
भोपाल (जयलोक)
प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में घटिया और नकली किस्म के कफ सिरप के कारण अभी तक 18 बच्चों की जान जा चुकी है यह मामला पूरे देश में चर्चित है। आज मुख्यमंत्री मोहन यादव अपना जबलपुर प्रवास का कार्यक्रम निरस्त कर छिंदवाड़ा पहुँचे और मृत बच्चों के परिजनों से मुलाकात कर दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री इस पूरे घटनाक्रम से काफी नाराज हैं और उन्होंने आज सख्त कार्रवाई करते हुए आईएस अधिकारी ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को हटा दिया है। जिले के उपऔषधि नियंत्रक एवं नियंत्रण प्राधिकारी, औषधि प्रशासन भोपाल, औषधि निरीक्षक जबलपुर, औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा तीनों को निलंबित कर दिया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भोपाल के उपऔषधि नियंत्रक शोभित कोष्टा, जबलपुर औषधि निरीक्षक शरद जैन, छिंदवाड़ा के औषधि निरीक्षक गौरव शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि जिस कैमिकल फार्मूला से सिरप बनाया गया था उसके अनुसार 4 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नहीं दिये जाने का उल्लेख सिरप की बॉटल में किया जाना था।

इन अधिकारियों के द्वारा स्पष्ट निर्देशों के बाद भी गाइडलाईन का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण उक्त दवाई का क्रय-विक्रय भण्डारण हुआ, जो कि निर्धारित मापदण्ड के अनुसार नहीं था। जबलपुर में स्टॉकिस्ट के पास किया गया भण्डार भी मापदण्ड के अनुसार नहीं पाया गया। जबलपुर के औषधि निरीक्षक शरद जैन की गंभीर लापरवाही पाये जाने पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। विगत दिवस छिंदवाड़ा में खांसी के सिरप से कई बच्चों की जान चली गई। इस मामले में पुलिस ने देर रात डॉ.प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया।

डॉक्टर पर आरोप है कि इन्होंने जो दवा लिखी है उसी से अधिकांश बच्चों की जान गई है। यह सरकारी डॉक्टर हैं, जो कि अपनी निजी क्लीनिक भी चलाते थे। यहां सवाल ये भी उठ रहा है कि डॉक्टर दवाएं लिखता है तो उसे पता नहीं होता है कि ये असली है या नकली। नकली दवाओं पर नकेल कसना सरकार का काम है। यही बात डॉ सोनी ने गिरफ्तारी के दौरान गुस्से में कही थी। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं और दवा वितरण प्रणाली में खामियों को उजागर किया है।
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Author: Jai Lok







