
जबलपुर (जयलोक)। जिले की पुलिस व्यवस्था को अपराध और अपराधियों के ऊपर मजबूत बनाए रखने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय लगातार विभाग में पदस्थ अधीनस्थ अधिकारियों को टाइट करने का कार्य कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने अपराधों की समीक्षा बैठक के दौरान बैठक में उपस्थित कुछ थाना प्रभारियों को उनकी गतिविधियों और कार्य शैली के बारे में अवगत कराते हुए चेतावनी दी थी कि वह जल्दी अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं अन्यथा अगली बैठक में वे शामिल नहीं हो पाएंगे। पुलिस अधीक्षक की चेतावनी के बावजूद भी कुछ थाना प्रभारी अपने रवैये में बदलाव नहीं ला पाए। जिसके परिणाम स्वरूप तीन थाना प्रभारी को हटा दिया गया है।

क्षेत्र में जुआँ, अवैध खनन, अपराधियों से याराना और अपराधियों के खिलाफ कमजोर एवं प्रभावी कार्यवाही ना करना इसकी मुख्य वजह बना है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संपत उपाध्याय के इस कठोर कदम से स्पष्ट संदेश गया है कि किसी भी थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जवाबदारी उस थाने के प्रभारी की है और इस कार्य में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एक थाना प्रभारी पर लगातार भू माफिया किस्म के लोगों से याराना निभाना भी भारी पड़ा है। इनके संबंध में पूरे क्षेत्र में यह चर्चा भी आम है कि भू-माफिया की दोस्ती में इन्होंने कुछ भूखंड भी अपने परिजनों के नाम से अवैध तरीके से अर्जित किए हैं। अभी यह चर्चाएं जांच में आ पाएंगी या नहीं इसके बारे में कुछ भी कहा नहीं जा रहा है। इसके अलावा बरेला, बरगी, चारगांव, सिहोरा मार्ग से अवैध खनिज लेकर निकलने वाले वाहनों पर कार्यवाही के बजाय इसे संबंधित थाना क्षेत्र के पुलिसकर्मियों द्वारा प्रबंधन का हिस्सा बना लिया जाना भी कार्यवाही की एक वजह बताई जा रही है।

चौकी प्रभारी पर 25000 का अर्थ दंड- लंबे समय बाद किसी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा सामान्य रूप से सस्पेंड, लाइन हाजिर किए जाने की कार्यवाही से अलग हटकर कानून से मजाक करने पर किसी चौकी प्रभारी के खिलाफ इतनी सख्त कार्यवाही करते हुए उसके ऊपर 25 हजार रूपये का अर्थ दंड भी लगाया गया है। रामपुर चौकी प्रभारी महेंद्र जाटव अपनी विवादित कार्यशैली के कारण लगातार वरिष्ठ अधिकारियों की निगाहों में थे और उन्हें पूर्व में भी कई बार चेतावनी दी जा चुकी थी। हाल ही में रामपुर चौकी क्षेत्र के अंतर्गत मांडवा टेंडर एक पर कुछ बदमाशों द्वारा लगातार फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया था और वे क्षेत्र में घूम कर ही आतंक फैला रहे थे। इस मामले में चौकी प्रभारी की भूमिका संदिग्ध नजर आई क्योंकि अपराधी से पीडि़त लोगों की आवाज को चौकी प्रभारी ने दबाने का काम किया। अर्थदंड की यह राशि 25000 रुपए चौकी प्रभारी महेंद्र जाटव के वेतन से काटी जाएगी।

बरगी, शहपुरा और बरेला से सर्वाधिक अवैध खनिज निकल रहा -ग्रामीण क्षेत्रों में बरगी और बरेला मार्ग पर पडऩे वाले ग्रामों से सर्वाधिक गिट्टी, मुरम, की चोरी हो रही है। इसके अलावा शहपुरा, सिहोरा, पाटन क्षेत्र के आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से लगी नदियों से रेत चुराने का काम धड़ल्ले से हो रहा है।
इन क्षेत्रों के संबंधित थाना प्रभारी को पूर्व में भी सख्त चेतावनी दी गई है कि वह इस दिशा में प्रभावी कार्यवाही लगातार करें।
तीसरी बार गौर चौकी के प्रभारी बने नितिन पाण्डे
इसे संयोग माना जाए या कुछ और सहायक निरीक्षक नितिन पांडे तीसरी बार गौर चौकी के प्रभारी बनाए गए हैं। पूर्व में भी यह लंबे समय तक गौर चौकी में रहे हैं। उसके बाद बस स्टैंड चौकी में इनकी पदस्थापना हुई थी। दूसरी बार निकले आदेश में एक दिन की आमद के बाद पुन: आदेश में संशोधन हुआ था और इन्हें बस स्टैंड चौकी में ही पदस्थ किया गया था। वर्तमान में यह डुमना चौकी प्रभारी थे अब पुन: गौर चौकी का उन्हें प्रभार मिला है। गौर चौकी संवेदनशील है और यहां से भी माफिया अवैध खनिज उत्खनन करता है। सिलुआ गांव के आसपास से नर्मदा नदी से अवैध रेत निकलती है, गिट्टी और मुरम की चोरी कर खनिज माफिया चौकी के सामने वाले मार्ग से ही शहर में बेचने के लिए लाता है। गौर चौकी के अंतर्गत अवैध शराब का भी बड़ा कारोबार है। यह उम्मीद की जा रही है कि पुराने अनुभव के आधार पर पुन: पदस्थ हुए नितिन पांडे प्रभावित कार्रवाई का प्रदर्शन कर पाएंगे।
देर से वल्लभ भवन आने और जल्दी जाने वाले अधिकारियों पर अब होगी कार्रवाई
Author: Jai Lok






