
जबलपुर (जयलोक)। कुछ लोग कहते हैं कि यह अतिक्रमण की कार्यवाही गरीबों को रोजी-रोटी के लिए मोहताज करने वाली है और बड़े अतिक्रमणकारियों पर प्रशासनिक कार्यवाही नहीं होती। लेकिन इस बार परिदृश्य कुछ बदला हुआ है। बड़ा छोटा कोई भी अतिक्रमणकारी चाहे वह ठेले पर हो चाहे उसने टीन शेड की दुकान लगाई हो, या फिर बाद में पक्का निर्माण अतिक्रमण के दायरे में आकर किया हो किसी को नहीं छोड़ा जा रहा है।
कारण है मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम ने संयुक्त अभियान तैयार किया। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय और नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने कार्य योजना तैयार की। शहर को संवारने की जवाबदारी उठा रहे महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने एवं सभी विधायकों ने भी स्वीकृति प्रदान की है। इसके बाद अतिक्रमण हटाने की ताबड़तोड़ कार्यवाही प्रारंभ हुई।
शरीर में कैंसर और शहर में अतिक्रमण एक बराबर होता है। शरीर में कैंसर का इलाज जब होता है तो खराब हो गए सेल को हटाकर नए सेल से बदला जाता है। इसी प्रकार अतिक्रमण कर सालों से सरकारी भूमि पर काबिज लोगों को हटाया जा रहा है। यातायात में अवरोध पैदा करने वाले लोगों को हटाया जा रहा है। लेकिन इनको विस्थापित करने की कार्य योजना भी क्रियान्वित की जा रही है।
प्रयास किया जा रहे हैं कि जिन अतिक्रमणकारियों खासकर जिन छोटे-मोटे चाय पान, अंडा नाश्ता के ठेले चल रहे थे उन्हें कहीं व्यवस्थित रूप से स्थान प्रदान किया जाए ताकि वह भी अपनी रोजी-रोटी कमा सकें और शहर की सडक़ अतिक्रमण मुक्त नजर आए। यातायात सुगम हो और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो।
वर्तमान परिदृश्य में एक बात और गौर की जा रही है कि अतिक्रमण की कार्यवाही के दौरान अतिक्रमण दल के प्रभारी मनीष तड़से हों चाहे उनकी पूरी टीम हो वह पहले लोगों को उनके द्वारा किए गए गलत कब्जे या अतिक्रमण की जानकारी देकर उन्हें समय भी दे रहे हैं ताकि वे स्वयं अपने अतिक्रमण हटा लें। सख्ती से पूर्व अतिक्रमण हटाने आग्रह किया जा रहा है। वहीं सार्वजनिक मुनादी भी करायी जा रही है जब कोई अतिक्रमणकारियों को हटाने जाता है और अतिक्रमणकारी प्रशासन को चुनौती देने का प्रयास करता है तो फिर सख्ती के साथ चालान की कार्रवाई जब्ती की कार्यवाही की जा रही है और अवैध निमार्णों को तोड़ा जा रहा है।
राकेश सिंह ने तय किया था कि पहले उनके क्षेत्र से हटाए जाएं अतिक्रमण
सबसे अच्छी बात यह नजर आ रही है कि इस पूरे मामले में अब छुटभैयों की नेतागिरी काम नहीं आ रही है। शहर को संवारने के लिए जबलपुर जिले का प्रदेश में नेतृत्व कर रहे कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह जो कि पश्चिम क्षेत्र के विधायक भी हैं उनके साथ जबलपुर नगर निगम के महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू एवं समस्त विधायकगण भी इस मुहिम को अपना समर्थन दे रहे हैं।
