
नई दिल्ली। देश में बढ़ती लागत और अनियमितताओं की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत चल रही बड़ी परियोजनाओं पर सख्ती बढ़ा दी है। अब 100 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली सभी परियोजनाओं की गहन जांच की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार राज्यों को फंड जारी करने से पहले इन परियोजनाओं की लागत और कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी। इस कदम का उद्देश्य लागत में हो रही वृद्धि को रोकना और योजनाओं को अधिक पारदर्शी बनाना है। जल जीवन मिशन का लक्ष्य देश के हर ग्रामीण घर तक प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कम से कम 55 लीटर स्वच्छ पेयजल नल के माध्यम से उपलब्ध कराना है। पहले इस योजना को 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य था, जिसे अब बढ़ाकर 2028 कर दिया गया है। केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 100 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं और शहरी/सेक्टोरल जल मांग से जुड़ी योजनाओं की जांच द्वारा की जाएगी, जो आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है। सरकार ने राज्यों को यह भी बताया है कि रेट्रोफिटिंग (पुरानी योजनाओं के सुधार) के लिए केंद्र से कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी। ऐसे खर्च राज्य सरकारों को अपने संसाधनों से वहन करने होंगे। केंद्र ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत फंड जारी करने के लिए चार अनिवार्य शर्तें भी तय की हैं। राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा समझौता पर हस्ताक्षर के साथ ‘सुजल गांव’आईडी बनाकर सभी ग्रामीण जल योजनाओं की डिजिटल मैपिंग को जरूरी कर दिया गया है। समय पर वित्तीय मिलान संचालन एवं रखरखाव के लिए भी नीति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। हाल ही में केंद्रीय कैबिनेट ने इस योजना के विस्तार को मंजूरी देते हुए 2028 तक इसके लिए अतिरिक्त 1.51 लाख करोड़ के बजट का प्रावधान किया है। इसके साथ ही योजना का कुल बजट अब 8.70 लाख करोड़ हो गया है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 3.59 लाख करोड़ है। अब तक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात सहित आठ राज्यों ने इस योजना के तहत केंद्र के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। सरकार का यह कदम जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाने और लागत पर नियंत्रण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना रहा है।
कांग्रेस नेता ने नर्मदा से खुलेआम रेत चोरी का किया लाइव प्रसारण, कहाँ है जिले का खनिज विभाग
Author: Jai Lok







