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फिर वही पुराना राग एक दो रात गांव में बिताओ…

(जय लोक)। हमेशा की तरह इस बार भी एक फरमान प्रदेश के आला अफसरों के लिए आ गया है कि चाहे वो कलेक्टर हो या कमिश्नर उनको महीने में एक या दो रात गांव में गुजारना  होगी और ये आदेश अपने नए मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव जी ने कलेक्टर कमिश्नर कांफ्रेंस के दौरान दिए हैं। अपने को तो कई बरस हो गए ये फरमान सुनते और अखबारों में पढ़ते, जो भी सरकार आती है जो भी मुख्यमंत्री बनता है और जब कभी इन बड़े-बड़े अफसरों की मीटिंग लेता है  यही कहता है कि अफसर लोग गांव में जाएं गांव वालों से मिले ताकि उनकी समस्याओं से रूबरू हो सके लेकिन अभी तक तो किसी भी बड़े अफसर ने दो रात छोड़ो दो घंटे भी गांव में नहीं बिताए होंगे । अपने को तो अभी तक का इतिहास ये बताता है कि ये एक फार्मेलिटी है जिसे हर मुख्यमंत्री और सरकार निभाती रहती है, इधर अफसर भी आदेश के बाद समवेत स्वर में कहते हैं नेता लोगों हम लोगों ने इतनी पढ़ाई की है, रात दिन मेहनत की है तब कहीं जाकर हम ‘आईएएस’ बने हैं और क्या इसलिए बने हैं कि अपना एयर कंडीशन ऑफिस छोडक़र गांव में जाकर रात बिताए, पेड़ के नीचे खटिया बिछा कर सोएं, अपने आप को मच्छरों से कटवाए, दिशा मैदान के लिए जंगल जाएं। हम लोग तो राज करने के लिए पैदा हुए और राज करते रहेंगे आप लोगों का क्या है आप तो पांच साल के बाद कहां होगे ये तो आप को भी नहीं मालूम लेकिन हमें तो तीस पैंतीस साल जनता पर राज करना है, वैसे भी फुर्सत किसको है गांव में जाने की। आपको तो वोट लेना है हमें थोड़ी वोट लेना है आप रात बताओ, दिन बताओ, महीने बिता लो, सालों साल गांव में बने रहो इससे हमारा क्या लेना देना हम तो अपने शहर में बेहतरीन एसी ऑफिस में बैठते हैं, एसी गाड़ी में घूमते हैं, बाहर अर्दली खड़ा रहता है, चैंबर के बाहर जनता की भीड़ लगी रहती है जो हाथ जोडक़र अपनी समस्याएं बताने के लिए  बेताब रहती है। दो ढाई तीन एकड़ में हमारा बंगला होता है जहां हम सब्जी भाजी भी उगा लेते हैं अब आप बताइए कि जब ऐसा ऐशो आराम हमारे साथ है तो हम गांव में जाकर करेंगे क्या? झोपड़ी में रहेंगे, हैंड पंप चलाकर  अपनी प्यास बुझाएंगे, ये सब अपने से ना हो सकेगा। वैसे भी अफसरों को मालूम है कि जो भी नया मुख्यमंत्री आता है वो ऐसे ही आदेश करता रहता है लेकिन अपने को आदेश का पालन करना कहां है और क्यों करें? गांव वालों को दिक्कत है तो वे हमारे पास आए हम यहीं बैठे-बैठे सब ठीक कर देंगे। वैसे भी सरकार हमको तो ‘सर्वज्ञानी’ मानती ही है डिपार्टमेंट कोई सा भी हो लेकिन उसके सर्वेसर्वा हम होते हैं हम भले ही ‘फ्यूज वायर’ के बारे में कुछ ना जानते हों  लेकिन बिजली विभाग हमारे अंडर में होता है, हमें ‘थर्मामीटर’ देखना भले ही ना आता हो लेकिन स्वास्थ्य विभाग के कर्ताधर्ता हम ही होते हैं, हम इंजीनियर ना हो लेकिन तकनीकी विभाग का सारा दारोमदार हम पर ही होता है अब ऐसे महाज्ञानी को आप गांव में भेज कर क्या हासिल करना चाहते हो? समस्याएं शहर में क्या कम हैं पहले हम उन्हें तो निपटा लें फिर गांव में देखेंगे। अपने को तो लगता है शिवराज सिंह चौहान कह कह कर हार गए कि एकाध रात को गांव में बिता लो लेकिन किसी ने गांव में पैर नहीं धरा अब डॉक्टर मोहन यादव जी भी उसी तर्ज पर अफसरों को ज्ञान दे रहे हैं कि आप लोगों को रात गांव में बिताना चाहिए लेकिन अपन शर्त लगा सकते हैं कि ना तो आज तक किसी अफसर ने गांव में रात बिताई है और ना वह भविष्य में कभी बिताएंगे।

