
बलिदान दिवस के आयोजन में शामिल हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
जबलपुर (जयलोक)। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज राजा शंकर शाह तथा कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने पिता पुत्र की प्रतिमा स्थल पर पहुँचकर माल्यार्पण किया और उनके बलिदान को याद किया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती चिकित्सालय में स्वच्छता अभियान में श्रमदान भी किया। उन्होंने राजा शंकर शाह तथा कुंवर रघुनाथ शाह के संग्रहालय का भ्रमण भी किया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री डॉ. यादव घण्टाघर के समीप स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस इनफॉरमेशन सेंटर में राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस दौरान हवन किया और इसके साथ ही मौके पर एक हजार रूपए की न्यौछावर की। उनके साथ लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे सहित विधायक मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को नगर प्रवास के दौरान आयोजन स्थल पर आदिवासी परंपराओं के तहत सिर पर फूलों का मुकुट पहनाया गया। उन्होंने राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के म्यूजियम के अवलोकन के बाद बलिदानियों पर बनाई गई डाक्यूमेंट्री फिल्म देखी।

1857 की क्रांति के महानायक
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1857 की क्रांति को इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि कैसे अंग्रेजों की क्रूर हुकूमत के खिलाफ शंकर शाह और उनके पुत्र रघुनाथ शाह ने आवाज बुलंद की थी। उन्होंने कहा जब इन वीरों को तोपों से उड़ाने की धमकी दी गई, तब भी उनका साहस और देश के प्रति समर्पण जरा भी कम नहीं हुआ। वे निर्भिक होकर खड़े रहे और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि उस मुश्किल दौर में राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह ने जो कविताएं लिखी थीं, वे आज भी हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की भावना को जगाती हैं। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान और उनकी वीर गाथाएं न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा का स्त्रोत हैं।

नहीं भुलाया जा सकता बलिदान
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास में इन महान शहीदों का नाम हमेशा अमर रहेगा। उनकी शहादत हमें यह सिखाती है कि देश की आज़ादी और संप्रभुता के लिए हम किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन शहीदों के सम्मान में कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी ताकि आने वाली पीढिय़ां भी उनके बलिदान से प्रेरणा ले सकें। यह कार्यक्रम शहीदों को श्रद्धांजलि देने और उनके योगदान को जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रयास था।

रानी दुर्गावती को किया याद
इस दौरान मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के बलिदान को भी याद करते हुए कहा कि जबलपुर की धरती वीरों के बलिदानों को समेटे हुए हैं। यहां रानी दुर्गावती, राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह जैसे कई महावीरों का लंबा इतिहास है। माँ नर्मदा का यह आंचल वीरता शोर्य पराक्रम के लिए समृद्ध रहा है। जनजातिय नायकों के शौर्य से सिंचित यह धरा अदभुत है। रानी दुर्गावती के बलिदान और एक-एक घटनाक्रम से पूरा क्षेत्र रोमांचित होता है। 1857 के पहले राजा शंकर रघुनाथ शाह ने अपने पराक्रम और पुरूषार्थ से खुद को भारत माता के चरणों में समर्पित कर दिया वे वीर नहीं महावीर हैं। उनके घटनाक्रम को स्मरण करके पीढिय़ा निकल जाएं लेकिन उनके बलिदान को भुलाया नहीं जा सकता है।
पिता के मार्ग पर पुत्र चला
मुख्यमंत्री श्री यादव ने कहा कि आम तौर पर यह मुश्किल होता है कि पिता जिस मार्ग पर चले पुत्र भी उसी मार्ग पर चले। यह कई जन्मों के पुण्य के बाद होता है कि एक ही जगह एक ही समय पिता पुत्र ने अपने आप को जीते जी इस बात के लिए प्रेरित किया कि हमें अपने धर्म पर गौरव होना चाहिए। उनका शौर्य पराक्रम अद्भुत था। अंगे्रजों के डर से बड़े बड़े शासक आवाज नहीं उठाते थे लेकिन राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह अलग ही मिट्टी के बने थे। वे ना केवल डंके की चोट पर अपनी बात रखते थे बल्कि आदिवासी अंचल में अलख जगाते थे। उन्होंने बताया कि हर बार जन्म लेंगे लेकिन कभी अंगे्रजों के आगे झुकेंगे नहीं।
परिवार ने साथ दिया
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिर्फ राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह ने देश के लिए अपने प्राण नहीं दिए। बल्कि उनके इस आंदोलन में उनका परिवार भी साथ था। पिता पुत्र ने तोप के आगे खड़े होकर भी अंग्रेजों की बात नहीं मानी। वे अपने धर्म पर अड़े रहे।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
कार्यक्रम में लोक निर्माण मंंत्री राकेश सिंह, मंत्री संपतिया उईके, महापौर जगत बहादुर ङ्क्षसह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, सांसद श्रीमती सुमित्रा बाल्मिीकी, विधायक अजय विश्नोई, अशोक रोहाणी, अभिलाष पांडे, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, भाजपा के प्रदेश कोषाअध्यक्ष अखिलेश जैन, नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज, नगर भाजपा अध्यक्ष रत्नेश सोनकर, ग्रामीण भाजपा के अध्यक्ष राजकुमार पटेल आदि उपस्थित थे।
Author: Jai Lok







