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एसडीओपी, टीआई सहित 10 पुलिस कर्मियों पर डकैती-लूट का प्रकरण दर्ज, एसपी, एएसपी को नोटिस जारी, जबलपुर में रहे एक सीएसपी व क्राइम ब्रांच के आरक्षक संदेह के दायरे में, कटनी के 4 पुलिस कर्मियों को हटाया

 

 कहाँ गए 25 लाख-जमानत पर सिवनी एसपी और आई जी के बीच खींचतान दिखी

 

जबलपुर (जयलोक)। 8 अक्टूबर को सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे, प्रभारी टीआई उप निरीक्षक अर्पित सहित 10 पुलिसकर्मियों के द्वारा हवाला कारोबार के लगभग 3 करोड़ रुपए को लूटने के उद्देश्य से किए गए कृत्य और व्यापारियों के अपहरण के आरोपी के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर अब इन सभी के खिलाफ  एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसके अलावा सिवनी पुलिस अधीक्षक सुनील मेहता और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आईजी जबलपुर प्रमोद वर्मा के निर्देश पर इन दोनों अधिकारियों को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए नोटिस थमाया गया है।

डीजीपी भी नाराज

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिवनी हवाला लूट मामले में मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने सख्त कार्रवाई करते हुए एसडीओपी पूजा पांडे समेत 11 पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। एफआईआर डकैती, अवैध रूप से रोकना, अपहरण और अपराधिक षडयंत्र के तहत दर्ज की गई है। इनके खिलाफ  आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। अपराध क्रमांक 473/2025 थाना लखनवाड़ा में धारा बीएनएस 310(2) डकैती, 126(2) गलत तरीके से रोकना,140(3) अपहरण/अपहरण, 61(2) आपराधिक षडयंत्र के अंतर्गत।11 आरोपी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज हुआ है।

