
(जय लोक)। अभी तक तो प्रदेश के मुखिया अपने अफसरों विशेष कर कलेक्टर और कमिश्नरों को गांव में रात बिताने का उपदेश देते रहे लेकिन किसी ने ये हिम्मत नहीं दिखाई अब ये पता लगा है कि प्रदेश के मुखिया जी ने मंत्रियों को भी अपने-अपने प्रभार के जिलों में रुकने और जिले के किसी गांव में रात बिताने और बैठक लेने के निर्देश दिए थे। लेकिन जो खबरें आई है उसमें ये पता लगा है कि किसी प्रभारी मंत्री ने एक या दो बैठक ली तो किसी ने मात्र एक दिन उस शहर में बिताया अब आप ही बताओ कि जब कलेक्टर कमिश्नर गांव में रात बिताने तैयार नहीं तो फिर मंत्रियों से कैसे उम्मीद की जा सकती है।

अपने को तो कई बरस हो गए ये फरमान सुनते और अखबारों में पढ़ते, जो भी सरकार आती है जो भी मुख्यमंत्री बनता है तो वो अपने मंत्रियों को कहता है कि आप लोगों को जिस जिले का प्रभार दिया गया है वहां बैठकें करें उधर की समस्याओं से दो चार हों, बेहतर हो कि अगर उस इलाके के किसी गांव में आप अगर रात बिताते हैं तो वहां की समस्याओं से आप परिचित हो पाएंगे पर अपने को तो अभी तक का इतिहास ये बताता है कि ये एक फॉर्मेलिटी है जिसे हर मुख्यमंत्री और सरकार निभाती रहती है, इधर मंत्री भी इस निर्देश के बाद सोचते है कि हम लोगों ने रात दिन मेहनत की है तब कहीं जाकर मंत्री बने हैं कितने पापड़ बेलने पड़े तब जाकर ये जलवा अपने कब्जे में आ पाया है और क्या इसलिए मंत्री बने हैं कि अपना बड़ा बंगला, अपना एयर कंडीशन ऑफिस, छोडक़र गांव में जाकर रात बिताएं, पेड़ के नीचे खटिया बिछा कर सोएं, अपने आप को मच्छरों से कटवाएं, जंगल जाएं। हम लोग तो राज करने के लिए पैदा हुए और राज करते रहेंगे, वैसे भी फुर्सत किसको है अपने प्रभार वाले जिले में जाने की और बैठकें लेने की।

आजकल तो टेक्नालॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि हम भोपाल में बैठे बैठे अपने जिले के अफसरों की बैठक वीसी के माध्यम से ले सकते हैं तो फिर काहे को राजधानी छोडक़र इधर उधर मारे-मारे फिरें और फिर आजकल भरोसा भी तो नहीं है कुर्सी का, कब नीचे से खिसक जाए इसलिए राजधानी में रहकर कुर्सी को मजबूती से पकड़ कर रखना भी तो मजबूरी है। दो ढाई तीन एकड़ में हमारा बंगला होता है जहां हम सब्जी भाजी भी उगा लेते हैं अब आप बताइए कि जब ऐसा ऐशो आराम हमारे साथ है तो हम जिले या गांव में जाकर करेंगे क्या? झोपड़ी में रहेंगे, हैंड पंप चलाकर अपनी प्यास बुझाएंगे, ये सब अपने से ना हो सकेगा गांव वालों को या प्रभार वाले जिले के लोगों को कोई परेशानी है तो आ जाएं भोपाल, हम यहीं बैठे बैठे सब ठीक कर देंगे। अपन शर्त लगा सकते हैं कि आज तक किसी अफसर ने गांव में रात नहीं बिताई तो जब अफसर रात बिताने में पीछे हैं तो मंत्रियों की तो बात ही छोड़ दो।

