Download Our App

Home » जबलपुर » ऐसा नवाचार जिसने 180 लोगों को दिलाई सरकारी नौकरियाँ ..जबलपुर में भी

ऐसा नवाचार जिसने 180 लोगों को दिलाई सरकारी नौकरियाँ ..जबलपुर में भी

जबलपुर (जयलोक)
नगर निगम जबलपुर में नवपदस्थ आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार ने आइएएस अधिकारी बनकर ना सिर्फ देशसेवा और जनसेवा का संकल्प लिया बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत और मार्गदर्शक भी बने। युवाओं के लिए उन्होंने नवाचार करने में विशेष रुचि ली है। यह नवाचार वे अब जबलपुर में भी करने का इरादा रखते हैं। दैनिक जयलोक को दिये साक्षात्कार में उनकी की खूबियां भी सामने आयीं हैं। अब तक उनकी जहां-जहां पद स्थापना रही है वहां उन्होंने युवाओं को अच्छी पढ़ाई कराकर उन्हें नौकरी दिलाने का एक महत्वपूर्ण कार्य भी किया है। इसी का परिणाम है कि उनके द्वारा पढ़ाए गए 11 सौ छात्रों में से 180 छात्र आज शासकीय सेवा में कार्यरत हैं। जय लोक द्वारा किए गए सवालों के जवाब उन्होंने दिए हैं।

जयलोक – आपका जन्म और प्रारंभिक शिक्षा कहां हुई है?
निगमायुक्त – श्री अहिरवार ने बताया कि उनका जन्म टीकमगढ़ जिले में हुआ। यहां से उनकी प्रारंभिक शिक्षा शुरू हुई। 12 वीं के बाद उन्होंने इंदौर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने देश सेवा के लिए सिविल सर्विस को चुना। दिन रात की मेहनत का ही परिणाम रहा कि उन्होंने इतनी कठिन परीक्षा को उत्तीर्ण कर आज प्रदेश के बड़े जबलपुर नगर निगम कमिश्नर का मुकाम पाया। उन्होंने बताया कि सिविल सेवा की परीक्षा काफी कठिन होती है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी।

जयलोक- प्रशासनिक कार्य की शुरूआत में पहली पदस्थापना कहां से शुरू हुई?
निगमायुक्त – मेरी पहली पदस्थापना एसडीएम के पद पर छिंदवाड़ा में हुई थी। जो महाकौशल का ही एक जिला है। वहां परासिया में सर्विस की है और मैंने वहीं से बहुत कुछ सीखा। छिंदवाड़ा के बाद मेरी पोस्टिंग शिवपुरी में हुई। शिवपुरी के बाद राजगढ़, विदिशा में पोस्टिंग हुई। इसके बाद जिला पंचायत सीईओ नरसिंहपुर में मेरी पदस्थापना हुई। इसके बाद मैं सागर में नगर निगम कमिशनर रहा। उसके बाद इंदौर डेवलपेंट अथॉरिटी में सीओ रहा। इसके बाद मुझे जबलपुर नगर निगम के कमिश्नर के रूप में पदभार गृहण करने का मौका मिला।

जयलोक – प्रशासनिक सेवा कार्य के दौरान कोई ऐसी घटना जो यादगार रही हो?
निगमायुक्त – प्रशासनिक कार्यकाल ऐसा होता है कि यह हमारा मिशन है। मैं कभी यह नहीं मानता है कि मुझे दो तीन साल किसी जिले में किसी पोस्टिंग में रहना है और उसे किसी तरह से टाइम पास किया जाए। मैं हमेशा अपने कार्य को लेकर गंभीर रहा। जब मैं विदिशा में एसडीएम रहा तब मुझे एक ऐसी घटना हमेशा याद आती है जिसने मुझे छात्रों को आगे का रास्ता दिखाने के लिए प्रेरित किया। दसवीं-बारहवीं के बच्चों के परीक्षा में फेल होने पर तरह तरह की घटनाएं सुनने को मिलीं। वहां से यह योजना बनाई कि इन बच्चों के मार्गदर्शन लिए निशुल्क कोचिंग शुरू करना चाहिए। परीक्षा परिणाम आने के बाद हमने कोचिंग शुरू की और करीब 70 से 80 बच्चों ने कोचिंग में प्रवेश लिया। जिसके बाद छात्रों की संख्या बढ़ती हुई और 11 सौ बच्चोंं को शिक्षा दी।

