थीं। इन याचिकाओं को न्यायालय द्वारा रद्द भी कर दिया गया था। इसके बाद स्कूल संचालकों और प्राचार्यों की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और वरुण तन्खा ने जेल में बंद स्कूल के संचालकों और प्राचार्य की ओर से जमानत के लिए याचिका दायर की गई इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज पक्ष रखा उनके तर्कों को सुनने के उपरांत सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद स्कूल संचालकों और प्राचार्य को जमानत का लाभ दे दिया। वहीं सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालतों के फैसले पर नाराजगी भी जाहिर की।
जय लोक से चर्चा करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट एवं राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सभी को जमानत का लाभ दिया है। जिन्होंने अग्रिम जमानत लगाई थी उन्हें भी यह लाभ प्राप्त हुआ है। श्री  तन्खा ने कहा कि वह प्रशासन की इस कार्रवाई के तरीके के खिलाफ थे जिस प्रकार से स्कूल के प्राचार्यों शिक्षकों को अपराधियों की तरह जेल में बंद कर दिया गया यह तरीका ठीक नहीं था। श्री  तन्खा व्यक्तिगत रूप से भी इस पूरे मामले में रुचि ले रहे थे और हर तरीके से उन्होंने उनके पास मदद मांगने पहुँचे स्कूल प्रबंधन के लोगों और प्राचार्यों को राहत दिलाने के प्रयास किया।
जबलपुर के कई स्कूलों  प्रबंधन की ओर से मामले की पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा  उनके पुत्र युवा अधिवक्ता वरुण तन्खा  की ओर से उच्चतम न्यायालय के समक्ष यह तर्क रखे गए की पुलिस के द्वारा की गई एफआईआर  में कुछ भी ऐसे सबूत, तथ्य नहीं हैं जिसके आधार पर इन लोगों को इतने दिनों से जेल में बंद रखा गया है और जमानत का लाभ नहीं दिया जा रहा है। युवा अधिवक्ता वरुण तन्खा की ओर से स्कूल प्रबंधक एवं प्राचार्य को राहत दिलवाने के लिए  उच्चतम न्यायालय में प्रकरण दायर किए गए थे। इस मामले की पैरवी करने के लिए आज उच्चतम न्यायालय में वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने प्रभावी दलीलें प्रस्तुत की। श्री  तन्खा की ओर से बताया गया कि इस प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय के दो निर्णय आ चुके हैं जिसके कारण उनके क्लाइंट सूची में शामिल स्कूलों को फीस रिकवरी के मामले में स्थगन का आदेश मिला है। दूसरा  तर्क श्री तन्खा  की ओर से यह दिया गया कि जिन पुस्तक विक्रेताओं को आधार बनाकर पुलिस ने प्रकरण बनाया है उन्हें पहले ही जमानत का लाभ प्राप्त हो चुका है। उच्चतम न्यायालय के सामने  अन्य बिंदुओं को भी प्रकाश में लाया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस प्रकरण में सभी को जमानत का लाभ देने का निर्णय लिया।

Jai Lok
Author: Jai Lok

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