
जबलपुर (जयलोक)। आर्यव्रत संस्कृत संस्थान द्वारा शहीद स्मारक प्रेक्षागृह में गत सायं नाटक ‘स्वांगी’ का सफल मंचन किया गया। प्रख्यात कथाकार विजयदान देथा की प्रसिद्ध कहानी ‘रिजक की मर्यादा’ पर आधारित इस संगीतमय लोकनाट्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
यह प्रस्तुति शंकर भांड नामक एक बहरूपिये की कथा है, जो अपनी जीविका के लिए विविध स्वांग रचता है। उसकी कला में ऐसा जीवंत यथार्थ है कि लोग अभिनय और सत्य के बीच की रेखा भूल जाते हैं। धीरे-धीरे उसकी ख्याति फैलती है और उसे राजदरबार में प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया जाता है। वहाँ उसे ‘डायन’ का स्वांग रचने को बाध्य किया जाता है, परंतु सत्ता की हठधर्मिता और उसके भयावह परिणामों से बेखबर शासक के आगे कलाकार की हर विनती अनसुनी रह जाती है।

अंतत: अपनी कला की मर्यादा और प्राणों के संकट के बीच फँसा कलाकार एक ऐसी विवशता को जीता है, जो दर्शकों को झकझोर देती है। संगीत, व्यंग्य और गहन संवेदना के माध्यम से यह नाटक सत्ता और जनसाधारण के संघर्ष को तो दर्शाता ही है, साथ ही यह कला की नैतिक जिम्मेदारी और अभिनय को ‘सत्य’ तक पहुँचने का निमित्त बनाने के संघर्ष को भी रेखांकित करता है।निर्देशक आदेश सिंह के कुशल निर्देशन में कलाकारों- काव्यकांत खरे, देवांश त्रिवेदी, आशीष राजक, शिवांगी सिंह, शिखर श्रीवास, निखिल पटेल, अन्मोल द्विवेदी, मोहित शर्मा, अनुश्री धानुक, भौमिक नामदेव, जय साहू, देवांश शुक्ला और कुशल प्रणामी ने अपने सधे हुए अभिनय से कला समीक्षकों को प्रभावित किया।नाटक का विशेष आकर्षण इसका सजीव संगीत रहा, जिसमें सार्थक यादव, वंशिका चौकसे, वैशाली कनौजिया, राशि, रजनीश और नीरज ने अपनी प्रस्तुति से नाटक को जीवंत कर दिया। अचल सिंह द्वारा नाट्य रूपांतरण, हर्षित झा की प्रकाश व्यवस्था, शिवांगी सिंह का वस्त्र विन्यास, महेश पटेल की मंच सज्जा एवं रजनीश यादव की मंच परिकल्पना ने प्रस्तुति को पूर्णता प्रदान की।

मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी एवं फिल्म अभिनेता श्री पदम सिंह ने प्रस्तुति की सराहना करते हुए इसे रंगमंच की परंपरा को समृद्ध करने वाली कड़ी बताया।

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Author: Jai Lok