शहर के मतदाता अपने जनप्रतिनिधियों को इसलिए चुनते हैं कि वह शहर के लिए कुछ अच्छा कर पाएं। अतिक्रमण होते हैं 100-50 और इससे प्रभावित होने वालों की संख्या हजारों लाखों में होती है। जबलपुर का प्रदेश में नेतृत्व कर रहे कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह जो कि लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत संरचनाओं को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। मंत्री श्री सिंह ने प्रशासन की इस मुहिम को जायज माना है और वे इस बात के लिए सबसे पहले आगे आए और उन्होंने यह संदेश दिया कि यह कार्यवाही उनके विधानसभा क्षेत्र से प्रारंभ होनी चाहिए। मंत्री श्री सिंह का मानना है कि जो लोग विरोध कर रहे हैं वह यह नहीं समझ रहे हैं कि अतिक्रमण हटाने के बाद सडक़ें चौड़ी होने के बाद जो सुविधा लोगों को मिलेंगी, जो बदला हुआ स्वरूप लोगों को मिलेगा वहीं आर्थिक रूप से, सामाजिक रूप से और जीवन शैली के बेहतर स्तर के रूप से उनको लाभ ही पहुँचायेगा। गढ़ा क्षेत्र में जहां अभी बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही को अंजाम दिया जा रहा है जिन सडक़ों को चौड़ी करने के लिए अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं या लोगों के निर्माण तोडक़र काम किया जा रहा है वह लोग यह नहीं समझ रहे हैं कि इस काम के पूर्ण होने के बाद उनकी भूमि का आर्थिक आकलन चार गुना ज्यादा हो जाएगा। फिर इन्हीं चौड़ी सडक़ों पर बड़े व्यापरिक केन्द्र भी नज़र आएंगे।
महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू इस बात के पक्षधर हैं कि हर हाल में शहर की व्यवस्थाओं को सुधारना चाहिए कुछ एक अतिक्रमण अगर वर्षों से चले आ रहे हैं तो उनको हटाकर व्यवस्थित रूप से स्थान प्रदान किया जाना चाहिए। महापौर का मानना है कि छोटे व्यापारी जो ठेले पर या सडक़ के किनारे व्यापार कर रहे हैं उनको व्यवस्थित स्थान जल्द उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन शासकीय भूमि पर या फिर यातायात अवरुद्ध करने की दिशा में किसी प्रकार की कोई भी अनुमति किन्हीं भी अतिक्रमणकारियों को नहीं दी जाएगी। कुछ माहों पूर्व महापौर जगत बहादुर शाह अन्नू स्वयं भी शहर की सडक़ों पर चलकर लोगों से हाथ जोडक़र अतिक्रमण हटाने का अनुरोध भी कर चुके हैं।

10 साल बाद मेडिकल हुआ अतिक्रमण के कैंसर से मुक्त
सडक़ के दोनो किनारे जमे 150 से अधिक अतिक्रमणों को हटाया गया, 1 कि.मी. की कार्रवाई में व्यापारियों और नागरिकों ने दिया सहयोग
नगर निगम द्वारा जिला एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत मेडिकल कॉलेज के आसपास दस सालों से अधिक समय से कैंसर की तरह जमें 150 अतिक्रमणों को एक दिन में हटाने की बड़ी कार्रवाही की गई।
नगर निगम अतिक्रमण दस्तादल ने निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देशानुसार एवं अपर आयुक्त अरविन्द शाह की उपस्थित में लगभग एक किमी के मार्ग पर दोनों तरफ जमें अतिक्रमणों को हटाया। क्षेत्र के बदलते स्वरूप को देखते हुए लोगों ने भी अपना पूरा सहयोग इस कार्रवाही के दौरान प्रदान किया। नगर निगम द्वारा की गई इस बड़ी कार्रवाही के बाद मेडिकल अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों के साथ ही इस मार्ग से गुजरने वाले हजारों लाखों लोगों को इस कार्रवाही का लाभ मिलेगा।
साथ-साथ करवाई जा रही फेंसिंग – कार्रवाही के दौरान नगर निगम के उद्यान विभाग के द्वारा फेंसिंग भी कराई जा रही है। ताकि दोबारा यहां ठेले टपरे ना रखें जा सकें। फेंसिंग के दौरान इस बात का भी ख्याल रखा गया कि दोबारा यहां कब्जेधारी द्वारा कब्जा ना किया जा सके। इस तरह से कब्जे वाली जगह को फेंसिंग से बंद कर दिया गया।

हिमांशु मांडले हत्याकांड, हाईकोर्ट ने पाँचों आरोपियों को किया दोषमुक्त, रिहाई का आदेश
Author: Jai Lok







