
जबलपुर (जयलोक)। कैंट बोर्ड के चुनाव लंबे समय से टलते-टलते अब फिर करीब आते नजर आ रहे हैं। लखनऊ में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से पूर्व कैंट बोर्ड मेंबर्स की मुलाकात के बाद चुनाव की आहट तेज हो गई है। सबसे खास बात यह है कि इस खबर ने कैंट क्षेत्रों की ठंडी पड़ चुकी राजनीति में मानो नई जान फूंक दी है। महीनों से शांत बैठे जनप्रतिनिधि, संभावित उम्मीदवार और स्थानीय नेता अचानक एक्टिव मोड में आ गए हैं। जिन दफ्तरों में पिछले तीन वर्षों से सन्नाटा छाया था, वहां अब बैठकों, चर्चाओंं और रणनीति बनाने का दौर शुरू हो गया है। स्थानीय नागरिकों में भी उत्साह का माहौल है और संभावित चुनाव तारीखों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कई लोग खुले तौर पर कह रहे हैं कि लंबे समय से ठप पड़े विकास कार्यों को पटरी पर लाने का समय अब शायद आ ही गया है।
गौरतलब है की बीते शनिवार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ के दौरे पर थे। इसी दौरान जबलपुर समेत देशभर के पूर्व कैंट बोर्ड मेंबर्स उनसे मिले और चुनाव न होने से जनता के कार्य प्रभावित होने की बात रखी। मुलाकात के बाद पूर्व मेंबर्स का दावा है कि रक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द ही कैंट बोर्ड के चुनाव कराए जाएंगे। यह बयान लखनऊ के कई स्थानीय समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ है, जिसके आधार पर लखनऊ के पूर्व कैंट बोर्ड सदस्य संजय दयाल ने भी इसकी पुष्टि की है। इस एक कथन ने कैंट राजनीति में गजब की गर्माहट ला दी है।

दफ्तरों में फिर चहल-पहल
रक्षा मंत्री के कथन के बाद कैंट क्षेत्र में वह माहौल फिर लौट आया है, जो किसी भी चुनाव की तैयारी से पहले दिखाई देता है। कई नेता अपने पुराने समर्थकों से संपर्क साधने लगे हैं, संभावित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रहे हैं और सामाजिक संगठनों में भी नियमित बैठकों का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक दलों के बंद पड़े कार्यालयों में भी अचानक रौनक लौट आई है और सुबह से लेकर देर रात तक रणनीति और समीकरणों पर चर्चा होने लगी है। कई नेताओं ने तो महीनों से बंद पड़े अपने कार्यालयों की सफाई करवाकर उन्हें दोबारा खोलने की तैयारी शुरू कर दी है। यह सब संकेत दे रहा है कि कैंट क्षेत्र में चुनावी हलचल अब तेज होने वाली है।

2015 के बाद से ठप है चुनाव प्रक्रिया
कैंट बोर्ड रक्षा मंत्रालय का स्थानीय निकाय है, जो नगर निगम की तर्ज पर सफाई, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं का जिम्मा संभालता है। कैंट क्षेत्र में आखिरी बार फरवरी 2015 में आम चुनाव हुए थे, जिसके बाद फरवरी 2020 में बोर्ड का नियमित कार्यकाल पूरा हुआ। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने दो बार छह-छह महीने का विस्तार दिया, लेकिन फरवरी 2021 में सदन को भंग कर दिया गया और उसकी जगह वेरी बोर्ड की व्यवस्था लागू कर दी गई। तब से अब तक कोई चुनाव नहीं हुआ है और इसी वजह से कई विकास कार्य वर्षों से अधर में लटके पड़े हैं।

Author: Jai Lok







