
विभागाध्यक्ष डॉ. संजय भारती ने स्वयं को घोषित किया डीन एवं डायरेक्टर से बड़ा अधिकारी
जबलपुर (जयलोक)। मामला जानकारी में आया है कि डॉ संजय भारती जो कि रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के पिछले दो वर्षों से विभागाध्यक्ष हैं उन्होंने विभाग में पदस्थ कई वरिष्ठ नर्सिंग सिस्टर स्टाफ को अपने स्तर से एक नहीं कई कई कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। नियमानुसार यह नोटिस प्रशासकीय नियंत्रण कर्ता अधिकारी डीन या सुपरिंटेंडेंट द्वारा ही जारी किए जा सकते हैं। मेडिकल कालेज में नर्सिंग स्टाफ हमेशा ही सुपरिंटेंडेंट के अधीन पदस्थ होता है। पच्चीस से अधिक विभागों में ऐसी ही व्यवस्था है। चर्चा व्याप्त है कि अपनी पसंद के स्टाफ को नर्सिंग सिस्टर के पद पर अपनी पसंद के स्टाफ को पदोन्नत किए जाने हेतु वर्तमान में पदस्थ नर्सिंग सिस्टर की बलि चढ़ाने की तैयारी चल रही है।
प्रशासनिक रूप से डायरेक्टर का प्रभार इस समय डीन के पास है परंतु डॉ संजय भारती ही डायरेक्टर बने हुए हैं तथा अपनी मर्जी से ही पोस्टिंग आदि कर रहे हैं जिससे कर्मचारियों में भयंकर असंतोष एवं डर व्याप्त है। पिछले दो वर्षों में एमडी के छात्रों द्वारा विषाक्त कार्य स्थिति को देखते हुए तीस तीस लाख रुपये के बांड भरकर संस्थान छोडऩा अपनी जान और भविष्य के लिए सुरक्षित समझा।
आलम यह है कि पूर्व में एक समय डॉ भारती के साथ मिलकर एक पूर्व अधिकारी के खिलाफ़ मोर्चा खोलने वाले डॉ ब्रह्मप्रकाश, डॉ विकास पटेल एवं डॉ अविनाश पटेल भी पिछले डेढ़ वर्ष में संस्थान छोड़ चुके हैं। फैकल्टी संख्या कम होने से एमडी सीट्स घट कर आठ से पाँच हो गई हैं तथा नवीन सत्र में शून्य होने की संभावना है।
मनमर्जी का आलम यहाँ तक है कि शासन के निदेर्शों के विपरीत सीनियर रेसिडेंट के पदों को शीघ्र भर्ती करने के बजाय डॉ भारती द्वारा साक्षात्कार देने आए अभ्यर्थी को असफल कर दिया जाता है? ताकि केअक्टूबर में वर्तमान में पढ़ रहे छात्रों की परीक्षा होने के बाद अपने मनचाहे छात्र-छात्राओं को नियुक्ति दी जा सके। कुल मिलाकर शासन द्वारा करोड़ों की लागत से बनाये गए स्कूल ऑफ एक्सीलेंस इन पल्मोनरी मेडिसिन वर्तमान विभागाध्यक्ष के कार्यकाल में दुर्दशा के नए अध्याय लिखकर शासन की योजनाओं में पलीता लगाया जा रहा है।

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Author: Jai Lok







