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लैंड पुलिंग योजना वापस किसानों ने की आतिशबाजी

सिंहस्थ की मिट्टी को भूमि मंदिर में अर्पित कर ढोल की थाप पर थिरके
उज्जैन (जयलोक)। सिंहस्थ 2028 के लिए लाई गई लैंड पुलिंग योजना को राज्य सरकार ने वापस ले लिया है। सोमवार देर रात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों के बीच दो घंटे चली बैठक के बाद यह निर्णय घोषित किया गया। मंगलवार को बाल विज्ञान प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद सीएम ने कहा- हमारे लिए सौभाग्य की बात विश्व का सबसे बड़ा मेला सिंहस्थ है। साधु-संतों के साथ ही भव्यता की चिंता की है। किसानों के साथ उनकी सहमति के आधार पर विकास के आधार पर अच्छा प्लान कर रहे हैं। भविष्य में कोई बड़ी लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पैदा ना हो, इसके लिए प्रबंधन किया जा रहा है।
लैंड पुलिंग योजना को वापस लेने की घोषणा के बाद उज्जैन में किसानों ने आतिशबाजी की और ढोल की थाप पर नाचकर खुशी मनाई। किसानों ने सिंहस्थ की भूमि से मिट्टी ली और भूमि देवी के मंदिर में अर्पित की। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और बाहर ही जश्न मनाया। बता दें कि सरकार ने सिंहस्थ के लिए स्थायी निर्माण करने की योजना बनाई थी, जिसके लिए लैंड पुलिंग योजना लाई गई। इसमें 2378 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण किया जाना था। इस योजना के विरोध में भारतीय किसान संघ और किसान संघर्ष समिति लगातार आंदोलन कर रहे थे। किसान संघ ने मंगलवार से ‘घेरा डालो-डेरा डालो’ आंदोलन की घोषणा तक कर दी थी। किसान परिवार सहित राशन-पानी और बिस्तर लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचने वाले थे। इसी बीच सीएम ने देर रात बैठक बुलाकर योजना वापस लेने की घोषणा की। सोमवार सुबह दिल्ली में किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने दोपहर में किसान नेताओं को भोपाल बुलाया। रात तक चली बैठक में किसान संघ मांगों पर अड़ा रहा, जिसके बाद सरकार ने योजना वापस लेने का फैसला किया। बैठक में सीएस अनुराग जैन, संभागायुक्त आशीष सिंह, कलेक्टर रौशन सिंह, भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत किसान संघ के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद थे।
ये थी लैंड पुलिंग स्कीम
50 प्रतिशत भूमि उज्जैन विकास प्राधिकरण लेता और बची 50 प्रतिशत किसान या भूस्वामी के पास ही रहती। 25 प्रतिशत भूमि में रोड (सेंटर लाइटिंग, स्टॉर्म वाटर ड्रेन, सीवर एवं वाटर लाइन और अंडर ग्राउंड विद्युत लाइन) निर्माण होना था। 5 प्रतिशत भूमि पर पार्क विकसित किए जाने का प्लान था। 5 प्रतिशत भूमि पर आमजन की सुविधा के लिए पार्किंग, जनसुविधा केंद्र, हॉस्पिटल, स्कूल, विद्युत सब-स्टेशन आदि निर्माण होना था। प्राधिकरण 1806 किसानों की करीब 5000 सर्वे वाली किसानों की जमीन को लैंड पुलिंग कर इस पर हाईटेक कुंभ सिटी तैयारी की योजना तैयार की थी। अगर लैंड पुलिंग योजना सफल होती, तो ऐसा पहली बार होता, जब सिंहस्थ भूमि पर स्थायी सडक़ बिजली के पोल और अन्य निर्माण कर सिंहस्थ की भूमि पर धार्मिक शहर को विकसित किया जाता। इतने बड़े क्षेत्र में 60 से 200 फीट तक की सडक़ें बनेंगी जो इंटर कनेक्ट रहती। जिससे कुंभ में आने जाने वाले श्रद्धालुओं और समय रहते भीड़ बढऩे पर शिफ्ट किया जा सकता था।
इस मामले में आश्वस्त रहें : शुक्ल
कैबिनेट के बाद हुई ब्रीफिंग के दौरान सवाल पर डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि संबंधित विभाग इस पर काम करेगा तब सारी चीजें सामने आएंगी। आप इस मामले में आश्वस्त रह सकते हैं वहां चारों तरफ सिंहस्थ को लेकर तैयारियां चल रही हैं। सिक्स लेन, फोर लेन रोड बन रहे हैं, फ्लाइओवर, घाट बन रहे हैं। उसके साथ ही ज्यादा बेहतर व्यवस्थाएं हो सकें उसके लिए जो निर्णय हुए थे उसमें से लैंड पुलिंग एक्ट को वापस लिया है।

 

 

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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