Download Our App

Home » दुनिया » बाघों की सुरक्षा में सेंध: इस साल अब तक 55 मौतें, 2010 से शिकार से मौत के मामलों में भी शीर्ष पर टाइगर स्टेट

बाघों की सुरक्षा में सेंध: इस साल अब तक 55 मौतें, 2010 से शिकार से मौत के मामलों में भी शीर्ष पर टाइगर स्टेट

भोपाल (जयलोक)। प्रदेश में बाघों की लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला सागर जिले का है, जहां ढाना रेंज के हिलगन गांव के पास जंगल में एक बाघ का शव मिलने से इलाके में हडक़ंप मच गया। यह पिछले 15 दिनों में प्रदेश में बाघ की सातवीं मौत है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, घटनास्थल से कुछ ही दूरी पर रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व स्थित है।
ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि यह बाघ उसी क्षेत्र से भटककर यहां पहुंचा होगा। बाघ की पहचान और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी। विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया है। इससे पहले बुधनी–मिडघाट रेललाइन पर भी एक बाघ का शव मिलने की घटना सामने आ चुकी है। बीत रहे वर्ष 2025 में प्रदेश में अब तक 55 बाघ की मौत हो चुकी है। इसमें अधिकतर मामले शिकार के हैं। वहीं, जानकारों का कहना है कि टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त मध्य प्रदेश वर्ष 2010 से अब तक शिकार से बाघों की मौत के मामलों में भी शीर्ष पर बना हुआ है।
प्रोजेक्ट टाइगर के बाद सर्वाधिक मौतें
सागर जिले में बाघ की मौत की घटना ऐसे समय सामने आई है, जब वर्ष 2025 में अब तक मध्य प्रदेश में कुल 55 बाघों की मौत दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत के बाद किसी एक वर्ष में अब तक का सबसे अधिक माना जा रहा है। पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो-2021 में 34, 2022 में 43, 2023 में 45 और 2024 में 46 बाघों की मौत दर्ज की गई थी। बीते छह वर्षों में ही प्रदेश में कुल 269 बाघों की मृत्यु हो चुकी है।
जिम्मेदारी तय होने पर ही रुकेंगी मौतें
वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने कहा कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लंबे समय से शिकारियों के निशाने पर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 की रिपोर्ट में बाघों की बढ़ती मौतों और शिकार की घटनाओं का उल्लेख किया गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। दुबे ने कहा कि जब तक शिकार के मामलों में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2010 से अब तक मध्य प्रदेश बाघों की अप्राकृतिक मौतों के मामलों में देश में शीर्ष पर रहा है।
बाघों की 57 प्रतिशत मौतें अप्राकृतिक
विशेषज्ञों और आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लगभग 57 प्रतिशत बाघों की मौतें अप्राकृतिक कारणों से हुई हैं। इनमें अवैध शिकार, बिजली के करंट से मौत, जहर देना और आपसी संघर्ष जैसे कारण शामिल हैं। कई मामलों में शिकारियों द्वारा बाघों के अंग काटकर ले जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तस्करी की आशंका और बढ़ जाती है।

 

युवक को निर्वस्त्र कर पीटने का वीडियो वायरल, अधारताल पुलिस ने स्वत: लिया जाँच में

Jai Lok
Author: Jai Lok

RELATED LATEST NEWS

Home » दुनिया » बाघों की सुरक्षा में सेंध: इस साल अब तक 55 मौतें, 2010 से शिकार से मौत के मामलों में भी शीर्ष पर टाइगर स्टेट
best news portal development company in india

Top Headlines

गैस की कालाबाजारी रोकने कलेक्टर का प्लॉन हर एजेंसी में तैनात रहेगा सरकारी कर्मी सभी एसडीएम को दिए अपने क्षेत्र की गैस एजेंसियों पर नजर बनाए रखने के निर्देश

गौकाष्ट, कोयला, लकड़ी, इंडक्शन चूल्हे का करें वैकल्पिक उपयोग-राघवेन्द्र सिंह जबलपुर (जय लोक)। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय हालात का

Live Cricket