
जबलपुर (जयलोक)। विगत दिवस माढ़ोताल थाना क्षेत्र में पदस्थ तीन पुलिस कर्मचारियों के ऊपर एक महिला ने बेहद ही गंभीर आरोप लगाया है कि उन्होंने जबरदस्ती उसके साथ बलात्कार किया है। इस बात की शिकायत महिला ने नई शुरू हुई पुलिस सेवा डायल 112, महिला हेल्पलाइन भोपाल सहित संबंधित माढ़ोताल थाने में भी की। लेकिन टीआई नीलेश दोहरे ने उक्त महिला को मानसिक विक्षिप्त बता दिया। इतनी तो सामान्य महिलाओं को भी जानकारी नहीं होती कि उन्हें हाल ही में शुरू हुई डायल 112 में खबर करना है, महिला हेल्पलाइन में अपने अधिकार के लिए अपने शोषण के खिलाफ शिकायत करना है और थाने जाकर अपना बयान दर्ज करना है।

अब यह तो थाना प्रभारी की परिभाषा ही जाने की उनकी नजर में मानसिक विक्षिप्त क्या होता है। या तो अपने थाने की साख और अपने अधीनस्थों की करतूत को बचाने के लिए यह सबसे आसान तरीका है कि जो गंभीर आरोप लगाए तो उसे मानसिक विक्षिप्त बता दिया जाए।
यह आरोप इतना गंभीर है कि इसकी जाँच बहुत बारीकी से होनी चाहिए थी भले ही मानसिक रूप से महिला विक्षिप्त हो अगर उसके साथ बलात्कार जैसी घटना हुई है और वह यह आरोप खुलेआम तीन पुलिस कर्मियों पर लगा रही है जो अपने आप में रक्षकों के भक्षक बनने का यह मामला काफी गंभीर है।
महिला हितों के लिए सजग रहने का दावा करने वाली भाजपा सरकार के शासनकाल में अगर इस प्रकार से पुलिसकर्मियों द्वारा इतने गंभीर आरोपों को केवल टरकाने के हिसाब से दरकिनार किया जाएगा तो फिर महिलाओं की सुरक्षा और उनके प्रति सजगता से सुनवाई के दावे हवा में उड़ते नजऱ आएंगे ही।
सूत्रों के अनुसार नरसिंहपुर की रहने वाली महिला जो कि अपने गुमशुदा पति की तलाश के उद्देश्य से जबलपुर स्थित दीनदयाल बस स्टैंड पर पहुंची थी और यहां पर ही दो दिन से रेन बसेरा में रुकी थी। महिला ने रैन बसेरा में बाकायदा नाम पते की एंट्री की थी और सामान्य लोगों की तरह यहां रह रही थी। इस बात की पुष्टि रेन बसेरा के कर्मचारी और वहां तैनात गार्ड ने भी की है। अब थाना प्रभारी नीलेश दोहरे इसके विपरीत राग अलाप रहे हैं कि महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त थी और वह आने जाने वाले लोगों पर पत्थर फेंक रही थी।

लेकिन इससे संबंधित एक भी शिकायत या घटना किसी भी कैमरे में रिकॉर्ड नहीं हुई है। बड़ी बात तो यह है कि अगर यह मान भी लिया जाए की महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त थी तो भी उसके साथ बलात्कार होना जायज कैसे माना जा सकता है। क्या मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला अपने साथ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सकती? क्या थाना अधिकारी को उसे गंभीरता से नहीं लेना चाहिए था?
थाना प्रभारी दोहरे का कहना है कि उन्होंने इस बात पर जांच करने के लिए कंट्रोल रूम में पदस्थ एसआई सरस्वती को महिला के पास भेजा था। पीडि़त महिला ने अपने बयान भी थाने में दर्ज कराए थे इसके बाद उक्त महिला एस आई महिला को जीप में बैठ कर वापस दीनदयाल बस स्टैंड पहुंची और रेन बसेरा में उसे छोड़ा साथ ही महिला को सुबह पुन: थाने आने के लिए कहा था। लेकिन रात भर में न जाने क्या हुआ जिन पर आरोप थे उन्होंने क्या दबाव बनाया या माढ़ोताल पुलिस ने अपनी इज्जत बचाने के लिए ऐसा क्या किया कि महिला ने सुबह थाने जाने के पहले ही रेन बसेरा खाली कर दिया और बाकायदा वहां बैठे मैनेजर को सूचना देकर चली गई।

