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जेल के पास है 15 हजार कैदियों का डिजिटल डाटा

दो सालों से जेल प्रबंधन जेल आने वाले कैदियों की कर रहा रेटिना फिंगरप्रिंट स्केनिंग

जबलपुर (जयलोक)। जेल आने वाले कैदियों ने कब कौन सा अपराध किया है और उसे कितने दिन की सजा मिली है इन सब बातों का रिकार्ड जेल प्रबंधन अब डिजिटल तरीके से रख रहा है। हालांकि यह कार्य जेल प्रबंधन पिछले दो सालों से कर रहा है। इस दौरान पूर्व में जेल पहुँचे कैदी और आजाद हुए कैदियों का भी डिजिटल रिकार्ड जेल के पास है। वहीं पिछले दो सालों से जेल आ रहे कैदियों का रेटिना स्कैन, फिंगरप्रिंट, चेहरे का फोटोग्राफ का डाटा भी संभाल कर रखा जा रहा है। जेल प्रबंधन का कहना है कि यह एक जरूरी कदम है जिससे एक क्लिक से ही कैदियों के बारे में जानकारी मिल जाती है। इस कार्य से जेल प्रबंधन के पास 15 हजार के आसपास कैदियों का डिजिटल डाटा मौजूद है।

अपराधियों के बायोमैट्रिक डेटा भले ही पुलिस के पास है, लेकिन जेल प्रबंधन भी जेल में आने वाले कैदियों का डिजिटल डाटा तैयार कर अपने पास रख रहा है। पहले इस रिकार्ड में उसका पूरा नाम, पता, अपराध, सजा और रिहाई की जानकारी होती थी। लेकिन अब डिजिटल युग में जेल प्रबंधन ने भी अपने कार्य को डिजिटल बना दिया है और इसी कड़ी में जेल प्रबंधन कैदियों की कुंडली तैयार करने के लिए डिजिटल डाटा तैयार कर रहा है। जेल मदन कमलेश का कहना है कि पिछले दो सालों से जेल आने वाले कैदियों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा रहा है। इसमें कैदी कितनी बार जेल आया, किस जुर्म में जेल आया, किस सजा में, कितने दिन जेल में रहा, उसकी रिहाई के साथ साथ उसकी आंखों का स्केन, फिंगरप्रिट और उसकी फोटो भी जेल प्रबंधन अपने डाटा में रख रहा है। जिससे जेल आने वाले कैदियों की पूरी डिजिटल कुंडली तैयार हो रही है।

कैदियों के पहचान में होती है आसानी

जेलर मदन कमलेश का कहना है कि डिजिटल डाटा से जेल प्रबंधन के पास कैदियों की पूरी जानकारी रहती है। एक क्लिक से ही कैदी का पूरा डाटा सामने आ जाता है। इस डाटा का बड़ा फायदा यह है कि अगर पुलिस को किसी मामले में कैदी के बारे में जानकारी हासिल करनी है तो वह जेल से भी मिल सकती है। वहीं कौन सा कैदी किस अपराध में जेल में बंद है यह जानकारी हासिल करना आसान हो गया है।

मुख्य गेट के पास बना रूम

जेलर मदन कमलेश ने बताया कि जेल के मुख्य गेट के पास एक रूम बनाया गया है। इस रूम में कैदियों का डाटा एकत्रित करने के लिए सभी उपकरण मौजूद हैं। जिसमें एक कर्मचारी को ड्यूटी के लिए तैनात भी किया गया है। जेल पहुँचते ही कर्मचारी कैदी का डाटा तैयार करता है। कैदी का डिजिटल डाटा तैयार होने के बाद ही उसकी आगे की प्रक्रिया शुरू की जाती है।

इनका कहना है

जेल आने वाले कैदियों की जानकारी रखने के लिए उनका डिजिटल डाटा दो सालों से लिया जा रहा है। जिसमें एक क्लिक पर ही कैदी की पूरी कुंडली सामने आ जाती है। अब तक 15 हजार के आसपास कैदियों का डिजिटल डाटा तैयार किया जा चुका है।
मदन कमलेश, जेलर

 

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Jai Lok
Author: Jai Lok

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