जिसमें 80 से 90 शिक्षक निशुल्क शिक्षा देते थे। दो से ढाई साल हमारी क्लास वहां चली। जिसमें मप्र में आरक्षक के पद पर 50 छात्रों, बैंक में 4 छात्रों, मप्र लोक सेवा आयोग में दो छात्रों, संविदा शिक्षक, भारतीय सेना सहित कई शासकीय सेवाओं में छात्रों का चयन हुआ। इस तरह कुल 180 बच्चों ने शासकीय सेवा परीक्षा उत्तीर्ण कर नौकरी पायी। इसी सफलता से प्रेरित होकर कई अधिकारियों ने इस कार्य को शुरू किया। मेरी पोस्टिंग जब नरसिंहपुर में हुई तो वहां भी इस निशुल्क कोचिंग को शुरू किया गया। इंदौर, सागर में भी एमपी पीएससी और अन्य शासकीय परिक्षाओं के लिए प्रेरित किया।

जयलोक – नगर निगम कमिश्नर का पदभार गृहण करते ही एक्शान मोड में आ रहे हैं आते ही शहर का भ्रमण किया। इस दौरान जबलपुर के प्रति क्या नजरिया रहा शहर की व्यवस्थाओं पर आपका?
निगमायुक्त – जबलपुर बहुत ही सुंदर शहर है, यहां काफी बड़ा नगर निगम है यह प्रदेश का तीसरा बड़ा नगर निगम है। यहां नगर निगम ने काफी अच्छे काम किए हैं। अभी तक जो काम चल रहे वह बहुत अच्छे और जरूरत के हिसाब से चल रहे हैं। नगर निगम का काम व्यक्ति के जन्म से लेकर उसके अंतिम संस्कार तक का होता है। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक नगर निगम का काम जारी रहता है। इसी कड़ी में जब मैंने सुबह देखा तो पहले मैंने यहां की सफाई का जायजा लिया और इसके बाद साफ पानी के बारे में जानकारी ली। सफाई को बारीकी से देखा, जो काफी अच्छा अनुभव रहा। इसी का परिणाम है कि जबलपुर को स्वच्छता में पुरस्कार मिला। हमारा जो लक्ष्य है इसे हमें आगे बढ़ाना है। इसमें में यह कहना चाहूँगा कि हम कोई भी अभियान जनता की मदद के बिना पूरा नहीं कर सकते। हमें सबसे पहले अपनी सोच पर ध्यान देना होगा कि हम जब डोर टू डोर कचरा गाड़ी को अपने घर से कचरा देते हैं तो इसमें ध्यान दें कि गीला कचरा और सूखा कचरा अलग हो। जब हम अपने घर के बाहर कचरा नहीं फैलाएंगे तो शहर अपने आप साफ दिखने लगेगा। जनता के सहयोग से ही यह संभव हो पाएगा। जयलोक की हर घर मेंं पहुँच है यह एक अच्छा माध्यम है अपनी बात जनता तक पहुंचाने का।

जयलोक – स्वच्छता सर्वेक्षण में पाँचवे स्थान पर आने से शहर की उम्मीद जाग चुकी है। इसके आगे रैंकिग को आगे बढ़ाने के लिए कोई लक्ष्य निर्धारित किया गया?
निगमायुक्त – जबलपुर की जनता बहुत समझदार है, जो सहयोग करती है। सबसे जरूरी है कि गीले कचरे की प्रोसेसिंग अलग होनी चाहिए और सूखे कचरे की प्रोसेसिंग अलग होनी चाहिए। वेस्ट टू एनर्जी प्लांट को पूरी क्षमता के साथ चलाना है। दूसरी चीज यह है कि शहर के हर जगह पर कंट्रक्शन एंड डेमोलिशन वेस्ट के ढेर लगे हुए हैं। हम अपने घर का काम करते हैं और रेत, गिट्टी, कंकड़ सडक़ों पर डाल देते हैं। नगर निगम दल इन्हें उठाएगा और इसके लिए दल बनाया गया है।

 

