
नई दिल्ली। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध की मार अब वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखने लगी है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में उपजे तनाव के कारण पिछले 24 घंटों से कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह ठप है। ईरान की मिसाइल और ड्रोन हमलों की धमकी के डर से अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने लंगर डाल दिए हैं, जिससे वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस बीच, भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय कूटनीति के असर के चलते ईरान ने तिरंगा लगे दो भारतीय जहाजों को इस खतरनाक समुद्री रास्ते से गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। इसे भारत की कूटनीतिक बड़ी जीत माना जा रहा है।
भारत सरकार इस मामले में लगातार उच्च स्तरीय बातचीत कर रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं विभिन्न वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं ताकि खाड़ी में मौजूद भारत के 22 जहाजों के बेड़े की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। ईरान ने पहले ही संकेत दिए थे कि वह भारत और चीन जैसे मित्र देशों के जहाजों के लिए रास्ता खुला रखेगा। होर्मुज स्ट्रेट, जिससे दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है, वहां भारत को मिली यह प्राथमिकता नई दिल्ली और तेहरान के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों को दर्शाती है। हालांकि, क्षेत्र में युद्ध की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां हर कदम पर पैनी नजर रख रही हैं। शिपिंग डेटा और सूत्रों के अनुसार, भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) टैंकर, पाइन गैस और जग वसंत, जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करने की तैयारी कर रहे हैं। वर्तमान में ये दोनों जहाज संयुक्त अरब अमीरात के शारजाह के पास खाड़ी के पानी में लंगर डाले हुए हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से एक जहाज को बीपीसीएल और दूसरे को आईओसी ने किराए पर लिया है। व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक, ये टैंकर अपनी यात्रा फिर से शुरू कर सकते हैं। यह घटनाक्रम तब महत्वपूर्ण हो जाता है जब अमेरिकी पाबंदियों वाले टैंकर तक इस रास्ते पर जाने से कतरा रहे हैं।
Author: Jai Lok







