
जबलपुर (जयलोक)
फिल्म जगत के जानेमाने अभिनेता राकेश बेदी देश विदेश में अपने कॉमेडी शो मसाज के 350 से अधिक शो कर चुके हैं। आज उनका यह बहुत चर्चित शो घंटाघर स्थित कन्वेंशन सेंटर में आयोजित है। एक हजार करोड़ के क्लब में पहुँचने वाली धुरंधर फिल्म में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके राकेश बेदी से दैनिक जयलोक के संपादक परितोष वर्मा ने उनका साक्षात्कार किया। इसमें उनके जीवन से जुड़े हुए पहलुओं और मसाज नाटक में उनकी भूमिका को लेकर उनके विचार जाने गए। दैनिक जयलोक द्वारा किए गए प्रश्न तथा राकेश बेदी के उत्तर यहां प्रस्तुत हैं।

जयलोक : जबलपुर में आप एक चर्चित कॉमेडी शो मसाज लेकर आए हैं, इसमें आपकी क्या भावना है। यह मूल रूप से मराठी मेंं श्री ….तेंदुलकर द्वारा रचित था फिर इसे ङ्क्षहदी में आपने रूपांतरित किया इसके पीछे आपकी क्या भावना है।
राकेश बेदी : ये चेलेंज था मेरे लिए, यह नाटक श्री तेंदुलकर साबह का लिखा हुआ है। यह कॉमेडी नहीं बल्कि एक आदमी की दुख भरी दास्तान है एक फेलियर की कहानी है। एक ऐसा आदमी जो एक्टर बनने आता है लेकिन नहीं बन पाता। हमें अक्षय कुमार, अमिताभ बच्चन, आमिर खान, सलमान खान की कहानी मालूम है। लेकिन एक ऐसे आदमी की कहानी नहीं मालूम जो कुछ ना कर पाया हो। उसको मैने कॉमेडी बनाया, यह चैप्लीन की कहानी जैसी है जिसकी हर फिल्म दुख भरी दांस्तां है, व्यथा है एक आदमी की। मुझे चैप्लीन बहुत पसंद है। मुझे उसकी सोच बहुत पसंद है मैने उसी सोच से इस कहानी को प्रेजेंटस किया। कहानी वहीं है जो तेंदुलकर साहब ने लिखी है लेकिन उसे थोड़ा ट्विस्ट बना दिया।
जयलोक : कॉमेडी शो मसाज में आप अकेले 24 किरदार निभा रहे हैं यह कितना चुनौतीपूर्ण है।
राकेश बेदी : चुनौतीपूर्ण तो था ये किरदार जब मैने ये किरदार करना शुरू किया तब शुरू-शुरू में लोग हंसते थे बोलते थे कैसे करोगे, बड़ा मुश्किल है बरर्बाद हो जाओगे। महेश भट्ट साहब ने इसका उद्घाटन किया था। लेकिन जब महेश भट्ट साहब ने इसका पहला शो देखा तो उन्होंने कहा कि यह नाटक हमेशा उतना ही ताजा रहेगा, जितना सुबह की ताजगी। इसे करते हुए आज 23 साल हो गए हैं और आज भी उतना ही ये फ्रेश है और चलता है। आज भी इसका ऐसा ही रिश्पांस मिलेगा, मुझे उम्मीद है।

जयलोक : हम लोगों ने आपको श्रीमान श्रीमती, भाभीजी घर हैं में आदाकारी में देखा। हजारों लाखों लोग आपके दीवाने हैं। मसाज के ढाई सौ से ज्यादा शो देश विदेश में हो चुके हैं। इसका क्या संदेश लोगों तक पहुँचाना चाहते हैं
राकेश बेदी : यह नाटक आपको जीना सिखाता है। हर आदमी को सक्सेस नहीं मिलती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर आदमी हताश हो जाए, दुनिया को छोड़ दे, आत्मगिलानी में जिए, आपको हर मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।

जयलोक : धुरंधर फिल्म धमाल मचा रही है। उसमें आपने जमील जमाली का किरदार निभाया है, इस किरदार को निभाने का निर्णय कैसे लिया।
राकेश बेदी : कलाकार तरसता है एक चैलेंजिंग रोल के लिए। अगर एक ही रोल जिंदगी भर कलाकार करेगा तो उसे भी लगता है कि मैने क्या चैलेंजिंग रोल किया। मुझे जब यह रोल मिला तो मुझे लगा कि यह रोल चैलेंजिंग है। मेरे डायरेक्टर ने मुझ पर भरोसा किया और उसे लगा कि यह रोल में ही अदा कर सकता हूँ। उनके ऊपर पे्रशर था कि वे किसी और कलाकार को लें, लेकिन डायरेक्टर ने मुझे ही चुना। ऐसे में मुझे उनके भरोसे पर खरा उतरना था और मैंने इसको जितना अच्छा कर सकता था किया।
जयलोक : जमील जमाली की कहानी आपके पास आई उसमें आपने कुछ अपना एफर्ट डाला।
राकेश बेदी : गंभीर रोल तो था इस आदमी में चालाकियाँ भरी हुई हंै। इसे हर परिस्थितियों से निपटना आता है। इस तरह का किरदार चैलेंजिंग था। फिल्म के परिस्थिति के हिसाब में मैने इसमें अपना रोल अदा किया।
जयलोक : धुरंधर का सेंकेड पार्ट 19 मार्च 2026 को आने वाला है इसमें जमील जमाली के रोल को कैसा देखा जाएगा।
राकेश बेदी : इस रोल के बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा लेकिन यह जरूर कहूँगा कि इसमें जमील जमाली का रोल और ज्यादा रोमांचित और खतरना है।
जयलोक : वर्तमान समय में नए अभिनेत्री अभिनेता को क्या सलाह देना चाहेंगे।
राकेश बेदी : आज की युवा बहुत जल्दी स्टारडम के पीछे भागना चाहते हैं। उनको बहुत जल्दी स्टारडम चाहिए। लेकिन ऐसा होता नहीं है। आज हर आदमी अपना चेहरा पोस्टर पर देखना चाहता है। यह अच्छी बात है यहीं सोच आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती है। लेकिन स्टारडम मेहनत से मिलती है। काम करना आएगा तो स्टार बन सकते हैं। पहले काम सीखो फिर सफलता मिलेगी। मुझे काम करते हुए 45 साल हो गए। लेकिन मैने कभी थियेटर नहीं छोड़ा। धुरधंर को रिलीज हुए कुछ ही दिन हुए हैं लेकिन मैं अभी भी थियेटर कर रहा हूं। अगले कुछ दिनों में मेरे और भी नाटक हंै जो आयोजित होने वाले हैं। मैं फिल्में भी करता हँू लेकिन थियेटर नहीं छोड़ता।
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Author: Jai Lok







