
जबलपुर (जय लोक)। 50 करोड़ की संपत्ति हड़पने के मामले में पुलिस द्वारा आरोपी बनाए गए डॉक्टर दंपत्ति सुमित जैन और प्राची जैन की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। फिलहाल ये एफआईआर के बाद फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ धारा 316(4), 3/5 बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर दोनों की तलाश शुरू कर दी है। वहीं जिस रजिस्ट्रार या सब रजिस्ट्रार ने इनके दान पत्र को पंजीकृत किया हैं उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जा सकती है। उस पर लगातार उंगलियाँ उठ रही हैं, क्योंकि बड़ी संपत्ति विशेष करके जो खून के रिश्ते में ना हो उसके दानपत्र या गिफ्ट डीड के समय रजिस्ट्रार को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

सामान्य रूप से तो परिवार में प्रमाण पत्र या गिफ्ट डीड बनाने वाले इसकी रजिस्ट्री के लिए चप्पल घिस देते हैं और रो देते हैं लेकिन यहां पर 50 करोड़ की संपत्ति के हिस्से का दान पत्र इतनी आसानी से कैसे हो गया? यह जांच का विषय है। आरोपी दंपत्ति ने डॉक्टर हेमलता द्वारा दी गई भूमि के मामले में फर्जी तरीके से मनमाने तरीके से दानपत्र की शर्तों को अपने अनुसार दर्ज कराया। मामला सामने आने के बाद दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।बताया जा रहा है कि जैसे ही इस मामले में डॉक्टर दंपत्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई तभी दोनों फरार हो गये।

पुलिस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाही कर रही है। वहीं ई-पंजीयन कार्यालय से भी इस मामले में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। जिसमें एक वरिष्ठ उप पंजीयक ने उनके दस्तावेज पंजीकृत किए हैं वो भी जाँच के दायरे में नजर आ रहा है। बिना जाँच के पहले दानपत्र रजिस्टर किया गया फिर वसीयत की भी रजिस्ट्री कर दी गई। जिस दौरान रजिस्ट्री की गई उस समय डॉक्टर हेमलता की हालत गंभीर थी। एम्बुलेंस में बैठाकर डॉक्टर हेमलता को कलेक्टर कार्यालय में स्थित रजिस्ट्री कार्यालय लाया गया था। उन्हें रजिस्ट्री कार्यालय में स्टे्रचर से सीढिय़ों पर चढ़ाया गया लेकिन यह बस देखने के बाद भी रजिस्ट्रार ने इन सब बातों को अनदेखा किया।

डॉक्टर हेमलता का अनफिट सर्टिफिकेट भी उनके पास ही था। अनफिट होने पर दानपत्र की रजिस्ट्री नहीं होना चाहिए थी। सब रजिस्टार ने उक्त भूमि जिसकी रजिस्ट्री की गई है उसके बारे में जानकारी भी हासिल करने की जरूरत नहीं समझी।शहर की जानी-मानी बुजुर्ग महिला डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के पति और इकलौते बेटे की मौत के बाद उनकी बेशकीमती जमीन को धोखाधड़ी से अपने नाम कराने के मामले में आरोपी दंत चिकित्सक दंपत्ति, डॉ. सुमित जैन और डॉ. प्राची जैन, फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। मदन महल थाना पुलिस ने इनके खिलाफ जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर लिया है और उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
50 करोड़ की जमीन पर कब्जा
जाँच में सामने आया है कि आरोपियों ने डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की लगभग 25 हजार वर्ग फीट जमीन, जिसकी बाजार दर 50 करोड़ रुपये से अधिक है, उसे धोखे से हड़पने की साजिश रची थी। 12 फरवरी को कथित तौर पर दो अलग-अलग दान पत्र तैयार करवाए गए, जिसके माध्यम से करीब 11 हजार वर्ग फीट जमीन सुमित जैन और उसकी पत्नी प्राची जैन के नाम कर दी गई। प्रशासन की जांच में इन दस्तावेजों को संदिग्ध पाया गया है।
डॉ. हेमलाता का वीडियो स्पष्ट था
डॉ. हेमलता श्रीवास्तव ने मृत्यु से पहले अस्पताल से एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया था कि डॉ. सुमित जैन और उनकी पत्नी ने उन्हें डरा-धमकार और धोखे में रखकर उनकी संपत्ति के कागजों पर हस्ताक्षर करवाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उन्होंने कभी अपनी स्वेच्छा से जमीन दान नहीं की। इस बयान के बाद जिला प्रशासन और पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और एसडीएम की जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई।वहीं इस मामले से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मदन महल पुलिस ने भी प्रारंभिक तौर पर डॉक्टर हेमलता श्रीवास्तव के पहले बयान आने के बाद लापरवाही की और उसे बयान को दबाने का प्रयास किया गया। इस पूरे घटनाक्रम को भी जाँच में शामिल करने की माँग हो रही है।
Author: Jai Lok






