
जबलपुर (जयलोक)। आज की रात अन्य रातों की तुलना में लंबी रहने वाली है। खगोलीय दृष्टि से आज काफी कुछ बदला नजर आएगा। आज जहां साल का सबसे छोटा दिन रहेगा तो वहीं रात सबसे लंबी रहेगी। धरती के अपनी धुरी पर झुकाव के कारण यह स्थिति बनेगी। खगोल विज्ञान में इसे शीतकालीन संक्रांति या शीतकालीन अयनांत कहा जाता है। देशभर में इसका प्रभाव दिखाई देगा। उत्तरी गोलाद्र्ध में सूर्य की किरणें तिरछी पडऩे के कारण दिन और रात की अवधि में यह बदलाव होता है। रविवार को मध्यप्रदेश में दिन औसतन 10 घंटे 44 मिनट का रहेगा, जबकि शेष अवधि में रात रहेगी। इस खगोलीय घटना के बाद से दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगेंगे।

विंटर सोल्स्टिस डे आज
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार विंटर सोल्स्टिस वह स्थिति होती है जब सूर्य अपनी सबसे दक्षिणी स्थिति पर पहुंचता है। इस दौरान उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की रोशनी सबसे कम समय के लिए दिखाई देती है। इस कारण दिन सबसे छोटा और रात सबसे लंबी होती है, आज के बाद धीरे-धीरे दिन की अवधि बढऩे लगेगी, रातें छोटी होने लगेंगी। हालांकि इस बदलाव को प्रत्यक्ष रूप से महसूस करने में कुछ दिन लग सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से आज से ही यह प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

इस दिन का विशेष महत्व
भारतीय पंचांग और परंपराओं में भी विशेष महत्व है, सूर्य के उत्तरायण होने को शुभ माना जाता है। यही कारण है कि आने वाले समय में मकर संक्राति जैसे पर्व मनाए जाते हैं। उत्तरायण को सकारात्मक ऊर्जा, नई शुरुआत और जीवन में प्रगति का प्रतीक माना जाता है। खगोल विज्ञान के अनुसार, पृथ्वी अपनी धुरी पर झुकी हुई स्थिति में सूर्य की परिक्रमा करती है। इससे मौसम और दिन-रात की अवधि में परिवर्तन होता है, विंटर सोल्स्टिस इसी प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है।

अब दिन धीरे-धीरे बढ़ेंगे
आज के बाद सूर्य की किरणें धीरे-धीरे उत्तरी गोलार्ध की ओर बढ़ेंगी, इससे तापमान में भी क्रमश: बदलाव देखने को मिलेगा। ठंड का असर कुछ समय तक बना रहेगा, लेकिन दिन बड़े होने से सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक मिलेगा, इससे कृषि, मौसम और मानव जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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Author: Jai Lok







