
म प्र से पहले बिहार में कलेक्टर रह चुके हैं राघवेंद्र सिंह
परितोष वर्मा
जबलपुर (जयलोक)। जबलपुर जिले के नए कलेक्टर का पदभार राघवेंद्र सिंह संभालेंगे। वे 2013 बैच के चयनित आईएएस अधिकारी हैं। मध्य प्रदेश काडर के पहले वो बिहार राज्य काडर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। बिहार राज्य में सबसे पहली पोस्टिंग इनकी मोतिहारी में प्रोबेशन ऑफीसर के रूप में थी उसके बाद इन्होंने भागलपुर जिले में एसडीएम के बतौर अपनी सेवाएं दीं। पहले जिला कलेक्टर के रूप में बक्सर जिले में पदस्थ हुए। उन्होंने इसके बाद अतिरिक्त कमिश्नर एडिशनल टैक्स के रूप गया जिले में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद कलेक्टर अलीराजपुर के रूप में सेवाएं दीं। शादी के बाद इनका काडर बदला और ये मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले के कलेक्टर के रूप में पदस्थ हुए। उनकी धर्मपत्नी भी आईएएस अधिकारी हैं।
सरस्वती शिशु मंदिर से जेएनयू तक का सफर
राघवेंद्र सिंह की प्रारंभिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के समीप स्थित महाराज गंज जिले के एक सामान्य सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल से प्रारंभ हुई। हिंदी मीडियम के छात्र रहे राघवेंद्र प्रारंभ से ही पढ़ाई में रुचि रखते थे। स्नातक की पढ़ाई उन्होंने गोरखपुर में स्थित डीएवी डिग्री कॉलेज से की। बीएससी फिजिक्स में उन्होंने डिग्री हासिल की। अपनी पढ़ाई के दौरान वे जिले स्तर पर टॉपर भी रहे हैं। इसके बाद उन्होंने यह निर्णय किया कि आगे जाकर दिल्ली में पढ़ाई करना है और उनका लक्ष्य जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय जेएनयू में दाखिला हासिल करना था। यहां पर वे अपने रुचि के विषय पॉलीटिकल साइंस में आगे की पढ़ाई करना चाहते थे। साइंस से स्नातक करने के बाद उन्होंने जब यह बदलाव का निर्णय लिया तो इसके लिए उन्हें अपने पिता को मनाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी लेकिन अन्तत: उनकी रुचि और लगन को देखकर उन्हें पारिवारिक अनुमति प्राप्त हुई। इसके पश्चात उन्होंने जेएनयू से पहले एम ए पॉलीटिकल साइंस की डिग्री हासिल की उसके बाद पोस्ट ग्रैजुएट डिग्री भी यहीं से हासिल करते हुए पॉलिटिकल साइंस में एम फिल की डिग्री भी हासिल की। जेएनयू में गुजरे वर्षों को वह अपने जीवन के सबसे अधिक अनुभव और विभिन्न प्रकार के तजुर्बे के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं ।
पुलिस एकेडमी से निकलकर ट्रेनिंग लेने पहुँचे मसूरी
यह बात बहुत ही कम लोगों को पता होगी कि राघवेंद्र सिंह जब दिल्ली में जेएनयू में रहकर सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे थे उस दौरान उन्होंने 2012 के प्रथम प्रयास में भारतीय पुलिस सेवा में अपना स्थान बना लिया था। इस दौरान नेशनल पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए ट्रेनिंग लेने भी चले गए थे। 2013 में दिए गए उनके अगले परीक्षा के परिणाम आने पर पुलिस अकादमी में ट्रेनिंग प्राप्त करते हुए ही उन्हें यह जानकारी मिली थी कि उनका चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए हो चुका है। इसके बाद सितंबर 2013 से वह मसूरी में भारतीय प्रशासनिक सेवा प्रशिक्षण केंद्र में ट्रेनिंग लेने के लिए चले गए।
लोगों की सेवा करने का सबसे अच्छा माध्यम
आईएएस राघवेंद्र सिंह का मानना है कि सिविल सर्विस देश की सबसे उन्नत सेवाओं के साथ-साथ आम नागरिकों और जमीनी स्तर पर कार्य कर लोगों को सेवा प्रदान करने का सबसे अच्छा जरिया है।
रीड मी क्लासेस, ऑपरेशन स्माइल, सुखद अनुभूति वाले प्रकल्प
आईएएस राघवेंद्र सिंह 12 सालों के अपने अनुभव के बारे में कहते हैं कि उन्हें अपने सेवा काल के दौरान भी सामने आई चुनौतियों से सीख लेने का अवसर मिला है। बिहार के कुछ जिलों में जब वे पदस्थ थे तो वहां बाढ़ का बहुत कहर था। बिहार के नवगछिया जिले में एसडीएम के रूप में जब वे तैनात थे तो दो महीने बाढ़ का पानी सरकारी कार्यालय में भी भरा हुआ था। शहर में भी पानी भरा हुआ था । उस दौरान त्राहिमाम संदेश जारी हुआ था जिसके बाद जनजीवन को सामान्य करने में लंबा समय लगा था। इस कार्यकाल में उनका अनुभव रहा है कि प्राकृतिक आपदा के समय सामान्य और धैर्यवान लोग भी मानसिक रूप से प्रभावित होते हैं और उनका धैर्य भी खोने लगता है और