आलू कहना महँगा पड़ गया
ब्रिटेन के एक इंजीनियर को एक आयरिश महिला को ‘आलू’ कहना इतना महंगा पड़ गया कि उस बेचारे को 29 लाख रुपए का मुआवजा देना पड़ गया। दरअसल ‘आयरलैंड’ आलू की फसल उगाने में सबसे आगे है वहां आलू का सबसे ज्यादा उत्पादन होता है इसलिए जब ब्रिटेन के एक इंजीनियर को आयरिश महिला दिखाई दी तो उसने उसे आलू कहकर पुकार लिया, बस फिर क्या था महिला तो महिला और फिर आइरिश, उसने तत्काल में उस इंजीनियर पर मानहानि का मामला दर्ज करवा दिया उसका कहना था कि यदि किसी देश में ‘भिंडी’ ज्यादा उत्पादित हो रही हो तो क्या वहां की महिलाओं को भिंडी करके बुलाओगे, या कहीं ‘सकले’ का ज्यादा उत्पादन हो रहा हो तो क्या वहां के पुरुष को ‘सकला’ कहकर बुलाओगे किसी देश में गोभी की फसल ज्यादा हो रही है तो क्या किसी महिला को ‘गोभी’ के नाम से पुकारोगे, मामला चला और फिर ये आदेश हुए कि आलू नाम से जिस महिला को पुकारा गया है वो उसके सम्मान पर कुठाराघात है इसलिए इंजीनियर साहब आप 29 लाख रुपया उस महिला को बतौर मुआवजा दो। अपने को तो पता लगा है कि इतना पैसा देने के बाद वो इंजीनियर इतना डर गया है कि अब उसने आलू तक खाना छोड़ दिया है कि क्या पता कब मुंह से आलू शब्द निकल जाए और कोई उस पर मानहानि का मुकदमा ठोक दे, हाल ये है कि अगर उसको सपने में भी आलू दिख जाता है तो बेचारा घबरा के उठ जाता है और रात भर नहीं सोता लोग बाग कहते हैं कि आलू सबसे दमदार सब्जी मानी जाती है इस बात पर अब पूरा भरोसा हो गया कि आलू से बढक़र दुनिया में कोई नहीं है एक आलू 29 लाख का मुआवजा दिला सकता है इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।
मोहब्बत हो तो ऐसी
मोहब्बत के कई किस्से अपन ने सुने हैं लैला मजनू, शीरी फरहाद, रोमियो जूलियट, सलीम अनारकली जिन्होंने अपनी मोहब्बत के लिए पता नहीं क्या-क्या कर डाला। फरहान ने तो शीरी के लिए नहर खोद डाली थी, मजनू रेगिस्तान के जंगलों में लैला लैला पुकारता हुआ घूमता था, लेकिन ये सब बालिग प्रेमी थे इसलिए उनकी मोहब्बत भी बालिग हो गई थी लेकिन जर्मनी में एक नाबालिक 15 वर्षीय बालक ने अपनी गर्लफ्रेंड जो कुल जमा 14 साल की थी उसे स्कूल ले जाने के लिए एक बस चुरा ली और 130 किलोमीटर दूर स्कूल में उसको स्कूल छोडक़र आ गया, बेचारा जब वापस लौट रहा था तब पुलिस ने जीपीएस के सहारे उसको धर पकड़ा और बस जप्त कर ली। अरे भाई उसको तो इनाम देना चाहिए जो अपनी मोहब्बत को स्कूल छोडऩे के लिए 130 किलोमीटर बस चला कर ले गया सोचो उसका शिक्षा के प्रति कितना अनुग्रह था उसको लगा कि एक दिन भी उसकी गर्लफ्रेंड स्कूल नहीं पहुंच पाएगी तो उसका ज्ञान कमजोर हो जाएगा उसने भी आव देखा न ताव एक बस चुराई और अपनी गर्लफ्रेंड को स्कूल तक पहुंचा दिया बहरहाल चूंकि वह नाबालिक था इसलिए कानूनी कार्यवाही नहीं हुई लेकिन कहते हैं ना कि मोहब्बत में इंसान कुछ नहीं देखता और इसलिए उसने भी ये नहीं देखा कि अगर वह बस चुरायेगा तो कहीं ना कहीं पकड़ तो जाएगा लेकिन उसे इस बात का संतोष है कि उसने अपनी गर्लफ्रेंड को सही टाइम पर स्कूल पहुंचा दिया।
सुपर हिट ऑफ द वीक
‘दारू पीने के बाद आप बहुत हैंडसम लगते हो’ श्रीमती जी ने श्रीमान जी से कहा
‘लेकिन आज तो मैने दारू पी ही नहीं है’ श्रीमान जी ने आश्चर्य चकित होकर कहा
‘आज आपने नहीं मैने दारू पी है’ श्रीमती जी ने जवाब दिया।
100 करोड़ से अधिक लागत वाली जल जीवन मिशन परियोजनाओं की होगी सख्त जाँच
Author: Jai Lok