दम हो तो पूजा जैसी
लोग बाग़ कहते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाएं कमजोर होती है लेकिन सिवनी में पदस्थ एसडीओपी पूजा पांडे ने तो तमाम पुरुषों को पीछे छोडक़र बता दिया कि उनसे कि उससे ज्यादा मजबूत और कोई नहीं है। रातों रात डेढ़ करोड़ कमाने की स्कीम जो उन्होंने चलाई और अपने स्टाफ के साथ वो डेढ़ करोड़ रूपया बांटने की जो कोशिश की उसने साबित कर दिया की महिलाएं भी अगर अपने पर आ जाएं तो फिर पुरुष भी उनके सामने पानी भरने लगते हैं। मैडम जी ने हवाला का लगभग तीन करोड़ रूपया पकड़ लिया रात को हवाला का पैसा ले जा रहे लोगों से पैसा छीन लिया और मारपीट के भगा दिया, सोचा दो नंबर का माल है कौन शिकायत करेगा लेकिन जो इतनी बड़ी राशि का हवाला कर रहा है उसका भी तो ऊपर कोई ना कोई जुगाड़ रहा होगा सो खबर हो गई जब व्यापारी अपने पैसे लेने पहुंचा तो मैडम ने बाकायदा उनका बैग वापस कर दिया कि जाइए लेकिन जब बैक व्यापारी ने खोला तो पता लगा कि एक करोड़ पैंतालीस लाख कम हैं छोटी-मोटी रकम होती तो शायद व्यापारी छोड़ भी देता कि चलो पुलिस से पंगा तो छूटा लेकिन एक करोड़ पैंतालीस लाख रकम कोई कम तो होती नहीं बस ऊपर तक खबर पहुंच गई और बड़े अफसर के हस्तक्षेप से वो पैसा भी बरामद हो गया और देखते ही देखते नौ पुलिसकर्मी, थाना प्रभारी और एसडीओ मैडम जो एक ही झटके में करोड़पति बनने के चक्कर में थी सस्पेंड हो गई, वैसे अपन का मानना है कि इसमें उनका दोष नहीं है क्योंकि रकम इतनी बड़ी थी और कोई होता तो उसकी भी लार टपक जाती एक ही झटके में जिंदगी भर की अगर कमाई हाथ आ रही है तो कौन उसमें हाथ नहीं मारेगा लेकिन मैडम को ये भी तो सोचना था कि जो इतना बड़ा काम कर रहा है ऊंची पहुंच वाला होगा। पता लगा है कि मैडम जी की पांच छह साल की नौकरी हुई है लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने पुलिस के सारे गुर सीख लिए थे ये बात अलग है कि आधे अधूरे ज्ञान ने उनकी लाई लूट ली और बैठे-बिठाए जांच तो खड़ी हुई साथ ही सस्पेंड भी हो गई बताया जा रहा है इस मामले को लेकर शासन प्रशासन दोनों बहुत गंभीर क्योंकि वर्दी पर तो हमेशा से दाग लगते आए लेकिन यह दाग इतना बड़ा है जिसको मिटाना बड़ा मुश्किल होगा देखना है मैडम जी का भविष्य क्या होता है।

वर्दी उतरवाने की धमकी
भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कलेक्टरों कमिश्नरों और पुलिस अधीक्षकों की जो बैठक ली उसमें जबलपुर के एसपी संपत उपाध्याय जी ने अपना दर्द बताते हुए कहा कि साहब हम करें तो करें क्या? किसी को  यदि चालान के लिए रोक लिया जाता है तो वो वर्दी उतरवाने की धमकी देता है। बड़ी मुश्किल में तो ये वर्दी मिली है और अगर किसी ने वास्तव में वर्दी उतरवादी तो ना घर के रहेंगे ना घाट के। मानते हैं अपने एसपी संपत उपाध्याय जी को कम से कम उन्होंने सच्चाई तो मुख्यमंत्री को बताई। वैसे भी आजकल तो कोई भी छोटा-मोटा नेता पुलिस को दम दे देता है कि तुम मुझे जानते नहीं हो एक मिनट में वर्दी उतरवा दूंगा यही बात एसपी साहब ने मुख्यमंत्री जी के सामने कह दी। मुख्यमंत्री जी भी करें तो क्या करें है तो सब उन्हीं की पार्टी के नेता फिर भी उन्होंने कहा कि नहीं नहीं आप लोग कानून का पालन करवाइए किसी से डरने की जरूरत नहीं लेकिन अपने को भी मालूम कि जब भी कोई मसला होता है पुलिस किसी को पकड़ती है तो नेता का ही फोन पहुंचता है और जब नेता का फोन पहुंचता है तो पुलिस भी सोचती है नेताजी से पंगा कौन ले आज छोटा नेता है कल हो सकता है विधायक बन जाए, मंत्री बन जाए, बना कर चलो बहरहाल अब देखना ये है कि ये छुटभैय्या नेता भविष्य में पुलिस को वर्दी उतरवाने की दम देते हैं या नहीं।

सुपर हिट ऑफ  द वीक
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‘लेकिन आज तो मैने दारू पी ही नहीं है’ श्रीमान जी ने आश्चर्य चकित होकर कहा
‘आज आपने नहीं मैने दारू पी है’ श्रीमती जी ने जवाब दिया।

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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