
कंक्रीट के जंगल के लिए कितने पेड़ों की अनुमति थी और कितने काट डाले
@परितोष वर्मा, जबलपुर (जय लोक)। शहर में विगत दिवस घटित हुई एक घटना ने पर्यावरण के प्रति प्रशासन के दोहरे मापदंड को प्रदर्शित किया है। कुछ विशेष को लोगों को लाभ पहुंचाने की नियत से 300 सालों से अधिक समय से प्राण वायु देने का काम करने वाले वृक्ष के रूप में स्थापित एक जीवित इकाई की केवल इसलिए हत्या कर दी गई क्योंकि वह कंक्रीट का जंगल खड़ा करने के लिए आड़े आ रहा था । कैंट विधानसभा के अंतर्गत आने वाले मरियम चौक के पास इन पेड़ों की हत्या और इसके जैसे अन्य पेड़ों की हत्या करने की अनुमति आखिर किस पैमाने पर दी गई। एक ओर तो देश के प्रधानमंत्री पूरे देश में एक पेड़ मां के नाम का वृहद अभियान चला रहे। जिले में लाखों पेड़ लगाने के लिए प्रशासन और शासन जी जान से जुटा हुआ। फिर आखिर ऐसी क्या मजबूरी हो गई थी जो 300 साल पुराने इन वृक्षों की जान लेनी पड़ी।
यह दोहरा मापदंड आखिर किसके लिए अपनाया गया। किसको उपकृत करने के लिए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पेड़ माँ के नाम अभियान को झटका दे दिया गया।
अगर यहां निर्माण कार्य किसी बिल्डिंग बनाने वाले बिल्डर के प्रोजेक्ट का हिस्सा था तो भी इन 300-400 साल पुरानी जीवन देने वाली जीवित इकाइयों की हत्या करने की क्या जरूरत थी। इन वृक्षों ने 300-400 साल पहले पौधे के रूप में जन्म लिया था और हमारी कई पीढिय़ां को छांव दी, प्राणवायु के रूप में ऑक्सीजन दी और मानव जीवन पर एहसान किया। लेकिन हमने इस एहसान का बदला उनकी हत्या करके चुका दिया। तर्क यह भी दिया जा सकता है कि इसके बदले में 200 पेड़ लगाए जाएंगे लेकिन वह 200 पौधे कब पेड़ बनेंगे, बनेंगे भी या नहीं इसकी जवाबदारी कोई नहीं लेगा। बनेंगे भी तो उनको 200 साल इस स्थिति में आने में लगेंगे तब तक उनका लाभ लेने के लिए ना तो हम रहेंगे और ना ही हमारी पीढिय़ां रहेंगीं। लेकिन वर्तमान की लालच में हम उनकी हत्या कर प्रकृति के दोषी तो बन ही गए हैं। यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर जमकर गर्माया हुआ है। नो न्यूज ऑनली व्यूज चैनल ने भी मौके पर जाकर इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्टिंग की है।
जबलपुर के सिविल लाइन इलाके में माता मरियम चौराहे के पास एक सरकारी भूमि जो कि राज्य परिवहन निगम की थी को कुछ समय पहले नीलाम किया गया। शहर के रसूखदार और प्रभावी लोगों ने नीलामी में जमीन को खरीद लिया। बहुत से लोग इसमें पार्टनर बन गये। बड़े-बड़े नाम इस जमीन के साथ जुड़ गए। यहां तक सब सकारात्मक था क्योंकि आशा थी कि अच्छा प्रोजेक्ट मिलेगा। लेकिन इसके विपरीत यहां पर 200-300 सालों से जीवित इकाइयों के रूप में मानव जीवन को जीवन दान देने में अपनी भूमिका निभाने वाले 6 पेड़ों की प्रशासनिक अनुमति प्राप्त कर हत्या कर दी गई। लोगों का दावा है कि सिर्फ 6 वृक्षों को ही नहीं काटा गया बल्कि इसकी आड़ में 14 से 15 वयोवृद्ध जीवित इकाइयों की निर्मम हत्या कर दी गई।
किसी नेता को नजर नहीं आया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर बात को बढ़-चढक़र जन सामान्य तक पहुंचाने वाले भाजपा के नेताओं को उनके अभियान के खिलाफ किया जा रहा यह कृत्य ना जाने नजर क्यों नहीं आया। यहां तक की प्रधानमंत्री से लेकर पार्षद तक का विरोध करने वाले विपक्ष में बैठे कांग्रेस के पार्षद और नेताओं को भी इन वयोवृद्ध पेड़ों की हत्या नजर नहीं आई। सूत्रों के अनुसार यहां पर पॉश कॉलोनी का निर्माण करने की प्रस्तावना है। यह पूरा पॉश इलाका है तो स्वाभाविक बात है कॉलोनी भी यहां पर पॉश ही बनेगी। अब इन पॉश कॉलोनी के बीच में 300 से 400 साल पुराने वृक्ष शायद कलंक और धब्बे जैसे नजर आते इसलिए इनकी हत्या कर दी गई। बचे हुए पेड़ों को बचाने के लिए पर्यावरण प्रेमियों ने आवाज बुलंद तो की है अब यह प्रशासन के कानों तक कितना असर पहुँचाती है यह आने वाले सप्ताह में ही पता चल जाएगा। वयोवृद्ध पेड़ों के कातिलों पर कार्रवाही होगी या बचे खुचे पेड़ों का भी कत्ल होगा।
बिना अनुमति के काट दिए पीपल और बरगद -उद्यान अधिकारी
बड़ी बात तो यह है कि नगर निगम के उद्यान अधिकारी आदित्य शुक्ला ने इस बात से इंकार किया है कि पीपल और बरगद के पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी गई थी। उसके बावजूद भी इन पेड़ों का कत्लेआम कर दिया गया। उद्यान अधिकारी ने कहा कि 20 पेड़ काटने की अनुमति मांगी गई थी हमने केवल 6 पेड़ काटने की अनुमति दी। उनमें भी बिही, छोटा आम और जंगली पेड़ पौंधे की अनुमति दी गई थी। लेकिन मौके दो सौ साल पुराने पीपल और बरगद के पेड़ों की भी हत्या कर दी गई। अब उद्यान अधिकारी आदित्य शुक्ला जाँच करवाकर कार्रवाही करने की बात कर रहे हैं। जबकि मौके पर पीपल और बरगद के कटे हुए अवशेष खुद ही उनकी हत्या की गवाही दे रहे हैं।
कौन है ये तौफीक रजा
मौके पर पहुँचे पत्रकारों को पेड़ काट रहे एक व्यक्ति ने अपना नाम तौफीक रजा बताया और कहा कि उसे नगर निगम की ओर से पेड़ काटने की अनुमति प्राप्त है। लेकिन पूछे जाने पर वह अनुमति के संबंध में कोई अधिकृत और विस्तृत जानकारी नहीं दे पाया। इस बात को लेकर उद्यान अधिकारी ने कहा कि ऐसे किसी भी तौफीक रजा नाम के व्यक्ति को किसी भी प्रकार की कोई अनुमति नहीं दी गई है, तो फिर किसके इशारे पर बरगद और पीपल जैसे 200-300 साल पुराने पेड़ों की हत्या कर दी गई।

Author: Jai Lok