क्राइम ब्रांच एएसपी जबलपुर करेंगे पूरी जाँच

देशभर में मध्य प्रदेश पुलिस की साख को खराब करने वाले इस प्रकरण में आईजी जबलपुर प्रमोद वर्मा ने इस प्रकरण की जाँच सिवनी पुलिस से न करवाने का निर्णय लेते हुए जबलपुर क्राइम ब्रांच के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र सिंह को जाँच का जिम्मा सौंपा है।
इस कांड में अब नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पुख्ता सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस हवाला कांड के सूत्रधारों में जबलपुर में पदस्थ रहे एक सीएसपी और कटनी के चार पुलिस कर्मचारियों के भी शामिल होने की बात चर्चा में है। मामले में जबलपुर क्राइम ब्रांच के एक आरक्षक को भी संदेह के दायरे में रखते हुए जाँच में लिया गया है। हवाला कारोबार से जुड़े कुछ लोगों से भी पूछताछ की गई है। सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच के आरक्षक का मोबाइल भी पुलिस ने जाँच हेतु जप्त किया है।
इस मामले में यह भी खुलासा हुआ है कि जबलपुर के ओमती थाने में पदस्थ रहे एक सीएसपी पंकज मिश्रा जो कि इस पूरे कांड में सबसे चर्चित रही पुलिस अधिकारी पूजा पांडे के बैचमेट भी है की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है। पुलिस को अंदेशा है कि हवाले के रकम की सूचना क्राइम ब्रांच के आरक्षक को मिली, इसने उक्त सूचना को पूर्व सीएसपी पंकज मिश्रा को दिया। इसी वजह से उन्हें इस पूरे प्रकरण की जाँच कर रहे अधिकारियों ने बयान दर्ज करने के लिए भी सिवनी तलब किया था। इसके साथ ही कटनी के चार ऐसे पुलिसकर्मी जो हवाला के पैसों पर विशेष ध्यान देते हैं और इन्होंने पुलिस विभाग के नाम पर दुकान खोल रखी है इस बात का संदेह और चर्चा जब पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर जोन के कानों तक पहुँची तो उन्होंने तत्काल इन्हें प्रभाव से हटा दिया और दूसरे जिले में भेज दिया।
जबलपुर में ओमती थाने में पदस्थ रहे सीएसपी पंकज मिश्रा इस पूरे कांड में सबसे चर्चित रही सिवनी एसडीओपी पूजा पांडे के बैचमेट है। पुलिस अधिकारी पंकज मिश्रा की भूमिका इस मामले में संदिग्ध है। जबलपुर पुलिस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि जाँच अधिकारी के समक्ष यह तथ्य आए हैं कि हवाला की इस बड़ी रकम को पकडऩे की टिप पंकज मिश्रा ने अपनी साथी पूजा पांडे को दी थी। इस बात की अधिकृत पुष्टि होना बाकी है और इसी के लिए यह पुलिस अधिकारी संदेह की सूची में टॉप पर है। पंकज मिश्रा की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए पुलिस ने इस जाँच में शामिल किया है और सूत्रों के अनुसार उनके बयान भी दर्ज हो चुके हैं। निश्चित रूप से इस प्रकरण में कटनी के उन चार पुलिस कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई जा रही जिनको संदेह के दायरे में रखा है।
पुलिस महानिरीक्षक जबलपुर जोन प्रमोद वर्मा ने मामले में जाँच करने के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जबलपुर आयुष गुप्ता को जिम्मेदारी दी। अब जबलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय से जुड़े सूत्रों ने पुख्ता जानकारी दी है कि उक्त सीएसपी पंकज मिश्रा को भी इस पूरे प्रकरण में बयान दर्ज करने के लिए तलब किया गया है। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में पंकज मिश्रा बालाघाट हॉक फोर्स में पदस्थ है।
कहां गए 25 लाख- इस पूरे घटनाक्रम में एक बात निकलकर बार-बार सामने आ रही है कि हवाला राशि के 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपए में से 25 लाख रुपए की राशि कम पाई जा रही है। जिस प्रकार से हवाले के पैसे को लूटने का खेल हुआ है तो उक्त राशि को किसी का कमीशन माना जा रहा है अब यह कमीशन किसको गया है या इतनी बड़ी 25 लाख रुपए की राशि कौन डकार गया है यह भी बड़ा प्रश्न बना हुआ है।

कटनी के चार पुलिसकर्मियों को हटाया गया

सूत्रों के अनुसार हवाला कांड के बाद कटनी जिले के चार पुलिसकर्मियों को आईजी जबलपुर रेंज प्रमोद वर्मा ने जिले से बाहर तबादला कर दिया है। इनमें आरक्षक और प्रधान आरक्षक पद पर तैनात पुलिसकर्मी रविन्द्र दुबे, राजेन्द्र उइके, शिव पटेल और प्रशांत विश्वकर्मा शामिल है जिनको जिले से बाहर पदस्थ कर दिया गया है।
इनका ट्रांसफर छिंदवाड़ा, पांर्ढुना, सिवनी और नरसिंहपुर कर दिया गया है। इसके साथ ही तत्काल प्रभाव से पदभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक इन चारों पुलिसकर्मियों के सट्टा कारोबारियों और हवाला कारोबार से कनेक्शन की चर्चा सामने आ रही है। इस घटना के बाद अब कटनी में पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई से महकमे में हडक़ंप मच गया है।

इनके साथ हुई डकैती

व्यापारी सोहन परमार के ड्राइवर इरफान एवं मुख्तार को घटना दिनांक एवं समय को कटनी व सतना से नागपुर और जालना की ओर के्रटा वाहन क्रमांक एमएच 13ई के 3430 से ले जाई जा रही 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रूपए की राशि जो बण्डलों में पैक थी को इन पुलिस कर्मियों ने बलपूवर्क रोककर उनका अवैधानिक निरोध कर बलपूर्वक निर्जन सुनसान स्थान पर ले जाकर डरा धमकाकर संपूर्ण राशि 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रूपए को अपने अवैधानिक आधिपत्य में लिया गया।

