
एक बड़ा मशहूर शेर है ‘खुद हैरान हूँ अपने सब्र का पैमाना देखकर तूने याद भी ना किया और मैने इंतजार भी नहीं छोड़ा’। ये शेर भारतीय जनता पार्टी के उन तमाम नेताओं पर खरा उतरता है जो बेचारे पिछले तीन सालों से निगम, मंडलों, प्राधिकरण और आयोगों में नियुक्ति की राह देख रहे हैं। जब कोई खबर आती है कि बस अब जल्द ही इनमें नियुक्तियां होने वाली है ये तमाम नेता सफेद कलफ लगा कुर्ता पजामा पहनकर तैयार हो जाते हैं कि बस अब जाकर पदभार संभालना है। कितने त्यौहार बीत गए, कितने चुनाव हो गए, कितनी बड़ी-बड़ी घटनाएं हो गई, लेकिन उन बेचारों की किस्मत का ताला नहीं खुल पाया। पहले कहा बिहार चुनाव निबट जाए, फिर कहा मंत्रिमंडल का फैसला हो जाए, फिर कहा महाराष्ट्र में निकायों के चुनाव हो जाएं, सारे बड़े नेता उधर बिजी हैं, फिर कहा कि अभी महापौरों के लिए झगड़ा चल रहा है पहले इसका निबटारा हो जाए, उसके बाद कहा साल के आखिरी दिनों में क्या निर्णय लेना, नया साल आ जाने दो जो कुछ होगा नए साल में ही होगा, फिर कहा मकर संक्रांति निकल जाने दो, सूर्य उत्तरायण में आ जाए, फिर खबर दी कि नहीं छब्बीस जनवरी निकल जाए उसके बाद करते हैं, सुना है ये सब भी जब निकल गए तो बड़े नेताओं ने खबर भेज दी है की होली के पहले क्यों किसी का रंग फीका करें एक बार होली निकल जाए फिर करते हैं नियुक्तियां। अपने को तो लगता है कि होली क्या, शिवरात्रि, रामनवमी, राखी, दशहरा, दिवाली सब निकल जाएंगे लेकिन इन नेताओं की किस्मत नहीं खुलने वाली। तीन बरस हो गए आखिर कितना इंतजार करें ये नेता लोग, जिनको मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला वे भी आशा में है कि चलो कम से कम निगम मंडल के अध्यक्ष बन जाएंगे राज्य मंत्री या कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिल जाएगा पीली बत्ती वाली गाड़ी में बड़े-बड़े अक्षरों में लिख लेंगे राज्य मंत्री या कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त, लेकिन पता नहीं कौन सी किस्मत लेकर आए हैं बेचारे नेता। अपने को तो लगता है की देखते-देखते दो साल और बीत जाएंगे और फिर मध्य प्रदेश में चुनाव शुरू हो जाएंगे फिर यही कहा जाएगा कि यार इस बार तो नहीं लेकिन अगर इस बार सरकार बन गई तो पक्का नियुक्तियां हम कर देंगे, अब देखना यह है कि इसके बाद भी कौन से त्योहार का बहाना बीजेपी का हाई कमान लेता है क्योंकि त्यौहार तो हर साल आते हैं जैसे पिछले तीन सालों में कितने त्यौहार निकल गए वैसे ही अगले दो सालों में बहुत सारे त्यौहार निकल जाएंगे लेकिन उनकी किस्मत का त्यौहार शायद ना आ पाए लेकिन यह भी तय मान लो कि ये तमाम नेता उस गाने को अपने में आत्मसात किए हुए हैं ‘हम इंतजार करेंगे हम इंतजार करेंगे तेरा कयामत तक, खुदा करे कि कयामत हो और नियुक्तियां हो जाएं’।

