
भोपाल/इंदौर (जयलोक)। इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों पर सवाल पूछने वाले पत्रकार से बदसलूकी के बाद मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को आखिरकार सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने स्वीकार किया कि मीडिया के एक प्रश्न पर उनके शब्द गलत निकल गए और इसके लिए उन्होंने खेद प्रकट किया।
यह माफी सिर्फ एक बयान नहीं है, बल्कि उस पत्रकारिता की ताकत का सबूत है जो अगर एकजुट होकर सवाल पूछने लगे, तो सत्ता के सबसे मजबूत किले भी हिल सकते हैं।
दरअसल, एनडीटीवी के वरिष्ठ पत्रकार अनुराग द्वारी द्वारा इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों और मुआवजे को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने सार्वजनिक मंच से आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। इस घटना का वीडियो सामने आते ही पत्रकार संगठनों, सोशल मीडिया और आम लोगों में जबरदस्त नाराजग़ी देखी गई। दबाव बढ़ा, सवाल उठे और अंतत: मंत्री को पीछे हटना पड़ा। अपने बयान में विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि वे और उनकी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे हैं और जब तक लोग सुरक्षित नहीं होंगे, वे शांत नहीं बैठेंगे। लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि अगर मीडिया सवाल न पूछता, तो क्या जवाबदेही तय होती?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया है कि- जब मीडिया अपने सवालों पर अड़ जाता है, तो सत्ता को झुकना पड़ता है। यह माफी पत्रकार की नहीं, बल्कि पत्रकारिता की जीत है। यह घटना सिर्फ इंदौर या मध्य प्रदेश की नहीं है, यह उस लोकतंत्र की चेतावनी है, जहाँ सवाल पूछना अभी भी सबसे बड़ा हथियार है—बस उसे इस्तेमाल करने की हिम्मत चाहिए।
Author: Jai Lok