इन पर हुई एफआईआर

र्जाच उपरांत 1. एसडीओपी सिवनी पूजा पाण्डेय 2. उप निरीक्षक अर्पित भैरम थाना प्रभारी बण्डोल 3. कार्यवाहक प्रधान आरक्षक 447 रविन्द्र सिंह उईके 4. कार्यवाहक प्रधान आरक्षक 203 माखन सिंह इनवाती 5. आरक्षक 803 जगदीश यादव, 6. आरक्षक 306 योगेन्द्र चौरसिया 7. एसएएफ आरक्षक 85 सुभाष सदाफल सिवनी 8. एसएएफ आर. 610 केदार सिह 9. प्रधान आरक्षक 404 राजेश जंघेला 10 आर. 582 रितेश वर्मा  एसडीओपी कार्यालय सिवनी, 11.आरक्षक क्रमांक 750 नीरज राजपूत के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 310(2), 126(2), 140(3) एवं 61(2) का अपराध प्रमाणित पाए जाने पर विवेचना में लिया गया।

जमानत का विवाद: एसपी ने किया टीआई को निलंबित, आईजी ने किया बहाल

इस पूरे प्रकरण में एक और चौंकाने वाली बात निकलकर सामने आई है। जिन हवाला कारोबारियों के खिलाफ  हंगामा खड़ा होने के बाद एफआईआर दर्ज करने की बात कही गई। उस एफआईआर को लेकर ही पूरे पुलिस महकमे में एक नया बवाल खड़ा हो गया है। समाचार पत्रों के माध्यम से भी इस बात का खुलासा हुआ है कि पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता ने लखनवाड़ा थाना प्रभारी चंद्र किशोर सिरमे को निलंबित कर दिया था इसका आदेश जारी हुआ था। लेकिन इसके कुछ घंटे बाद ही जबलपुर पुलिस महानिरीक्षक प्रमोद वर्मा ने इस आदेश को निरस्त कर दिया। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस पूरे विवाद के पीछे कारण यह था कि जब मामले का खुलासा हुआ और यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो गया तो आनन फानन में हवाला कारोबार करने वाले व्यापारियों के खिलाफ  भी प्रकरण दर्ज करने के लिए आदेश ऊपर से आ गए। जबलपुर जोन के आईजी ने सिवनी पुलिस अधीक्षक को उक्त निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने संबंधित थाना प्रभारी चंद्र किशोर को हवाला कारोबारी के खिलाफ  प्रकरण दर्ज करने के निर्देश। इसके बाद खेल शुरू हुआ जमानत देने का। हवाला कारोबारी के ऊपर उन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया जिस में थाने से जमानत प्राप्त हो सकती है। इसी आधार पर प्रकरण दर्ज हुआ और उक्त व्यापारियों को थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया। सूत्रों के अनुसार आईजी प्रमोद वर्मा तक जब यह बात पहुँची तो उन्होंने सिवनी के पुलिस अधीक्षक से पूछा कि आरोपियों को जेल भेजा कि नहीं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि थाना प्रभारी ने अपने स्तर पर प्रकरण दर्ज कर उन्हें थाने से जमानत देकर भेज दिया है। इसके बाद आईजी की नाराजगी पर थाना प्रभारी के खिलाफ  निलंबन का आदेश जारी हुआ। निलंबन का आदेश जारी होने के बाद थाना प्रभारी ने सीधे अपने वरिष्ठतम अधिकारी जबलपुर जोन के आईजी से संपर्क किया और उन्हें पूरी जानकारी देते हुए बताया कि उक्त जमानत का कार्य पुलिस अधीक्षक के कहने के अनुसार किया गया था। इसके बाद आईजी ने पुलिस अधीक्षक के थाना प्रभारी को निलंबित करने के आदेश को निरस्त कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में सिवनी पुलिस अधीक्षक और आईजी के बीच में तकरार नजर आई। अब जमानत का यह खेल किसके कहने पर हुआ है यह भी जांच का विषय है।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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