महिला की एमएलसी दो प्रकार की, दूसरी में आई शराब पीने की बात
इस मामले में सबसे बड़ी बात निकलकर सामने आई है कि उक्त शिकायतकर्ता महिला की दो बार एमएलसी करवाई गई। आखिर दूसरी बार एमएलसी करवाने की जरूरत क्यों पड़ी। जब पहली बार जिला अस्पताल के जिम्मेदार डॉक्टर के द्वारा महिला की जांच कर यह बता दिया गया था कि उसके खून में अल्कोहल (शराब) नहीं मिला है। लेकिन शायद यह रिपोर्ट थाना प्रभारी दोहरे के मनमाफिक नहीं थी, इसलिए फिर मशीन से दोबारा एमएलसी कराई गई और उसमें अल्कोहल (शराब) पाए जाने की बात का उल्लेख किया गया या करवाया गया।
सामूहिक बलात्कार के आरोप की पुष्टि के लिए क्यों नहीं कराया गया शारीरिक परीक्षण, मामला रफा दफा करने का प्रयास
यह कहावत बहुत पुरानी है कि पुलिस किसी को फंसाना चाहे तो उसे कोई बचा नहीं सकता और पुलिस किसी को बचाना चाहे तो उसे कोई फंसा नहीं सकता और फिर बात अगर अपने खास महकमें के जुड़े लोगों की हो तो फिर कुछ भी किया जाना संभव है। महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त थी कि नहीं यह बात प्रमाणित नहीं है इस संबंध में भी थाना प्रभारी दोहरे ने किसी भी प्रकार के डॉक्टरी परीक्षण करवाने से इनकार किया है। सिर्फ मौखिक रूप से थाना प्रभारी ने यह दावा ठोक दिया है कि वह मानसिक विक्षिप्त महिला थी।
सबसे बड़ी लापरवाही तो पुलिस द्वारा यह की गई कि जब महिला द्वारा सामूहिक रूप से बलात्कार किए जाने का गंभीर आरोप पुलिस कर्मचारियों के ऊपर लगाया गया तो बलात्कार के आरोप की पुष्टि करने के लिए पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं करवाया। क्या यह सबूत मिटाने और मामले को रफा दफा करने वाली हरकत नहीं है?
डायल 112 और महिला हेल्थ टैक्स भोपाल में भी की शिकायत, वहाँ से भी आया थाने में फोन
थाने पहुंची महिला ने जिन पुलिस वालों के आरोप लगाए है वो पूरी तरीके से उनका हुलिया बता रही थी। किस प्रकार से उसका हाथ खींच कर ऑटो में बैठाया गया। उसके साथ दो-तीन लोग और मौजूद थे। जानकारी हाल ही में शुरू हुई डायल 112 में भी दी गई थी और भोपाल की महिला हेल्प डेस्क में भी दी गई थी। अब इन दोनों ही कॉल सेंटरों से थाने में फोन करके कार्यवाही करने की सूचना भी दी गई थी। अब यह समझ से परे है कि मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला कैसे यह कर सकती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों को भी रखा गया अंधेरे में
पुलिस कर्मचारियों के ऊपर लगे इतने गंभीर आरोपों के बाद रात भर सिर्फ इस मामले को दबाने और रफा दफा करने में मेहनत की गई। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के संज्ञान में भी इस मामले नहीं लाया गया।
Author: Jai Lok