इसे सीएनडी प्रोसेसिंग प्लांट पर ले जाकर प्रोसेस करेंगे ताकि शहर साफ रहे और वेस्ट मटेरियल का यूटिलाइजेशन हो सके। स्वच्छता में जो लोग हमें सहयोग करेंगे उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही जो सहयोग नहींं कर रहे हैं उन पर जुर्माना लगाया जाएगा। क्योंकि स्वच्छता व्यवस्था को सही करना है।
जयलोक – सागर में आप नगर निगम में पदस्थ रहे, इंदौर को भी करीबी से देखा तो इसका लाभ शहर को कैसे मिलेगा?
निगमायुक्त – जो हमारे प्रोजेक्ट हों उसे शुरू करना उतना जरूरी नहीं है बल्कि उसे शुरू करके जनता को समर्पित करना जरूरी है। हमारी टीम के साथ हमें अमृत-1 अमृत-2 के प्रोजेक्ट एसटीपी के कायज़्, मुख्यमंत्री अधोसंरचना प्रोजेक्ट, कायाकल्प के प्रोजेक्ट में क्या कठिनाई है इसको देखते हुए उसे समय पर पूरा करना है। यहां रीडेंसीफिकेंशन की गुंजाइश है इसमें हम अच्छे काम कर सकते हैं। चार पाँच स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। स्टेडियम, गौशाला, प्रोजेक्ट, गीता भवन के प्रोजेक्ट जल्दी पूरा करना है।
जयलोक – बड़ी चुनौती है वर्तमान समय में कि नगर निगम में आय और व्यय में कई करोड़ों का फर्क है?
निगमायुक्त – अधिकारियों के साथ बैठक में इस बात का भी उल्लेख किया कि आय ऐसी बढ़ाई जाए कि नगर निगम को इसका लाभ मिले। जनता को भी इसमें ज्यादा भार ना आए। हमें जो भी काम करना है अगर फंड होगा तो कार्य हो पाएंगे। अगर पैसा नहीं होगा तो हम कार्य तो शुरू कर पाएंगे लेकिन उसे पूरा नहीं कर पाएगे। ये कार्य फंड की कमी से बंद हो जाएंगे। उतना ही काम लेना चाहिए जितना फंड है और फंड का फ्लो बनाए रखना भी जरूरी है। हमारे एडीशनल कमिश्नर वित्त और रिवेन्यू की टीम की बैठक लेकर उनको इस विषय पर निर्देशित किया। जिसका परिणाम लोक अदालत में देखने को मिला। लोक अदालत में सात करोड़ 25 लाख रूपये टैक्स के रूम में निगम को एक दिन में मिले। इससे जाहिर होता है कि लोग टैक्स देना चाहते हैं लेकिन उनको समझाइश देकर सुविधाएं देकर प्रोत्साहित करेंगे। रेवेन्यू अधिकारी की तरफ से भी अभी स्कू्रटनी करना बाकी है और जो बड़े बकायादार हैं उनको बुलाकर समझाईश देकर उन्हें टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित करना है।

इसके साथ ही आय के नए स्त्रोतों का सर्जन करना होगा। जिसकी महापौर के साथ योजना बनाई जाएगी। इसके साथ ही कलेक्टर के साथ बैठक में जमीनों को चिन्हित करेंगे। प्रयास यहीं होगा कि जबलपुर नगर निगम को आर्थिक रूप से सशक्त और संपन्न बना सकें।
जयलोक – दैनिक कार्यप्रणाली में राजनैतिक हस्तक्षेप को आप कितना महत्व देते हैं?
निगमायुक्त – नगर निगम का कार्य राजनेताओं के साथ ही रहता है। नगर निगम उनका परिसर है। यहां हमारे महपौर हैं, निगम अध्यक्ष हैं, एमआईसी की टीम हैं और सभी का एक ही लक्ष्य होता है शहर का विकास। ये सभी सम्मिलित भूमिका में रहते हैं। नीचे से ही फीडबैक आता हैं, जिसमें वार्ड पार्षद बड़े महत्वपूर्ण होते हैं। जितना अच्छा फीडबैक सिस्टम होगा उतनी अच्छी काम की गति होगी। जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर विकास का कायज़् करना निगम का काम है।

 

 

प्रेमिका की हत्या कर खुद को गोली मारी

 

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » जबलपुर » ऐसा नवाचार जिसने 180 लोगों को दिलाई सरकारी नौकरियाँ ..जबलपुर में भी