पहले सोचो फिर बोलो
लगता है आजकल नगरीय प्रशासन मंत्री ‘कैलाश विजयवर्गीय’ जी के स्टार पर गड़बड़ चल रहे हैं कुछ बोलते हैं कुछ सोचते हैं और मुंह से कुछ निकल जाता है। पिछले दिनों एक पत्रकार के संग जो कुछ भी हुआ उससे उनकी इतनी भद्द पिटी कि उनको माफी मांगना पड़ी और तो और इंदौर के अखबारों में ‘इंदौर का बेटा’ कहकर बड़ा भारी विज्ञापन भी छपवाना पड़ा, उन्हीं के इलाके में दूषित पानी से कई लोगों की मौत हो गई अब एक और बयान उनके मुंह से निकल गया कि कोई लोक निर्माण मंत्री है और उनके बेटे के कपड़े ठेकेदार सिलवा रहे हैं। अब अपने प्रदेश में तो लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह हैं और मजे की बात तो ये है कि जिनके बेटे के कपड़े सिलवाने की बात विजयवर्गीय जी कह रहे हैं। उनका बेटा ही नहीं है उनकी बेटियां हैं। जब बहुत हल्ला मचा तो फिर उन्होंने अपना एक स्पष्टीकरण जारी किया कि मेरा मतलब यह नहीं था मेरा इशारा किसी व्यक्ति विशेष पर नहीं था मैं एक समग्र रूप से बात करना चाहता था। पता नहीं क्या हो गया है जिंदगी खपा दी राजनीति करते-करते लेकिन क्या कहना है और क्या नहीं कहना ये वे आज तक नहीं समझ पाए। कहते हैं ना जब वक्त बुरा आता है तो सारे पांसे उल्टे पड़ जाते हैं यही लगता है अपने कैलाश जी के साथ में हो रहा है। अपनी तो कैलाश जी को एक ही सलाह है कि या तो दो-चार महीने का मौन व्रत धारण कर लो ना कुछ बोलोगे ना किसी से पंगा होगा और यदि मौन व्रत नहीं रखना है तो क्या बोलना है पहले उसको आईने के सामने खड़े होकर दस बार बोलो और किसी हिंदी के विद्वान से पहले उसको चेक करवा लो कि इसमें कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं है जब वहां से क्लियरेंस मिल जाए तब ही जाकर कुछ कहो वरना आए दिन ऐसी ही छीछालेदर सहना पड़ेगी।

एक एंग्री ओल्ड मैन
अमिताभ बच्चन ने जब प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’ की थी और उसमें जो रोल किया था उसके बाद से उनका नाम ‘एंग्री यंग मैन’ हो गया था। अपने जबलपुर में भी एक नेता है जो अब एंग्री यंग मैन तो नहीं बल्कि ‘एंग्री ओल्ड मैन’ के रूप में जाने जाने लगे हैं और वो हैं पाटन क्षेत्र के विधायक ‘अजय बिश्नोई जी’ अपनी सरकार को जनहित के मुद्दों पर घेरने में कभी कोताही नहीं बरती। जब भी ऐसे मुद्दे आए जो जनमानस से जुड़े हों उसमें वे खुले रूप से शासन की खटिया खड़ी करते रहे। हाल ही में बरगी बांध की नहर टूटने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया में ये लिखा कि इस संदर्भ में मुख्यमंत्री का ध्यान कई बार आकृष्ट करवाया गया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई और अब भी यदि कार्यवाही नहीं की गई तो वे धरने पर बैठने से पीछे नहीं हटेंगे। अपने को तो ये मालूम है कि भारतीय जनता पार्टी में अनुशासन का डंडा चलता है और कोई भी पार्टी का व्यक्ति अपनी सरकार या अपने नेता के खिलाफ सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर नहीं कह सकता लेकिन अजय भाई की खासियत है कि वे इस बात की परवाह नहीं करते कि पार्टी उनके बारे में क्या सोचेगी या क्या कार्यवाही करेगी। शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में जब तीसरी बार मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ तब महाकौशल और विंध्य क्षेत्र से किसी को मंत्री नहीं बनाया गया था तब भी उन्होंने यही लिखा था कि ‘महाकौशल और विंध्य फडफ़ड़ा तो सकते हैं लेकिन उड़ नहीं सकते’। गाहेबगाहे जब भी ऐसी कोई स्थिति बनती है अजय भाई बिना किसी लाग लपेट के अपनी सरकार को घेरने में कोई दया नहीं दिखाते। अपना तो मानना है कि एंग्री ओल्ड मैन अजय बिश्नोई इसी तरह से महाकौशल की समस्याओं को लेकर मुखर बने रहे कोई नेता तो ऐसा है जो ऐसे मुद्दों पर अपनी राय सोशल मीडिया और ट्वीट के जरिए आम लोगों तक और सरकार तक पहुंचाता है।

सुपर हिट ऑफ द वीक
‘सुनिए अगर कोई मुझे भगा कर ले जाए तो आप क्या करेंगे’ श्रीमती जी ने श्रीमान से पूछा
‘कैसी बातें करती हो जानू’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया
‘फिर भी बताओ तो क्या करोगे’
‘भगाकर ले जाने वाले से बोलूंगा भैया भगाकर काहे को ले जा रहे हो आराम से ले जाओ मैं कौन सा रोक रहा हूं’ श्रीमान जी ने उत्तर दिया।
समीक्षा के दौरान अमित शाह ने भरी हुंकार कहा अगले माह नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा देश
Author: Jai Lok






