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दिल्ली दरबार में सिंगरौली की पीड़ा: आदिवासियों ने राहुल के सामने खोली विस्थापन की फाइल, जोर पकड़ेगा मुद्दा

भोपाल (जयलोक)। एमपी के सिंगरौली जिले के आदिवासी इलाकों में वर्षों से चल रहे विस्थापन, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं के संकट की गूंज अब देश की राजधानी तक पहुंच गई है। जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से पहुंचे एक प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा और मांगों को सीधे राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने रखा। यह मुलाकात लोकसभा परिसर में राहुल गांधी के चेंबर में हुई, जहां आदिवासी प्रतिनिधियों ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि खनन परियोजनाओं और बड़े उद्योगों के विस्तार के चलते हजारों आदिवासी परिवार विस्थापन का दर्द झेल रहे हैं, लेकिन मुआवजा, पुनर्वास और रोजगार के वादे आज भी अधूरे हैं।
विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास बना सबसे बड़ा मुद्दा
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि सिंगरौली को ऊर्जा राजधानी कहा जाता है, लेकिन इसी विकास की कीमत आदिवासी समाज चुका रहा है। जमीन अधिग्रहण के बाद कई परिवारों को न तो उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई। खनन और औद्योगिक प्रदूषण के कारण खेती, जंगल और जल स्रोत प्रभावित हुए हैं, जिससे आजीविका पर भी संकट खड़ा हो गया है। शिक्षा-स्वास्थ्य की बदहाली पर चिंता- आदिवासी प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि कई गांवों में स्कूल, शिक्षक, अस्पताल और डॉक्टरों की भारी कमी है। प्रदूषण और औद्योगिक गतिविधियों के कारण लोगों में गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं, लेकिन इलाज की सुविधा सीमित है।
राहुल गांधी का भरोसा जल्द सिंगरौली दौरा
राहुल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि सिंगरौली की समस्याओं को संसद में मजबूती से उठाया जाएगा। उन्होंने जल्द ही सिंगरौली आने और जमीनी हालात का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने का वादा किया।
आदिवासी समाज में जगी नई उम्मीद
जानकारी के मुताबिक बासी विरदहा इलाके के लोगों के साथ राहुल गांधी से मुलाकात हुई और उन्हें औपचारिक रूप से सिंगरौली आने का निमंत्रण दिया गया। राहुल गांधी ने तुरंत आने का आश्वासन देकर प्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ाया। इस मुलाकात के बाद आदिवासी समाज में उम्मीद जगी है कि उनकी आवाज अब सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी।

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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