ऐसी स्थिति में इस बात को बनाए रखना बड़ी चुनौती होता है। इसके बाद वे नेपाल सीमा के पास स्थित मधुबनी जिले में पदस्थ हुए यहां उन्होंने पाया कि शिक्षा का अभाव है बच्चों की स्कूल जाने में रुचि नहीं है शिक्षकों की काफी कमी है। तब उन्होंने यहां पर रीड मी क्लास का नवाचार करते हुए उन्होंने तीन चार विद्यालय के बच्चे और अधिकारियों के साथ ही इच्छुक शिक्षकों से संपर्क साधकर उन्हें एकत्रित किया और बड़े विद्यालय में एक साथ विज्ञान ,अंग्रेजी, गणित की विशेष कक्षाएं लगाई जिसके सकारात्मक परिणाम आये बच्चों में स्कूलों के प्रति रुचि बढ़ी और शिक्षकों में भी उत्साह जगा और शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी हुई।
एक भुट्टे के कारण सैकड़ों बुजुर्गों को वापस मिली मुस्कान
उनके कार्यकाल का एक अहम पड़ाव अलीराजपुर जिले में उनकी पदस्थापना के दौरान नजर आया जब इन्होंने मदद की दृष्टि से दूर रहने वाले बुजुर्गों के ऊपर अपना ध्यान केंद्रित किया और पाया कि जिले के कई ऐसे बुजुर्ग हैं जो विभिन्न प्रकार के अभाव में अपने दांत खो चुके हैं और खाने-पीने की चीजों के लिए मोहताज रहते हैं। स्वास्थ्य विभाग की मदद से पूरे जिले में सर्वे हुआ और लगभग डेढ़ सौ ऐसे लोग चिन्हित हुए इन बुजुर्गों को डेंचर लगवाने का काम जन सहयोग और रोगी कल्याण समिति के माध्यम से किया गया जिसके कारण सैकड़ों लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौटी। इस अभियान का नाम ऑपरेशन स्माइल दिया गया। इसके पीछे वाक्या यह था कि जब वह दौरे पर निकले थे और ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यक्ति के घर पहुँचे जो बुजुर्ग थे तो उन्होंने मेहमान नवाजी के दौरान अधिकारी के समक्ष भुट्टे की पेशकश की और जब उन्होंने पूछा कि दादा आप नहीं खाएंगे तो उन्होंने कहा कि हमारे दांत नहीं हैं खाना चाहते हैं तो भी नहीं खा सकते। यह बात उन्हें मन तक छू गई। इसके बाद उन्होंने अपनी आगरा मालवा की पदस्थापना के दौरान भी ऑपरेशन स्माइल का क्रियान्वयन करवाया। जिसमें विशेष रूप से बुजुर्गों पर ध्यान केंद्रित किया था। नेत्र ज्योति अभियान के तहत मोतियाबिंद से पीडि़त बुजुर्गों का सर्वे करवरकर उनका उपचार करवाना भी राघवेंद्र सिंह के प्रकल्पों में शामिल था। उनका मानना है कि बिहार और मध्यप्रदेश दोनों प्रदेशों की भौगोलिक स्थिति व समस्याएं अलग हैं और चुनौतियां कार्य का आनंद देती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राघवेंद्र सिंह कहते हैं कि बिहार में सेवाएं देने के बाद और मध्य प्रदेश में सेवाएं देने के बाद दोनों प्रदेशों की भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक आपदाओं की परिस्थितियां अलग हैं। मध्य प्रदेश बेहतर और स्टेबल स्टेट है। यहां खेती अच्छी होती है पानी की मात्रा अधिक है। यह दोनों कार्य क्षेत्र अलग हैं दोनों की चुनौतियां अलग हैं इसलिए कार्य करने में आनंद आता है लोगों को राहत पहुँचाना प्राथमिकता में शामिल है।
7 साल की मेहनत में तैयार हुआ नावेल ‘615 पूर्वांचल हॉस्टल’
2013 में आईएएस में चयनित होने के बाद उन्हें बिहार काडर मिला। यहां उन्होंने विभिन्न जिलों में अपनी सेवाएं दी। जब वे नवगछिया में एसडीएम के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे। उसी दौरान वहां बाढ़ का प्रकोप आया। 2016 में उन्होंने अपनी इस किताब पर काम करना शुरू कर दिया था। लेकिन शासकीय आवास में भी बाढ़ का पानी घुस जाने से उनकी वह मेहनत व्यर्थ हो गई। उन्होंने पुन: अपनी स्मृतियों को संजोते हुए अपने इस नॉवेल को पूरा करने का संकल्प लिया और वर्ष 2016 से प्रारंभ हुआ यह कार्य 2023 में पूरा हुआ। इस नावेल को शीर्षक दिया गया 615 पूर्वांचल हॉस्टल।
तीन जिलों के रह चुके हैं कलेक्टर
राघवेंद्र सिंह भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने के बाद अपने प्रोबेशन पीरियड की तैनाती पूरा करने के बाद बक्सर के कलेक्टर बने ,अलीराजपुर में भी उन्होंने जिला अधिकारी का कार्यभार संभाला। 2020 में शादी के आधार पर उनका कैडर बदला और वह मध्य प्रदेश के आगर मालवा में कलेक्टर के रूप में पदस्थ हुए। अब उनकी वर्तमान पद स्थापना जबलपुर कलेक्टर के रूप में हुई है। यह उनका चौथा जिला है। कलेक्टर रहते हुये राघवेंद्र सिंह को दो बार बेस्ट इलेक्ट्रल प्रैक्टिस अवार्ड मिल चुका है।
Author: Jai Lok







